HBSE Class 9 Hindi Question Paper 2024 Answer Key

Haryana Board (HBSE) Class 9 Hindi Question Paper 2024 Answer Key

खण्ड – क

1. निम्नलिखित प्रश्नों के यथानिर्दिष्ट उत्तर दीजिए :
(क) भाषा किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। (2 अंक)
उत्तर – भाषा शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से बना है जिसका अर्थ है- बोलना या कहना। भाषा वह साधन है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने विचारों को बोलकर या लिखकर व्यक्त करता है और दूसरों के विचारों को सुनकर या पढ़कर समझ लेता है। दूसरे शब्दों में- जिसके द्वारा हम अपने भावों को लिखित अथवा कथित रूप से दूसरों को समझा सके और दूसरों के भावों को समझ सके उसे भाषा कहते है। जैसे- हिन्दी, अंग्रेजी।

(ख) सूर्य, घर (दो-दो) पर्यायवाची शब्द लिखिए। (2 अंक)
उत्तर : सूर्य – दिनकर, भानु, रवि
घर – गृह, आवास, निकेतन

(ग) अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए। (2 अंक)
उत्तर – जिस समास का पूर्वपद प्रधान तथा अव्यय हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। जैसे: आजीवन = जीवन भरा

(घ) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए : (2 अंक)
(i) आग में घी डालना
उत्तर – क्रोध को भड़काना
मेरे और मेरे मित्र की लड़ाई में रोहित ने आग में घी डालने का काम किया।

(ii) नौ दो ग्यारह होना
उत्तर – भाग जाना
पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया।

(ङ) उत्थान, निंदा (विलोम शब्द लिखिए)। (2 अंक)
उत्तर : उत्थान – पतन
निंदा – प्रशंसा

(च) (i) ‘चिर’ उपसर्ग का प्रयोग करते हुए दो शब्द बनाइए। (1 अंक)
उत्तर – चिरकाल, चिरगामी, चिरस्थायी

(ii) ‘इक’ प्रत्यय लगाकर दो शब्द बनाइए। (1 अंक)
उत्तर – सामाजिक, नाविक, मासिक

(छ) निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों का नाम लिखिए : (2 अंक)
(i) चाँदी की-सी उजली जाली
उत्तर – उपमा अलंकार

(ii) हँसमुख हरियाली हिम-आतप
उत्तर – अनुप्रास अलंकार

2. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए। (5 अंक)
(क) मेरे जीवन का लक्ष्य
(ख) व्यायाम का महत्त्व
(ग) वैश्विक पटल पर हिन्दी
(घ) विज्ञान : वरदान या अभिशाप
(ङ) स्वतंत्रता दिवस
उत्तर – विवेकानुसार स्वयं करे।

3. स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने हेतु अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को प्रार्थना-पत्र लिखिए। (5 अंक)
उत्तर –

सेवा में
श्रीमान प्रधानाचार्य जी
मॉडल संस्कृति स्कूल
चरखी दादरी

विषय : स्थानांतरण प्रमाण-पत्र लेने हेतु

श्रीमान जी
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 9वी का छात्र हूं। मेरे पिताजी एक सरकारी कर्मचारी हैं, उनका तबादला यहां से रोहतक हो गया है। इसलिए मुझे भी अपने परिवार के साथ वहां रोहतक रहना होगा। अतः मुझे वहां पर किसी विद्यालय में दाखिला लेने के लिए विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र देने का कष्ट करें। विद्यालय की तरफ से मुझ पर किसी भी प्रकार का कोई शुल्क बाकी नहीं रहता है। शीघ्र कार्यवाही के लिए मैं आपका आभारी रहूंगा। आपकी अति कृपया होगी।
धन्यवाद

आपका आज्ञाकारी शिष्य
कार्तिक कुमार
कक्षा 9वी

अथवा

समय के सदुपयोग का महत्त्व बताते हुए अपने अनुज को पत्र लिखिए।
उत्तर –

88, बाढ़डा
चरखी दादरी

दिनांक : 24 फरवरी 20XX

प्रिय अनुज,
सप्रेम नमस्ते
आशा है कि तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मैं यहां कुशलपूर्वक हूँ और यही कामना करता हूँ कि तुम भी स्वस्थ रहो।
आज मैं तुम्हें समय के सदुपयोग का महत्त्व बताते हुए पत्र लिख रहा हूँ। समय एक ऐसा अमूल्य संसाधन है जो एक बार चला जाता है तो फिर कभी वापस नहीं आता। यह हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और इसका सही उपयोग ही हमारे जीवन की दिशा और दशा तय करता है। समय का सही उपयोग करने से न केवल हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि हम अपने लक्ष्यों को भी समय पर प्राप्त कर सकते हैं। अच्छे समय प्रबंधन से हम अपने जीवन में संतुलन बनाए रख सकते हैं और व्यक्तिगत तथा पेशेवर दोनों क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। तुम्हें यह समझना चाहिए कि विद्यार्थी जीवन में समय का सदुपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह समय तुम्हारी नींव का निर्माण करता है और आगे की सफलता की गारंटी देता है। तुम जितना अधिक समय पढ़ाई, कौशल विकास, और सकारात्मक गतिविधियों में लगाओगे, उतना ही बेहतर भविष्य निर्माण कर पाओगे।
प्रिय अनुज, समय का सही उपयोग करके तुम अपने जीवन को सफल और समृद्ध बना सकते हो। मैं तुमसे यह आशा करता हूँ कि तुम इन बातों को समझोगे और अपने समय का सही उपयोग करोगे।
तुम्हारे उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ।

तुम्हारा स्नेही,
रोहित

खण्ड – ख

4. क्षितिज (काव्य-खण्ड) के आधार पर निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (1 × 6 = 6 अंक)
(i) कबीरदास के अनुसार व्यक्ति की पहचान किससे होती है?
(क) कुल से
(ख) धन से
(ग) वंश से
(घ) कर्म से
उत्तर – (घ) कर्म से

(ii) ‘घर जाने की चाह है घेरे’ – पंक्ति में ललद्यद किसके घर जाने की कामना करती है?
(क) अपने
(ख) पिता के
(ग) भगवान के
(घ) पति के
उत्तर – (ग) भगवान के

(iii) गोपियाँ श्रीकृष्ण की कौन-सी वस्तु धारण नहीं करना चाहतीं?
(क) मुकुट
(ख) मुरली
(ग) लाठी
(घ) मोरपंख
उत्तर – (ख) मुरली

(iv) ‘मोहन के व्रत’ में ‘मोहन’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) महात्मा गाँधी
(ख) कवि
(ग) मदन मोहन
(घ) मनमोहन
उत्तर – (क) महात्मा गाँधी

(v) ‘मरकत डिब्बे-सा खुला’ किसे कहा गया है?
(क) गंगा
(ख) गाँव
(ग) साँप
(घ) सनई
उत्तर – (ख) गाँव

(vi) रंग-बिरंगी किताबों को किसने खा लिया है?
(क) चूहों ने
(ख) चीटियों ने
(ग) दीमकों ने
(घ) बच्चों ने
उत्तर – (ग) दीमकों ने

5. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
मोको कहाँ ढूँढ़ें बंदे, मैं तो तेरे पास में।
ना मैं देवल ना मै मसजिद, ना काबा कैलास में
ना तो कोने क्रिया-कर्म में, नहीं योग बैराग में
खोजी होय तुरतै, मिलिहों, पल भर की तालास में
कहैं कबीर सुनो भई साधो, सब स्वाँसों की स्वाँस में।
प्रश्न :
(क) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर – कवि : कबीरदास, कविता : कबीर की साखियाँ एवं सबद

(ख) कबीरदास के अनुसार ईश्वर कहाँ निवास करता है?
उत्तर – कण-कण में

(ग) खोजने वाले को ईश्वर कब मिलता है?
उत्तर – पल भर की तलाश में

(घ) ईश्वर किस प्रकार के क्रिया-कर्म करने से प्राप्त होता है?
उत्तर – निस्वार्थ भाव से कर्म करने से

(ङ) ‘देवल’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर – मंदिर

6. निम्नलिखित काव्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए : (3 अंक)
अब रजत स्वर्ण मंजरियों से
लद गई आम्र तरु की डाली,
झर रहे ढाक, पीपल के दल,
हो उठी कोकिला मतवाली।
उत्तर – काव्य-सौन्दर्य : इन पंक्तियों में साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है। भाषा सरल तथा सहज है। प्रसाद गुण तथा काव्यांश में शांत रस का प्रयोग है। यह काव्यांश प्राकृतिक सौंदर्य, ऋतु परिवर्तन, और प्रकृति के प्रति कवि के प्रेम को बहुत ही सुंदर और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है, जो इसे काव्यात्मक सौंदर्य से परिपूर्ण बनाता है।

7. (क) ब्रज भूमि के प्रति कवि का प्रेम किन-किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है? (3 अंक)
उत्तर – कवि ने ब्रजभूमि के प्रति अपने प्रेम को कई रूपों में अभिव्यक्त किया है। कवि की इच्छा है कि वे चाहे जिस रूप में जन्म लें, हर रूप में ब्रजभूमि में ही वाह करें। यदि मनुष्य हों तो गोकुल के ग्वालों के रूप में बसना चाहिए। यदि पशु हों तो नंद की गायों के साथ चरना चाहिए। यदि पत्थर हों तो उस गोवर्धन पहाड़ पर होना चाहिए जिसे कृष्ण ने अपनी उंगली पर उठा लिया था। यदि पक्षी हों तो उन्हें यमुना नदी के किनार कदम्ब की डाल पर बसेरा करना पसंद हैं।

(ख) ‘मेघ आए’ कविता में किस संस्कृति का वर्णन किया गया है? उदाहरण सहित लिखिए। (3 अंक)
उत्तर – ‘मेघ आए’ कविता में ग्रामीण संस्कृति का वर्णन है। बादलों के आगमन पर उल्लास का वातावरण बनना, हवा चलना, पेड़ पौधों का झूमना, आँधी चलना, धूल उड़ना, लता का पेड़ की ओट में छिपना बादलों का गहराना, बिजली का चमकना, बरसात होना आदि सभी ग्रामीण संस्कृति से ही संबंधित हैं।

खण्ड – ग

8. क्षितिज (गद्य-खण्ड) के आधार पर निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (1 × 6 = 6 अंक)
(i) छोटी लड़की जिसने बैलों को रोटियाँ खिलाई, उसके पिता का क्या नाम था?
(क) गया
(ख) झूरी
(ग) भैरो
(घ) सुमित
उत्तर – (ग) भैरो

(ii) मन्दिर में कन्जुर की कितनी हस्तलिखित पोथियाँ रखी हुई थीं?
(क) 103
(ख) 113
(ग) 104
(घ) 123
उत्तर – (क) 103

(iii) उपभोक्तावाद की संस्कृति के कारण हम कैसी दासता स्वीकार कर रहे हैं?
(क) आर्थिक दासता
(ख) बौद्धिक दासता
(ग) सांस्कृतिक दासता
(घ) सामाजिक दासता
उत्तर – (ख) बौद्धिक दासता

(iv) ‘साँवले सपनों की याद’ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) संस्मरण
(घ) यात्रावृत्तांत
उत्तर – (ग) संस्मरण

(v) कुंभनदास का जूता कहाँ आने-जाने से घिस गया था?
(क) दिल्ली
(ख) आगरा
(ग) होशंगाबाद
(घ) फतेहपुर सीकरी
उत्तर – (घ) फतेहपुर सीकरी

(vi) महादेवी की माता जी किसके पद विशेषरूप से गाती थीं?
(क) कबीर
(ख) मीरा
(ग) रसखान
(घ) सूरदास
उत्तर – (ख) मीरा

9. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
उन जैसा ‘बर्ड वाचर’ शायद ही कोई हुआ हो। लेकिन एकांत क्षणों में सालिम अली बिना दूरबीन भी देखे गए हैं। दूर क्षितिज तक फैली जमीन और झुके आसमान को छूने वाली उनकी नजरों में कुछ-कुछ वैसा ही जादू था, जो प्रकृति को अपने घेरे में बाँध लेता है। सालिम अली उन लोगों में थे जो प्रकृति के प्रभाव में आने की बजाए प्रकृति को अपने प्रभाव में लाने के कायल होते हैं। उनके लिए प्रकृति में हर तरफ एक हँसती खेलती रहस्यमयी दुनिया थी।
प्रश्न :
(क) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।
उत्तर – लेखक : जाबिर हुसैन, पाठ : साँवले सपनों की याद

(ख) प्रस्तुत गद्यांश का प्रसंग लिखिए।
उत्तर – प्रस्तुत गद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक क्षितिज भाग-1 में संकलित ‘साँवले सपनों की याद’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इस गद्यांश में प्रकृति प्रेमी सालिम अली का वर्णन किया गया है।

(ग) इस गद्यांश में ‘बर्ड वाचर’ कौन है?
उत्तर – सालिम अली

(घ) पक्षियों के सम्बंध में सालिम अली के क्या विचार थे?
उत्तर – सालिम अली जीवनभर पक्षियों की खोज में खोए रहे। वे पक्षियों के लिए एक समर्पित ‘वर्ड वाचर’ थे।

(ङ) एकांत क्षणों में सालिम अली कैसे देखे गए?
उत्तर – बिना दूरबीन के

10. मुंशी प्रेमचन्द अथवा महादेवी वर्मा का जीवन परिचय देते हुए, उनकी रचनाओं, साहित्यिक विशेषताओं एवं भाषा शैली पर प्रकाश डालिए। (5 अंक)
उत्तर –

मुंशी प्रेमचंद

• जन्म – मुंशी प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में बनारस के लमही गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। प्रेमचंद का बचपन अभावों में बीता।
• शिक्षा – उनकी शिक्षा बी.ए. तक ही हो पाई। उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की परंतु असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और लेखन कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हो गए।
• रचनाएं – प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान उनके प्रमुख उपन्यास हैं। उन्होंने हंस, जागरण, माधुरी आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
• साहित्यिक विशेषताएं – कथा साहित्य के अतिरिक्त प्रेमचंद ने निबंध एवं अन्य प्रकार का गद्य लेखन भी प्रचुर मात्रा में किया। प्रेमचंद साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते थे। उन्होंने जिस गाँव और शहर के परिवेश को देखा और जिया उसकी अभिव्यक्ति उनके कथा साहित्य में मिलती है। किसानों और मज़दूरों की दयनीय स्थिति, दलितों का शोषण, समाज में स्त्री की दुर्दशा और स्वाधीनता आंदोलन आदि उनकी रचनाओं के मूल विषय हैं।
• भाषा शैली – प्रेमचंद के कथा साहित्य का संसार बहुत व्यापक है। उसमें मनुष्य ही नहीं पशु-पक्षियों को भी अद्भुत आत्मीयता मिली है। बड़ी से बड़ी बात को सरल भाषा में सीधे और संक्षेप में कहना प्रेमचंद के लेखन की प्रमुख विशेषता है। उनकी भाषा सरल, सजीव एवं मुहावरेदार है तथा उन्होंने लोक प्रचलित शब्दों का प्रयोग कुशलतापूर्वक किया है।
• मृत्यु – सन् 1936 में इस महान कथाकार का देहांत हो गया।

अथवा

महादेवी वर्मा

• जन्म – महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फ़र्रुखाबाद शहर में हुआ था।
• शिक्षा – उनकी शिक्षा-दीक्षा प्रयाग में हुई। प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्राचार्या पद पर लंबे समय तक कार्य करते हुए उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए काफ़ी प्रयत्न किए।
• रचनाएं – महादेवी जी छायावाद के प्रमुख कवियों में से एक थीं। नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा, दीपशिखा उनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं। कविता के साथ-साथ उन्होंने सशक्त गद्य रचनाएँ भी लिखी हैं जिनमें रेखाचित्र तथा संस्मरण प्रमुख हैं। अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, पथ के साथी, श्रृंखला की कड़ियाँ उनकी महत्वपूर्ण गद्य रचनाएँ हैं।
• साहित्यिक विशेषताएं – महादेवी वर्मा को साहित्य अकादमी एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया।
• भाषा शैली – उनकी भाषा शैली सरल एवं स्पष्ट है तथा शब्द चयन प्रभावपूर्ण और चित्रात्मक है।
• मृत्यु – सन् 1987 में महादेवी वर्मा का देहांत हो गया।

11. (क) लेखक लङ्कोर के मार्ग में अपने साथियों से किस कारण पिछड़ गया? (2 अंक)
उत्तर – लङ्कोर जाते समय लेखक को जो घोड़ा मिला था वह बहुत धीरे-धीरे चल रहा था। उनका घोड़ा बहुत सुस्त था। एक जगह पर दो रास्ते निकल रहे थे, वे रास्ता भटककर एक-डेढ़ मील ग़लत रास्ते पर चले गए थे। उन्हें वहाँ से वापस आना पड़ा। यही कारण है कि लङ्कोर के मार्ग में लेखक अपने साथियों से पिछड़ गया।

(ख) महादेवी वर्मा ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है? (2 अंक)
उत्तर – लेखिका की मां हिंदी पढ़ी लिखी थी। मां ने लेखिका को पंचतंत्र पढ़ना सिखाया था। मां संस्कृत भी जानती थी तथा उनकी गीता पढ़ने में विशेष रुचि थी। वह पूजा-पाठ बहुत अधिक करती थी। वह मीरा के पद गाती थी।

खण्ड – घ

12. कृतिका (भाग-1) के आधार पर निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (3 + 3 = 6 अंक)
(क) ‘मृत्यु का तरल दूत’ किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर – मोटी डोरी की शक्ल में गेरुआ-झाग-फेन में उलझे बाढ़ के पानी को लेखक ने तरल दूत कहा है क्योंकि ये वो पानी था जिसका स्वरुप तरल था पर मौत का संदेश लेकर तेज़ी से बढ़ रहा था, जो अपने में शहरों, गाँवों को मृत्यु के विकराल दूत की भाँति निगल रहा था। इसलिए इसे मृत्यु का तरल दूत कहा गया है।

(ख) लेखिका की नानी की आजादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागेदारी रही?
उत्तर – वह प्रत्यक्ष रुप में भले ही आज़ादी की लड़ाई में भाग नहीं ले पाई हों परन्तु अप्रत्यक्ष रुप में सदैव इस लड़ाई में सम्मिलित रहीं और इसका मुख्य उदारहण यही था कि उन्होनें अपनी पुत्री की शादी की ज़िम्मेदारी अपने पति के स्वतंत्रता सेनानी मित्र को दी थी। वह अपना दामाद एक आज़ादी का सिपाही चाहती थीं न कि अंग्रेज़ों की चाटुकारी करने वाले को।

(ग) शंकर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर – शंकर एक आत्मसंयमी और संयमित व्यक्ति है। उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में अनेक बाधाएं और संकटों का सामना किया है, लेकिन वह कभी भी हताश नहीं हुआ है। उनका संयम उन्हें दुःखों और कठिनाइयों के साथ सामर्थ्य और आत्मविश्वास से सामना करने में मदद करता है। शंकर धार्मिकता और निष्ठा का पालन करने वाला व्यक्ति है।

खण्ड – ङ

13. (1) नैतिक शिक्षा (पाठ्य-पुस्तक) के आधार पर निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (1 × 4 = 4 अंक)
(i) शिवाजी के गुरु का क्या नाम था?
(क) स्वामी रामदास
(ख) रविदास
(ग) नंददास
(घ) शाहजी भोंसले
उत्तर – (क) स्वामी रामदास

(ii) ब्रह्मगुप्त द्वारा प्रतिपादित कुट्टकाध्याय का सम्बन्ध गणित की किस शाखा से है?
(क) अंकगणित
(ख) बीजगणित
(ग) रेखागणित
(घ) सांख्यिकी
उत्तर – (ख) बीजगणित

(iii) वेदान्तिक पण्डित व साधक तोतापुरी ने किसे वेदांत की शिक्षा प्रदान की थी?
(क) स्वामी विवेकानन्द
(ख) कबीरदास
(ग) स्वामी दयानंद
(घ) रामकृष्ण परमहंस
उत्तर – (घ) रामकृष्ण परमहंस

(iv) गीता के दशम अध्याय का क्या नाम है?
(क) सांख्य योग
(ख) विभूति योग
(ग) कर्म योग
(घ) ज्ञान विज्ञान योग
उत्तर – (ख) विभूति योग

(2) यौगिक क्रियाएँ हमें किस प्रकार असीम आनंद प्रदान करती हैं?
उत्तर – यौगिक क्रियाएँ शरीर, मन और आत्मा को संतुलित और संयमित करके एक व्यापक और गहन आनंद का अनुभव कराती हैं, जिससे हमें संपूर्णता और संतुष्टि का अनुभव होता है। योग क्रिया मनुष्य की चेतना का विकास करती हैं शरीर तथा अंतःकरण की शुद्धि करती हैं इस प्रकार योग क्रिया में असीम आनंद प्रदान करती हैं।

(3) सद्व्यवहार के अनिवार्य तत्त्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर – सद्व्यवहार के अनिवार्य तत्त्व निम्नलिखित हैं :
• सम्मान : दूसरों का आदर करना और उनके दृष्टिकोण का मान रखना।
• विनम्रता : शालीनता और सादगी से पेश आना, अहंकार से बचना।
• ईमानदारी : सत्य और निष्ठा के साथ व्यवहार करना।
• संवेदनशीलता : दूसरों की भावनाओं और परिस्थितियों के प्रति समझ और सहानुभूति रखना।
• धैर्य : हर स्थिति में धैर्य और संयम बनाए रखना।
• सहायता : जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर रहना।
ये तत्त्व एक व्यक्ति को समाज में सम्मानित और प्रिय बनाते हैं, और अच्छे सामाजिक संबंधों की नींव रखते हैं।