HBSE Class 9 Hindi SAT-1 Sample Paper 2026 Answer Key

Haryana Board (HBSE) Class 9 Hindi SAT-1 Sample Paper 2026 Answer Key

खण्ड – क

1. व्याकरण पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 2 = 2 अंक)
(क) हिंदी भाषा की लिपि क्या हैं?
(i) गुरमुखी
(ii) रोमन
(iii) देवनागरी
(iv) ब्राह्मी
उत्तर – (iii) देवनागरी

(ख) दो या दो से अधिक शब्दों के सार्थक समूह को ………….. कहते हैं।
(i) वर्ण
(ii) अर्थ
(iii) शब्द
(iv) वाक्य
उत्तर – (iv) वाक्य

2. निम्नलिखित प्रश्नों के यथानिर्दिष्ट उत्तर दीजिए : (2 × 3 = 6 अंक)
(क) विकारी और अविकारी शब्द में अंतर बताइए।
उत्तर – विकारी शब्द : वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, कारक, काल या पक्ष के कारण परिवर्तन हो जाता है।
• अविकारी शब्द : वे शब्द होते हैं जिनके मूल रूप में किसी भी कारण से परिवर्तन नहीं होता।

(ख) भाषा किसे कहते हैं?
उत्तर – भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों को बोलकर या लिखकर दूसरों के सामने प्रकट करता है तथा दूसरों के विचारों को स्पष्ट रूप से समझता है।

(ग) वर्ण के कितने भेद होते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर – वर्ण दो प्रकार के होते हैं: स्वर और व्यंजन।
स्वर : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ आदि।
व्यंजन : क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ आदि।

(प्रश्न 3 या 4 में से किसी एक का उत्तर दीजिए)

3. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए। (5 अंक)
(क) कम्प्यूटर वर्तमान युग की आवश्यकता
(ख) व्यायाम का महत्त्व
(ग) प्रदूषण की समस्या
उत्तर – स्वयं करे।

4. चरित्र प्रमाण-पत्र लेने हेतु अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए। (5 अंक)
उत्तर –

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय
ए.बी.सी. विद्यालय
चरखी दादरी

विषय : चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के संबंध में

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 9 का छात्र हूँ। मैं विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहता हूँ और मन लगाकर पढ़ाई करता हूँ। मैं कक्षा का कार्य तथा गृहकार्य समय पर पूरा करता हूँ और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करता हूँ। मुझे आगे की कक्षा में प्रवेश के लिए चरित्र प्रमाण-पत्र की आवश्यकता है। इसलिए यह प्रमाण-पत्र मेरे लिए अत्यंत आवश्यक है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया मुझे मेरा चरित्र प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कृपा करें।

धन्यवाद।

भवदीय
आपका विद्यार्थी
नाम : अमित कुमार
कक्षा : 9
दिनांक : 15 मार्च 20XX

खण्ड – ख

5. क्षितिज भाग-1 (काव्य खण्ड) पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 2 = 2 अंक)
(क) ‘घर जाने की चाह है घेरे’ – पंक्ति में ललद्द्यद किसके घर जाने की कामना करती है?
(i) पति के
(ii) पिता के
(iii) परमात्मा के
(iv) संत के
उत्तर – (iii) परमात्मा के

(ख) गोपी सिर पर क्या धारण करना चाहती है?
(i) पगड़ी
(ii) मोर पंख
(iii) टोपी
(iv) चुनरी
उत्तर – (ii) मोर पंख

6. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
मोको कहाँ ढूँढ़ें बंदे, मैं तो तेरे पास में।
ना मैं देवल ना मै मसजिद, ना काबा कैलास में
ना तो कोने क्रिया-कर्म में, नहीं योग बैराग में
खोजी होय तुरतै, मिलिहों, पल भर की तालास में
कहैं कबीर सुनो भई साधो, सब स्वाँसों की स्वाँस में।
प्रश्न :
(क) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर – कवि : कबीरदास, कविता : कबीर की साखियाँ एवं सबद

(ख) कबीरदास के अनुसार ईश्वर कहाँ निवास करता है?
उत्तर – कण-कण में

(ग) खोजने वाले को ईश्वर कब मिलता है?
उत्तर – पल भर की तलाश में

(घ) ईश्वर किस प्रकार के क्रिया-कर्म करने से प्राप्त होता है?
उत्तर – निस्वार्थ भाव से कर्म करने से

(ङ) ‘देवल’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर – मंदिर

(प्रश्न 7 या 8 में से किसी एक का उत्तर दीजिए)

7. निम्नलिखित काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए : (3 अंक)
खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,
न खाकर बनेगा अहंकारी।
सम खा तभी होगा समभावी,
खुलेगी सांकल बंद द्वार की।
उत्तर : भाव सौन्दर्य – इस काव्यांश में कवि जीवन में संतुलन और संयम का महत्व बताते हैं। अधिक खाने से कोई लाभ नहीं मिलता और न खाने से व्यक्ति अहंकारी हो जाता है। केवल संतुलित भोजन करने से ही मनुष्य में समभाव उत्पन्न होता है। जब व्यक्ति समभावी बनता है तो उसके जीवन की रुकावटें दूर होकर उन्नति और आत्मज्ञान के द्वार खुल जाते हैं।
• शिल्प सौन्दर्य – कविता की भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली है। इसमें लयात्मकता है, जिससे विचार और भी प्रभावशाली बन जाते हैं। “खा-खाकर, न खाकर” में पुनरुक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है। “सांकल बंद द्वार” का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में किया गया है, जो जीवन की बाधाओं और आत्मज्ञान के मार्ग की ओर संकेत करता है।

8. रसखान का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण हैं? (3 अंक)
उत्तर – ये सब ब्रज क्षेत्र में स्थित हैं और यहीं पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी तरह-तरह की लीलाएँ रची थीं। कवि अपने आराध्य श्रीकृष्ण की समीपता का अनुपम सुख पाने के लिए बार-बार ब्रज के वन, बाग और तालाब को अपनी आँखों से देखना चाहता है।

खण्ड – ग

9. क्षितिज भाग-1 (गद्य खण्ड) पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 3 = 3 अंक)
(क) लेखक के अनुसार गधे में किनके गुण पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं?
(i) जानवर के
(ii) नेताओं के
(iii) ऋषि-मुनियों के
(iv) व्यापारियों के
उत्तर – (iii) ऋषि-मुनियों के

(ख) उपभोक्तावाद की संस्कृति के कारण हम कैसी दासता स्वीकार कर रहे हैं?
(i) विदेशी
(ii) आर्थिक
(iii) बौद्धिक
(iv) सांस्कृतिक
उत्तर – (iii) बौद्धिक

(ग) किस भिक्षु से विदाई लेकर लेखक चल पड़ा?
(i) नम्से
(ii) मंगोल
(iii) सुमति
(iv) दोन्क्विस्तो
उत्तर – (i) नम्से

(प्रश्न 10 या 11 में से किसी एक का उत्तर दीजिए)

10. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
“गाँधी जी ने कहा था कि हम स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने खिड़की-दरवाजे खुले रखें पर अपनी बुनियाद पर कायम रहे। उपभोक्ता संस्कृति हमारी सामाजिक नींव को ही हिला रही है। यह एक बड़ा खतरा है। भविष्य के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।”
प्रश्न :
(क) पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर – पाठ : उपभोक्तावाद की संस्कृति, लेखक : श्यामाचरण दूबे

(ख) गाँधी जी ने क्या कहा था?
उत्तर – हम अपनी बुनियाद पर कायम रहे।

(ग) भविष्य में आने वाली चुनौती के लिए हमे क्या करना होगा?
उत्तर – हमें अपनी सामाजिक नींव को मजबूत करना होगा।

(घ) उपभोक्ता संस्कृति से किसे और क्या चुनौती है?
उत्तर – सामाजिक नींव को, वह गिर (समाप्त) हो सकती है।

(ड़) दरवाजे खिड़की खुले रहने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – समय के साथ कुछ अच्छे बद‌लाव को ग्रहण करे।

11. मुंशी प्रेमचंद का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी कहानी कला की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। (5 अंक)
उत्तर –

मुंशी प्रेमचंद

• जन्म – मुंशी प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में बनारस के लमही गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। प्रेमचंद का बचपन अभावों में बीता।
• शिक्षा – उनकी शिक्षा बी.ए. तक ही हो पाई। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की परंतु असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और लेखन कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हो गए।
• रचनाएं – प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। उन्होंने हंस, जागरण, माधुरी आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
• साहित्यिक विशेषताएं – कथा साहित्य के अतिरिक्त प्रेमचंद ने निबंध एवं अन्य प्रकार का गद्य लेखन भी प्रचुर मात्रा में किया। प्रेमचंद साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते थे। उन्होंने जिस गाँव और शहर के परिवेश को देखा और जिया उसकी अभिव्यक्ति उनके कथा साहित्य में मिलती है। किसानों और मज़दूरों की दयनीय स्थिति, दलितों का शोषण, समाज में स्त्री की दुर्दशा और स्वाधीनता आंदोलन आदि उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं।
• भाषा शैली – प्रेमचंद के कथा साहित्य का संसार बहुत व्यापक है। उसमें मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षियों को भी अद्भुत आत्मीयता मिली है। बड़ी से बड़ी बात को सरल भाषा में सीधे और संक्षेप में कहना प्रेमचंद के लेखन की प्रमुख विशेषता है। उनकी भाषा सरल, सजीव एवं मुहावरेदार है तथा उन्होंने लोक प्रचलित शब्दों का प्रयोग कुशलतापूर्वक किया है।
• मृत्यु – सन् 1936 में इस महान कथाकार का देहांत हो गया।

12. अपनी यात्रा के दौरान लेखक को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? (2 अंक)
उत्तर – लेखक को भिखारी बनकर वहाँ जाना पड़ा और दुर्गम पहाड़ी मार्गों की कठिन चढ़ाई चढ़नी पड़ी। डाकुओं और लुटेरों से बचने के लिए उसे भीख माँगने का सहारा लेना पड़ा। यात्रा के दौरान लेखक अपने साथियों से बिछड़ गया और अपना सारा सामान पीठ पर लादकर पहाड़ी रास्तों पर चलना पड़ा।

खण्ड – घ

13. कृतिका भाग-1 के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिए : (3 अंक)
‘मृत्यु का तरल दूत’ किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर – मोटी डोरी की शक्ल में गेरुआ-झाग-फेन में उलझे बाढ़ के पानी को लेखक ने तरल दूत कहा है क्योंकि ये वो पानी था जिसका स्वरुप तरल था पर मौत का संदेश लेकर तेज़ी से बढ़ रहा था, जो अपने में शहरों, गाँवों को मृत्यु के विकराल दूत की भाँति निगल रहा था। इसलिए इसे मृत्यु का तरल दूत कहा गया है।

खण्ड – ङ

14. आदर्श जीवन मूल्य (मध्यमा) के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (2 × 2 = 4 अंक)
(क) ‘आर्जवम’ के रूप में ‘गीता’ के कृष्ण वास्तव में क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर – ‘आर्जवम’ का अर्थ है- स्वभाव की सरलता, सहजता, निष्कपटता तथा अहंकार और छल-कपट का पूर्ण अभाव। गीता में श्रीकृष्ण का संदेश है कि मनुष्य को जैसा वह वास्तव में है, वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। झूठा अहंकार, दिखावा और बनावटी व्यक्तित्व अधिक समय तक टिक नहीं सकता। ऐसे व्यक्ति को न सच्चा सम्मान मिलता है और न ही दूसरों का विश्वास और आशीर्वाद। इसलिए मनुष्य को सदैव सरल, सच्चा और निष्कपट होना चाहिए।

(ख) अर्जुन को ही श्रीकृष्ण का आश्रय क्यों मिला?
उत्तर – अर्जुन को ही श्रीकृष्ण का आश्रय इसलिए मिला क्योंकि वे सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले थे। उन्होंने कभी भी अधर्म का साथ नहीं दिया और जीवनभर धर्म का पालन किया। वे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा, पूर्ण निष्ठा, समर्पण और अडिग विश्वास रखते थे। साथ ही, उनमें अहंकार का अभाव था। इन्हीं श्रेष्ठ गुणों के कारण उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का विशेष स्नेह, मार्गदर्शन और आश्रय प्राप्त हुआ।