HBSE Class 10 Hindi SAT-1 Sample Paper 2026 Answer Key

Haryana Board (HBSE) Class 10 Hindi SAT-1 Sample Paper 2026 Answer Key

खण्ड – क

1. व्याकरण पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 2 = 2 अंक)
(क) जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त हो जाता है तब वह क्या कहलाता है?
(i) कारक
(ii) वचन
(iii) पद
(iv) लिंग
उत्तर – (iii) पद

(ख) ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ में सर्वनाम का कौन-सा भेद है?
(i) निश्चयवाचक
(ii) अनिश्चयवाचक
(iii) प्रश्नवाचक
(iv) संबंधवाचक
उत्तर – (iv) संबंधवाचक

2. निम्नलिखित प्रश्नों के यथानिर्दिष्ट उत्तर दीजिए : (2 × 3 = 6 अंक)
(क) संज्ञा की परिभाषा देकर उसके भेदों के नाम लिखिए।
उत्तर – किसी व्यक्ति, वस्तु स्थान आदि का बोध कराने वाले विकारी शब्दों को संज्ञा कहते हैं। जैसे: राम, आगरा, सुख आदि। संज्ञा के तीन भेद है- व्यक्तिवाचक संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा, भाववाचक संज्ञा।

(ख) ‘यमक अलंकार’ की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर – जहाँ एक ही शब्द का एक से अधिक बार प्रयोग हो, लेकिन प्रत्येक बार उसका अर्थ भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।
उदाहरण – “कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।”
यहाँ पहले ‘कनक’ का अर्थ सोना और दूसरे ‘कनक’ का अर्थ धतूरा है।

(ग) ‘दोहा छंद’ को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है, जिसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण –
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥”

(प्रश्न 3 या 4 में से किसी एक का उत्तर दीजिए)

3. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए। (5 अंक)
(क) समय का सदुपयोग
(ख) चुनाव में मतदान का महत्त्व
(ग) त्योहारों का व्यापारीकरण
उत्तर – स्वयं करें।

4. विद्यालय में भाषा प्रयोगशाला स्थापित करवाने के लिए प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए। (5 अंक)
उत्तर –

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बाढ़ड़ा

विषय : विद्यालय में भाषा प्रयोगशाला स्थापित करवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का अभाव है। इसके कारण विद्यार्थियों को हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं के उच्चारण, श्रवण तथा संवाद-कौशल के विकास में कठिनाई होती है। यदि विद्यालय में भाषा प्रयोगशाला स्थापित कर दी जाए तो विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता में अत्यधिक वृद्धि होगी।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि विद्यालय में शीघ्र भाषा प्रयोगशाला स्थापित करवाने की कृपा करें।

धन्यवाद।

भवदीय,
आपका आज्ञाकारी छात्र
नाम : रोहित
कक्षा : 10वी
दिनांक :

खण्ड – ख

5. क्षितिज भाग-2 (काव्य खण्ड) पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 2 = 2 अंक)
(क) योग का संदेश गोपियों को किसके समान लगा?
(i) कड़वी ककड़ी
(ii) मिठाई
(iii) करेला
(iv) नीम
उत्तर – (i) कड़वी ककड़ी

(ख) ‘सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्ह पर न सुराई।।’ कविता में ये शब्द किसने और किसे कहे हैं?
(i) राम ने लक्ष्मण को
(ii) परशुराम ने लक्ष्मण को
(iii) लक्ष्मण ने परशुराम को
(iv) राम ने परशुराम को
उत्तर – (iii) लक्ष्मण ने परशुराम को

6. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
“हमारैं हरि हारिल की लकरी।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।
जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्ह-कान्ह जक री।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यों करुई ककरी।
सु तौ ब्याधि हमकौं लै आए, देखी सुनी न करी।
यह तो ‘सूर’ तिनही लै सौंपो, जिनके मन चकरी।।”
प्रश्न :
(i) ‘हारिल’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर – पक्षी

(ii) ‘कान्ह-कान्ह जकरी’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – कृष्ण-कृष्ण की रट

(iii) गोपियों ने उद्धव को कौन-सी ब्याधि लेकर आने पर उलाहना दिया है?
उत्तर – योग रूपी ब्याधि का उलाहना दिया है।

(iv) किसका मन चकरी के समान कहा गया है और क्यों?
उत्तर – गोपियों का मन चकरी के समान कहा गया है क्योंकि कृष्ण–विरह में उनका मन अत्यधिक चंचल और अस्थिर हो गया था, ठीक वैसे ही जैसे चकरी (चकई पक्षी) का मन लगातार घूमता और बदलता रहता है।

(v) योग के संदेश को किसके समान बताया गया है?
उत्तर – योग के संदेश को कड़वी ककड़ी के स्वाद समान बताया गया है।

(प्रश्न 7 या 8 में से किसी एक का उत्तर दीजिए)

7. काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए : (3 अंक)
नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई।।
सुनुह राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।
उत्तर – भाव-सौन्दर्य : प्रस्तुत काव्यांश में भगवान राम की विनम्रता, शालीनता एवं भक्त-वत्सल रूप का चित्रण हुआ है। राम अत्यंत विनीत भाव से परशुराम को समझाते हैं कि शिवधनुष तोड़ने वाला आपका कोई सेवक ही होगा। दूसरी ओर, परशुराम के क्रोधी एवं अहंकारी स्वभाव का भी चित्रण हुआ है।
शिल्प-सौन्दर्य :
भाषा – साहित्यिक अवधी भाषा
छंद – चौपाई
अलंकार – ‘सहसबाहु सम’ में उपमा अलंकार तथा ‘करि करिअ’ और ‘रिसाइ बोले’ में अनुप्रास अलंकार है।
शैली – संवादात्मक एवं नाटकीय शैली

8. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई? (3 अंक)
उत्तर – लक्ष्मण के अनुसार सच्चा वीर योद्धा कभी भी अपनी वीरता की व्यर्थ डींगें नहीं हाँकता। वह अधिक बोलने के बजाय अपने साहस, पराक्रम और कर्मों से अपनी वीरता सिद्ध करता है। वह युद्धभूमि में निर्भय होकर शत्रु का सामना करता है तथा अपने अस्त्र-शस्त्रों के कुशल प्रयोग से अपनी शक्ति का परिचय देता है। सच्चा वीर अपने मुँह अपनी प्रशंसा नहीं करता, बल्कि उसके कार्य ही उसकी महानता और वीरता का प्रमाण बनते हैं। ऐसे योद्धा विनम्र, कर्तव्यनिष्ठ और आत्मविश्वासी होते हैं।

खण्ड – ग

9. क्षितिज भाग-2 (गद्य खण्ड) पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 3 = 3 अंक)
(क) ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के आधार पर हालदार साहब को किस बात की जिज्ञासा थी?
(i) कैप्टन के नाम की कहानी जानने की
(ii) पान वाले की मज़ेदार बातें सुनने की
(iii) संदूकची में रखे सामान देखने की
(iv) कैप्टन की दुकान देखने की
उत्तर – (i) कैप्टन के नाम की कहानी जानने की।

(ख) ‘बालगोबिन भगत’ पाठ के अनुसार संन्यासी बनने के लिए कौन-सी बात महत्त्वपूर्ण है?
(i) गृहस्थी का त्याग करना
(ii) वेश बदलना
(iii) मानवीय गुणों का पालन करना
(iv) समाज के नियमों का पालन न करना
उत्तर – (iii) मानवीय गुणों का पालन करना।

(ग) ‘लखनवी अंदाज’ कहानी में लेखक ने खीरा खाने से मना क्यों किया?
(i) लेखक को खीरे खाने से अपच की समस्या हो जाती है।
(ii) लेखक को लगा कि नवाब साहब केवल औपचारिक तौर पर खीरा खाने को कह रहे थे।
(iii) खीरे देखने में अच्छे नहीं दिख रहे थे।
(iv) खीरों पर नमक बहुत ज्यादा लगा दिया था।
उत्तर – (ii) लेखक को लगा कि नवाब साहब केवल औपचारिक तौर पर खीरा खाने को कह रहे थे।

(प्रश्न 10 या 11 में से किसी एक का उत्तर दीजिए)

10. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
इस बार लौटे तो तबीयत कुछ सुस्त थी। खाने-पीने के बाद भी तबीयत नहीं सुधरी, थोड़ा बुखार आने लगा। किन्तु नेम-व्रत तो छोड़ने वाले नहीं थे। वही दोनों जून गीत, स्नानध्यान, खेतीबारी देखना। दिन-दिन छीजने लगे। लोगों ने नहाने-थोने से मना किया, आराम करने को कहा। किन्तु हँसकर टाल देते रहे। उस दिन भी संध्या में गीत गाए, किंतु मालूम होता जैसे तागा टूट गया हो, माला का एक-एक दाना बिखरा हुआ।
प्रश्न :
(i) प्रस्तुत गद्यांश के लेखक एवं पाठ का नाम लिखिए।
उत्तर – लेखक : रामवृक्ष बेनीपुरी, पाठ : बालगोबिन भगत

(ii) लोगों ने गद्यांश नायक को क्या न करने की सलाह दी?
उत्तर – लोगों ने उन्हें नहाने-धोने से मना किया और आराम करने की सलाह दी।

(iii) तबीयत खराब होने के बाद भी नायक ने क्या-क्या करना नहीं छोड़ा?
उत्तर – उन्होंने गीत गाना, स्नान-ध्यान करना और खेती-बाड़ी देखना नहीं छोड़ा।

(iv) गद्यांश में लोगों की बात को हँसकर कौन टाल देते थे?
उत्तर – बालगोबिन भगत लोगों की बात को हँसकर टाल देते थे।

(v) ‘जैसे तागा टूट गया हो, माला का एक-एक दाना बिखरा हुआ।’ पंक्ति में लेखक का क्या आशय है?
उत्तर – लेखक का आशय है कि बालगोबिन भगत का स्वर अत्यंत कमजोर और बिखरा हुआ हो गया था तथा उनका जीवन अंत की ओर बढ़ रहा था।

11. यशपाल का साहित्यिक परिचय दीजिए। (5 अंक)
उत्तर –

यशपाल

• जन्म – यशपाल का जन्म सन् 1903 में पंजाब के फीरोज़पुर छावनी में हुआ।
• शिक्षा – प्रारंभिक शिक्षा काँगड़ा में ग्रहण करने के बाद लाहौर के नेशनल कॉलेज से उन्होंने बी.ए. किया। वहाँ उनका परिचय भगत सिंह और सुखदेव से हुआ। स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़ाव के कारण वे जेल भी गए।
• रचनाएं – यशपाल की रचनाओं में आम आदमी के सरोकारों की उपस्थिति है। सामाजिक विषमता, राजनैतिक पाखंड और रूढ़ियों के खिलाफ़ उनकी रचनाएँ मुखर हैं। उनके कहानी संग्रहों में ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजरे की उड़ान, वा दुलिया, फूलो का कुर्ता उल्लेखनीय हैं। उनका ‘झूठा सच’ उपन्यास भारत विभाजन की त्रासदी का मार्मिक दस्तावेज़ है। अमिता, दिव्या, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, मेरी तेरी उसकी बात, उनके अन्य प्रमुख उपन्यास हैं।
• साहित्यिक विशेषताएँ – यशपाल प्रगतिशील एवं यथार्थवादी साहित्यकार थे। उनकी रचनाओं में आम आदमी के जीवन, सामाजिक विषमता, राजनीतिक पाखंड और रूढ़ियों के विरुद्ध सशक्त स्वर मिलता है। उनकी रचनाएँ सामाजिक चेतना, मानवतावादी दृष्टिकोण तथा यथार्थ के सजीव चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं।
• भाषा शैली – भाषा की स्वाभाविकता और सजीवता उनकी रचनागत विशेषता है। वे यथार्थवादी शैली के विशिष्ट रचनाकार हैं।
• मृत्यु – उनका निधन सन् 1976 ई. में हुआ।

12. ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर – ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ का मूलभाव देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम और देश के गुमनाम देशभक्तों के योगदान को उजागर करना है। यह पाठ बताता है कि सच्ची देशभक्ति केवल बड़े कार्यों में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कार्यों और राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना में भी निहित होती है। यह कहानी नई पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की प्रेरणा जगाती है।

खण्ड – घ

13. कृतिका भाग-2 के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिए : (3 अंक)
माता का आँचल पाठ का मूल भाव उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – माँ बच्चे की जन्मदाता तथा पालन-पोषण करने वाली होती है। बच्चा माँ से सबसे अधिक लगाव रखता है। वह बच्चे की भावनाओं को अच्छी तरह समझ लेती है। माँ का अपने बच्चे से आत्मिक प्रेम होता है। बच्चा माँ की ममता को भूला नहीं सकता। यही कारण है कि बच्चा विपदा के समय पिता के पास न जाकर अपनी माँ के पास जाना पसंद करता है।

खण्ड – ङ

14. आदर्श जीवन मूल्य (मध्यमा) के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (2 × 2 = 4 अंक)
(क) मनुष्य की श्रेष्ठता कैसे आंकी जा सकती है?
उत्तर – मनुष्य की श्रेष्ठता उसकी सफलता से आंकी जा सकती है। वह अपने जीवन में कितना सफल है, इसी से उसकी श्रेष्ठता का निर्धारण हो सकता है। उसके जीवन की सफलता ही उसे श्रेष्ठता की श्रेणी में ला सकती है। मनुष्य धर्म अर्थात् नीति, न्याय, सद्गुण, परहित की भावनाएँ तथा मानवता के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करे। वह अपने कार्य में सफल हो, यही उसकी श्रेष्ठता है।

(ख) जीवन का आधार ‘नित्य एवं अनित्य’ के सन्दर्भ में स्पष्ट करें।
उत्तर – सृष्टि और जीवन के आधार परमात्मा हैं जो कि नित्य हैं। सृष्टि चक्र की तरह परिवर्तित होती रहती है जबकि इसका संचालन करने वाले परमात्मा नित्य एवं स्थिर हैं। सृष्टि में सभी वस्तुएँ अनित्य एवं परिवर्तनीय हैं। दिन-रात, सर्दी-गर्मी, बचपन, यौवन, वृद्धावस्था, संयोग-वियोग, आना-जाना ये सब कुछ अनित्य रूप में सृष्टि के साथ जुड़ा हुआ है, जबकि आधार-स्वरूप परमात्मा नित्य हैं जो इन सबका संचालन करते हैं।