Haryana Board (HBSE) Class 10 Hindi Question Paper 2025 with a fully solved answer key. Students can use this HBSE Class 10 Hindi Solved Paper to match their responses and understand the question pattern. This BSEH Hindi Answer Key 2025 is based on the latest syllabus and exam format to support accurate preparation and revision for the board exams.
HBSE Class 10 Hindi Question Paper 2025 Answer Key
खण्ड – क
1. ‘व्याकरण’ पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) समास के निम्नलिखित विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए :
1. अव्ययीभाव समास – आजन्म
2. द्विगु समास – चंद्रमुख
3. तत्पुरुष समास – राहखर्च
4. कर्मधारय समास – लालमणि
(i) केवल 1,4
(ii) केवल 2, 3
(iii) 1,3 और 4 तीनों
(iv) 2, 3 और 4 तीनों
उत्तर – (iii) 1,3 और 4 तीनों
(ख) उपयुक्त विलोमार्थी शब्द लिखकर खाली स्थान की पूर्ति कीजिए :
सशक्त की विजय होती है, ……………. को तो पराजित होना ही है।
(i) अस्वस्थ
(ii) चोर
(iii) डरपोक
(iv) दुर्बल
उत्तर – (iv) दुर्बल
(ग) तू मित्र है या शत्रु है? जहाँ भी जाता हूँ, वहीं मेरे सामने …………।
रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त ‘मुहावरा’ होगा :
(i) डेरा डालता है
(ii) हवा में उड़ता है
(iii) त्यौरियाँ चढ़ा लेता है
(iv) दीवार खड़ी कर देता है
उत्तर – (iv) दीवार खड़ी कर देता है
(घ) निम्नलिखित में से ‘संकल्प’ शब्द का पर्यायवाची नहीं है :
(i) लक्ष्य
(ii) समग्र
(iii) प्रतिज्ञा
(iv) प्रण
उत्तर – (ii) समग्र
(ङ) निम्नलिखित में से निश्चयवाचक सर्वनाम के उदाहरणों को छाँटकर लिखिए :
कौन, कुछ, क्या, इस, अपना, मैं, मेरा, यह, जिसकी
उत्तर – इस, यह
(च) निम्नलिखित में से किस शब्द में ‘प्रत्यय’ नहीं है?
(i) गुणवान
(ii) इकहरा
(iii) दूजा
(iv) दुबला
उत्तर – (iv) दुबला
(छ) रसोई में सेब रखे हैं। वे मीठे हैं। उन्हें इधर ले आओ।
इन वाक्यों को मिलाने पर कौन-सा सरल वाक्य बनेगा?
(i) रसोई में रखे सेब इधर ले आओ क्योंकि वे मीठे हैं।
(ii) रसोई में जो मीठे सेब रखे हैं, उन्हें इधर ले आओ।
(iii) रसोई में जाओ और मीठे सेब इधर ले आओ।
(iv) रसोई में रखे मीठे सेब इधर ले आओ।
उत्तर – (iv) रसोई में रखे मीठे सेब इधर ले आओ।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के यथानिर्दिष्ट उत्तर दीजिए :
(क) ‘यण स्वर संधि’ के किन्हीं दो लक्षणों को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – वह संधि है जिसमें इ, ई, उ, ऊ और ऋ के बाद यदि कोई असमान (भिन्न) स्वर आता है, तो ये क्रमशः य, व और र में बदल जाते हैं। उदाहरण: अति + अधिक = अत्यधिक (इ + अ = य), तथा सु + आगत = स्वागत (उ + आ = व)
अथवा
निम्नलिखित संधि के भेदों को उनके उदाहरणों से सुमेलित कीजिए :
(दक्षता आधारित प्रश्न)
| संधि | उदाहरण |
| 1. दीर्घ संधि | (i) संशोधन |
| 2. गुण संधि | (ii) सारांश |
| 3. व्यंजन संधि | (iii) परोपकार |
| 4. विसर्ग संधि | (iv) तपोबल |
(i) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii), 4-(iv)
(ii) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i), 4-(iv)
(iii) 1-(iv), 2-(i), 3-(ii), 4-(iii)
(iv) 1-(iii), 2-(i), 3-(iv), 4-(ii)
उत्तर – (ii) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i), 4-(iv)
(ख) ‘उपमा’ अलंकार की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर – वह अलंकार है जिसमें किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरी वस्तु से की जाती है। इसमें ‘सा’, ‘सी’, ‘सम’, ‘तुल्य’, ‘जैसे’, ‘समान’ आदि शब्द समानता प्रकट करते हैं। उदाहरण: ‘चाँद सा सुंदर मुख’ में मुख की तुलना चाँद से की गई है। इसमें ‘चाँद’ उपमान है, ‘मुख’ उपमेय है, ‘सुंदर’ साधारण धर्म है तथा ‘सा’ वाचक शब्द है।
(ग) ‘चौपाई छंद’ किसे कहते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – यह एक सम मात्रिक छंद होता है। इसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में गुरु या लघु का कोई निश्चित बंधन नहीं होता, बल्कि वहाँ दो गुरु या दो लघु भी आ सकते हैं। चरण के अंत में गुरु वर्ण होने से छंद में लय और रोचकता उत्पन्न होती है। उदाहरण: रघुकुल रीत सदा चलि आई, प्राण जाय पर वचन न जाई।
(घ) ‘विकारी शब्द’ किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – वे शब्द जो लिंग, वचन, पुरुष, काल, कारक आदि के आधार पर परिवर्तित हो जाते हैं, विकारी शब्द कहलाते हैं। उदाहरण: लड़का-लड़की (लिंग), लड़का-लड़के (वचन)
3. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए :
(क) आत्मनिर्भर भारत
(ख) आदर्श विद्यार्थी के गुण
(ग) जीवन में त्यौहारों का महत्त्व
(घ) ऑनलाइन खरीदारी : व्यापार का बदलता स्वरूप
(ङ) हरियाणवी युवाओं में बढ़ती विदेश जाने की प्रवृत्ति
उत्तर – विवेकानुसार स्वयं करे।
4. विद्यालय में खेल नर्सरी स्थापित करवाने के लिए प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर –
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय,
चरखी दादरी
विषय : विद्यालय में खेल नर्सरी स्थापित करवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय में अनेक विद्यार्थी खेलों में गहरी रुचि रखते हैं तथा उनमें छिपी हुई खेल प्रतिभा भी विद्यमान है। किंतु उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं सुविधाओं के अभाव में ये प्रतिभाएँ पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पातीं। यदि विद्यालय में खेल नर्सरी की स्थापना कर दी जाए, तो विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही व्यवस्थित प्रशिक्षण मिल सकेगा।
खेल नर्सरी के माध्यम से विद्यार्थियों का शारीरिक एवं मानसिक विकास होगा। उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, सहयोग की भावना तथा नेतृत्व क्षमता का विकास होगा। इससे विद्यार्थी जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर विद्यालय का नाम रोशन कर सकेंगे।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में खेल नर्सरी स्थापित करवाने की कृपा करें। इसके लिए हम सभी विद्यार्थी पूर्ण सहयोग देने के लिए तत्पर रहेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
आपका आज्ञाकारी छात्र
नाम : रोहित कुमार
कक्षा : दसवीं
दिनांक : 10 मार्च 20XX
अथवा
कुसंगति से बचकर रहने के लिए दसवीं कक्षा में पढ़ रही अपनी छोटी बहन को एक पत्र लिखिए।
उत्तर –
प्रिय छोटी बहन पूजा
सप्रेम नमस्ते।
आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगी। मैं यहाँ कुशल हूँ। यह पत्र मैं तुम्हें एक बड़े भाई के नाते समझाने और मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से लिख रहा हूँ।
तुम इस समय दसवीं कक्षा में पढ़ रही हो, जो जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। इस उम्र में संगति का प्रभाव बहुत गहरा पड़ता है। अच्छी संगति जहाँ व्यक्ति को सही मार्ग दिखाती है, वहीं कुसंगति जीवन को गलत दिशा में ले जा सकती है। कुछ मित्र पढ़ाई से दूर करने, अनुशासन तोड़ने या गलत आदतों की ओर आकर्षित कर सकते हैं। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखना ही बुद्धिमानी है।
तुम्हें चाहिए कि परिश्रमी, संस्कारी और लक्ष्य के प्रति सजग मित्रों का साथ चुनो। समय का सही उपयोग करो, पढ़ाई पर ध्यान दो और अपने माता-पिता व गुरुजनों की बातों का सम्मान करो। अच्छे विचारों और अच्छी संगति से ही उज्ज्वल भविष्य का निर्माण होता है।
मुझे पूरा विश्वास है कि तुम मेरी बातों को समझोगी और कुसंगति से दूर रहकर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहोगी। मेरी शुभकामनाएँ हमेशा तुम्हारे साथ हैं।
जल्दी उत्तर देना।
तुम्हारा भाई अमित
दिनांक : 10 मार्च 20XX
खण्ड – ख
5. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के काव्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) ‘उत्साह’ कविता में बादल के लिए क्या विशेषण प्रयुक्त हुए हैं?
(i) ललित
(ii) घुंघराले
(iii) काले
(iv) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (iv) उपर्युक्त सभी
(ख) उद्धव के व्यवहार की तुलना गोपियों ने किससे की है? सही विकल्प का चयन कीजिए :
(A) जल में पड़े रहने वाले कमल के पत्ते से।
(B) जल में पड़ी रहने वाली तेल की गागर से।
(C) गुड़ से चिपकी रहने वाली चींटी से।
(D) कृष्ण की प्रीति-नदी में पाँव डुबोने से।
विकल्प :
(i) कथन (A) सही है।
(ii) कथन (A) और (B) सही हैं।
(iii) कथन (B) और (C) सही हैं।
(iv) कथन (A) और (D) सही हैं।
उत्तर – (ii) कथन (A) और (B) सही हैं।
(ग) ‘आत्मकथ्य’ कविता में कवि के जीवन की विडंबना क्या है?
(i) जीवन का सरल होना
(ii) मित्रों द्वारा धोखा दिया जाना
(iii) मित्रों द्वारा आत्मकथा लिखने को कहना
(iv) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (iv) उपर्युक्त सभी
(घ) कवि ने कविता का शीर्षक ‘अट नहीं रही है’ रखा है क्योंकि फागुन का सौन्दर्य ………….।
(i) प्रकृति में नहीं समा पा रहा है
(ii) कवि को प्राकृतिक लग रहा है
(iii) कवि को काल्पनिक लग रहा है
(iv) आसमान में नहीं समा पा रहा है
उत्तर – (i) प्रकृति में नहीं समा पा रहा है
(ङ) फसल को किसका सिमटा हुआ संकोच कहा गया है?
(i) सूरज की किरणों का
(ii) हवा की थिरकन का
(iii) नदियों के पानी का
(iv) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ii) हवा की थिरकन का
(च) ‘संगतकार’ कविता में किसे मुख्य भूमिका प्रदान करने का प्रयास किया है?
(i) जो अपना कर्म केवल सफलता के लिए करते हैं
(ii) जो किसी भी कीमत पर जीवन में कभी असफल नहीं होते हैं
(iii) जो स्वयं की सफलता का त्याग कर दूसरों का आधार बनते हैं
(iv) जो असफलता को भी सफलता में बदलने की हिम्मत रखते हैं
उत्तर – (iii) जो स्वयं की सफलता का त्याग कर दूसरों का आधार बनते हैं
6. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।
प्रश्न :
(i) प्रस्तुत काव्यांश के कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
उत्तर – कवि : मंगलेश डबराल, कविता : संगतकार
(ii) संगतकार द्वारा अपनी आवाज़ को दबाए रखने के प्रयास को कवि ने ‘मनुष्यता’ मानने के लिए क्यों कहा है?
उत्तर – संगतकार मुख्य गायक की असफलता में भी उसका साथ देकर मानवीय संवेदना दिखाता है, इसलिए इसे मनुष्यता कहा गया है।
(iii) संगतकार का स्वर मुख्य गायक की सहायता कब करता है?
उत्तर – जब मुख्य गायक का गला बैठने लगता है और उत्साह कम हो जाता है।
(iv) ‘आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ’ इस पंक्ति में मुख्य गायक की किस स्थिति को बताया गया है?
उत्तर – मुख्य गायक की थकान, निराशा और स्वर-क्षीणता की स्थिति।
(v) संगतकार किसका प्रतीक है?
उत्तर – संगतकार सहायक, सहयोगी और मानवीय संवेदना का प्रतीक है।
7. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के निम्नलिखित काव्यांश में निहित भाव एवं शिल्प-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए :
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
बिद्यमान रन पाई रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।
उत्तर – भाव-सौंदर्य (भावार्थ) : इस दोहे में कवि बताता है कि सच्ची वीरता शब्दों में नहीं, कर्म में होती है। शूरवीर युद्धभूमि में जाकर अपने साहस और पराक्रम को कार्यों द्वारा सिद्ध करते हैं, वे अपनी बहादुरी का ढिंढोरा नहीं पीटते। इसके विपरीत कायर व्यक्ति युद्ध के मैदान में शत्रु को सामने पाकर भी केवल अपनी वीरता और प्रताप की बातें करते हैं, जो उनकी कमजोरी को प्रकट करता है। दोहे का मुख्य भाव यह है कि कर्म ही वीरता का वास्तविक प्रमाण है, दिखावटी प्रशंसा नहीं।
• शिल्प-सौंदर्य (काव्य-सौंदर्य) : इस दोहे की भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली ब्रजभाषा है। रचना दोहा छंद में है, जिसमें कम शब्दों में गहरी बात कही गई है। इसमें अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है—जैसे करहिं, कहि, कायर, कथहिं तथा समर, रन, रिपु—जिससे ध्वनि-सौंदर्य उत्पन्न हुआ है। समर, रन, रिपु जैसे शब्दों से युद्धभूमि का सजीव बिंब उभरता है। शैली सीधी और व्यंग्यात्मक है तथा शब्द-चयन सशक्त होने से भाव अधिक प्रभावशाली बन गए हैं।
8. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के काव्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(i) ‘आत्मकथ्य’ कविता में कवि अपनी आत्मकथा में जिन तथ्यों का उल्लेख नहीं करना चाहता है। उनमें से किन्हीं तीन तथ्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – कवि अपने जीवन के दुःख-दर्द, संघर्ष और कठिनाइयों का उल्लेख नहीं करना चाहते, क्योंकि ये उनके अत्यंत निजी और पीड़ादायक अनुभव हैं। वे अपनी प्रेयसी के साथ बिताए मधुर तथा व्यक्तिगत क्षणों को भी सार्वजनिक करना उचित नहीं समझते, क्योंकि ये उनकी पवित्र और भावनात्मक अनुभूतियाँ हैं। इसके अतिरिक्त, कवि मित्रों के छल-कपट और जीवन की कठोर वास्तविकताओं को उजागर नहीं करना चाहते। उनका मानना है कि आत्मकथा में सब कुछ कहना आवश्यक नहीं होता और आत्मसम्मान, मर्यादा तथा निजता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
(ii) ‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता का मुख्य उद्देश्य शिशु की निश्छल और मोहक मुस्कान की अद्भुत शक्ति तथा उसके जीवनदायी प्रभाव को व्यक्त करना है। यह मुस्कान इतनी प्रभावशाली है कि वह कठोर से कठोर हृदय को भी पिघला देती है और मृतप्राय व्यक्ति में भी चेतना भर देती है। कविता वात्सल्य रस से परिपूर्ण है और जीवन की सरलता में छिपी सच्ची खुशियों का संदेश देती है। बच्चे की मुस्कान से कवि अपने संन्यासी जीवन की कठोरता को भूलकर पुनः गृहस्थ जीवन की ओर लौटने का अनुभव करता है, जिससे कविता प्रेम, उल्लास और मानवीय संवेदना के महत्व को प्रतिपादित करती है।
खण्ड – ग
9. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के गद्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) सिद्धार्थ ने आज से 2500 वर्ष पूर्व घर को किस लिए त्याग दिया था?
(i) तृष्णा के वशीभूत लड़ती-कटती मानवता के सुख के लिए।
(ii) संसार पर विजय पाने के लिए।
(iii) घर में मान-सम्मान न मिलने के लिए।
(iv) मजदूरों को सुखी देखने का स्वप्न पूरा करने के लिए।
उत्तर – (i) तृष्णा के वशीभूत लड़ती-कटती मानवता के सुख के लिए।
(ख) ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के आधार पर ‘तो इस बेचारे की दुकान भी नहीं’ वाक्य में हालदार साहब की कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त हो रही हैं?
(i) आघात और भय
(ii) लज्जा और शोक
(iii) आश्चर्य और दुख
(iv) निराशा और विरोध
उत्तर – (iii) आश्चर्य और दुख
(ग) बालगोबिन भगत जी की गले में बँधी हुई बेडौल माला किससे बनी थी?
(i) मोतियों से
(ii) तुलसी की जड़ों से
(iii) फूलों से
(iv) धातु से
उत्तर – (ii) तुलसी की जड़ों से
(घ) माँ का निहायत असहाय मजबूरी में लिपटा त्याग किसका आदर्श नहीं बन सका?
(i) लेखिका की बहन सुशीला का
(ii) लेखिका के भाइयों का
(iii) लेखिका का
(iv) लेखिका के पिता का
उत्तर – (iii) लेखिका का
(ङ) लखनऊ स्टेशन पर खीरा बेचने वालों को ग्राहकों के बारे में कौन-सी बात पता है?
(i) वे खीरे को धोकर खाते हैं।
(ii) वे तौलिए पर खीरे रखते हैं।
(iii) वे खीरे पर मसाला लगाते हैं।
(iv) वे ताजा, रसीले खीरे खरीदते हैं।
उत्तर – (iii) वे खीरे पर मसाला लगाते हैं।
(च) ‘धत् ! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।’ इस कथन के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ के बारे में कौन-सी बात कही जा सकती है?
(i) वे हाज़िरजवाब और खुशमिज़ाज इंसान थे।
(ii) वे कपड़ों से ज्यादा ध्यान भारतरत्न को देते थे।
(iii) वे बहुत जल्दी क्रोधित और नाराज़ हो जाते थे।
(iv) वे कला पर गर्व करते थे इसलिए उसे बेचते नहीं थे।
उत्तर – (i) वे हाज़िरजवाब और खुशमिज़ाज इंसान थे।
10. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
हाँ, इतना ज़रूर था कि उस जमाने में घर की दीवारें घर तक ही समाप्त नहीं हो जाती थीं, बल्कि पूरे मोहल्ले तक फैली रहती थीं। इसलिए मोहल्ले में किसी भी घर में जाने पर कोई पाबंदी नहीं थी, बल्कि कुछ घर तो परिवार का हिस्सा ही थे। आज तो मुझे बड़ी शिद्दत के साथ यह महसूस होता है कि अपनी जिंदगी खुद जीने के इस आधुनिक दबाव ने महानगरों के फ्लैट में रहने वालों को हमारे इस परंपरागत ‘पड़ोस-कल्चर’ से विच्छिन्न करके हमें कितना संकुचित, असहाय और असुरक्षित बना दिया है।
प्रश्न :
(i) प्रस्तुत गद्यांश के रचयिता और पाठ का नाम लिखिए।
उत्तर – रचयिता : मन्नू भंडारी, पाठ : एक कहानी यह भी
(ii) आज का महानगरीय जीवन कैसा है?
उत्तर – आधुनिक महानगरीय जीवन आत्मकेंद्रित, संकुचित और असुरक्षित हो गया है।
(iii) ‘पड़ोस-कल्चर’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – पड़ोस-कल्चर का अर्थ है आपसी अपनापन और सहयोग।
(iv) लेखिका के बचपन में घर की दीवारें कहाँ तक फैली रहती थीं?
उत्तर – पूरे मोहल्ले तक।
(v) लेखिका के बचपन में मोहल्ला संस्कृति कैसी थी?
उत्तर – लेखिका के बचपन की मोहल्ला संस्कृति परस्पर सहयोग, अपनत्व और खुलेपन से भरी हुई थी।
11. स्वयं प्रकाश अथवा यतीन्द्र मिश्र का जीवन परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर –
स्वयं प्रकाश
• जन्म – स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में इंदौर (मध्यप्रदेश) में हुआ।
• शिक्षा – मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी करने वाले स्वयं प्रकाश का बचपन और नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता। फ़िलहाल स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद वे भोपाल में रहते थे और वसुधा पत्रिका के संपादन से जुड़े थे।
• रचनाएं – आठवें दशक में उभरे स्वयं प्रकाश आज समकालीन कहानी के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनके तेरह कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें सूरज कब निकलेगा, आएँगे अच्छे दिन भी, आदमी जात का आदमी और संधान उल्लेखनीय हैं। उनके बीच में विनय और ईंधन उपन्यास चर्चित रहे हैं। उन्हें पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादेमी पुरस्कार आदि पुरस्कारों से पुरस्कृत किया जा चुका है।
• साहित्यिक विशेषताएँ – स्वयं प्रकाश के साहित्य पर आदर्शवादी विचारधारा का काफी प्रभाव है। इनकी कृतियों में देश, समाज, नगर-गाँव की सुख-समृद्धि देखने की आकांक्षा प्रकट हुई है। भारतीय सांस्कृतिक जीवन-मूल्य उनमें प्रवाहित हुए हैं।
• भाषा शैली – मध्यवर्गीय जीवन के कुशल चितेरे स्वयं प्रकाश की कहानियों में वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना है तो हमारे सामाजिक जीवन में जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव के खिलाफ़ प्रतिकार का स्वर भी है। रोचक किस्सागोई शैली में लिखी गईं उनकी कहानियाँ हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती हैं।
• देहांत – उनका निधन 7 दिसंबर 2019 को हुआ।
अथवा
यतीन्द्र मिश्र
• जन्म – यतीन्द्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ।
• शिक्षा – उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ से हिंदी में एम.ए. किया। वे आजकल स्वतंत्र लेखन के साथ अर्द्धवार्षिक सहित पत्रिका का संपादन कर रहे हैं। सन् 1999 में साहित्य और कलाओं के संवर्द्धन और अनुशीलन के लिए एक सांस्कृतिक न्यास ‘विमला देवी फाउंडेशन’ का संचालन भी कर रहे हैं।
• रचनाएं – यतींद्र मिश्र के तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप। इसके अलावा शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर एक पुस्तक गिरिजा लिखी। रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की ग्रंथावली (2000) का सह-संपादन किया। कुँवर नारायण पर केंद्रित दो पुस्तकों के अलावा स्पिक मैके के लिए विरासत-2001 के कार्यक्रम के लिए रूपंकर कलाओं पर केंद्रित थाती का संपादन भी किया।
• साहित्यिक विशेषताएं – यतींद्र मिश्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज और संस्कृति के अनेक पहलुओं का चित्रण किया है। उन्होंने कविता, संगीत और अन्य ललित कलाओं को समाज के साथ जोड़ा है। उन्होंने समाज के अनेक भावुक प्रसंगों को बड़ी ही सहजता से शब्दों में पिरोया है। उनकी रचनाओं के माध्यम से समाज के निकटता से दर्शन होते हैं।
• भाषा शैली – उनकी भाषा सहज, सरल, प्रवाहमयी, व्यावहारिक भाषा-शैली तथा प्रसंगों के अनुकूल है। उनकी रचनाओं में भावुकता और संवेदना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कृति को प्रभावशाली बनाने के लिए उन्होंने लोक प्रचलित शब्दों के साथ-साथ सूक्तियों का भी प्रयोग किया है। उर्दू-फारसी, तत्सम तथा उद्भव शब्दों का भरपूर प्रयोग किया गया है।
12. ‘क्षितिज भाग-2’ नामक पाठ्य पुस्तक के गद्य खण्ड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(क) बालगोबिन भगत मृत्यु को आनन्द का उत्सव क्यों मानते हैं?
उत्तर – बालगोबिन भगत मृत्यु को उत्सव मानते थे क्योंकि उनका दृढ़ विश्वास था कि मृत्यु आत्मा और परमात्मा के मिलन का क्षण है, जो आत्मा को संसार के बंधनों से मुक्त कर देता है। इसलिए वे मृत्यु को शोक का नहीं, बल्कि आनंद का अवसर मानते थे। इसी भावना से उन्होंने अपने पुत्र की मृत्यु पर शोक करने के बजाय पुत्रवधू को भी शोक न करने का आदेश दिया और उसका पुनर्विवाह करवाया, ताकि आत्मा-परमात्मा के मिलन की इस खुशी में कोई दुखी न रहे और आत्मा परम धाम को प्राप्त कर सके।
(ख) सच्चे अर्थों में ‘संस्कृत व्यक्ति’ किसे कहा जा सकता है? ‘संस्कृति’ पाठ के आधार पर तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – जो व्यक्ति अपनी बुद्धि और विवेक से किसी नए तथ्य या सिद्धांत का दर्शन करता है, वही वास्तव में संस्कृत व्यक्ति कहलाता है। ऐसा व्यक्ति मानवता की भलाई के लिए किसी नई चीज़ का आविष्कार या प्रतिपादन करता है। केवल बहुत-सी बारीकियाँ जान लेने से कोई व्यक्ति संस्कृत नहीं कहलाता। किसी सिद्धांत को प्रतिपादित करने वाला ही संस्कृत व्यक्ति होता है। इसलिए अन्य व्यक्ति न्यूटन से अधिक सभ्य हो सकते हैं, लेकिन संस्कृत नहीं।
खण्ड – घ
13. ‘कृतिका भाग-2’ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(क) ‘बाबू जी धार्मिक प्रवृत्ति के मनुष्य थे।’ – ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
उत्तर – ‘माता का आँचल’ पाठ के अनुसार बाबूजी धार्मिक प्रवृत्ति के मनुष्य थे। वे प्रतिदिन सुबह उठकर नियमित रूप से रामायण का पाठ करते थे और भोलानाथ उनके पास बैठकर उसे ध्यान से सुनता था। वे स्वयं भोलानाथ को नहलाते, उसके माथे पर भभूत लगाकर त्रिपुंड बनाते थे, जिससे उनकी शिवभक्ति प्रकट होती है। खेल-खेल में भी वे भोलानाथ को ‘बम-भोला’ बनाकर धार्मिक संस्कार देते थे। जब भोलानाथ डरकर रोने लगता था, तब बाबूजी उसे गोद में उठाकर ‘बम-भोला’ कहकर शांत करते थे। इन प्रसंगों से स्पष्ट है कि बाबूजी के जीवन में धर्म का विशेष स्थान था।
(ख) ‘मैं क्यों लिखता हूँ’ पाठ के आधार पर हिरोशिमा की घटना को भयानकतम दुरुपयोग क्यों कहा जाता है?
उत्तर – ‘मैं क्यों लिखता हूँ’ पाठ के अनुसार हिरोशिमा की घटना को भयानकतम दुरुपयोग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें विज्ञान और मानव बुद्धि का उपयोग मानवता की रक्षा के बजाय उसके विनाश के लिए किया गया। परमाणु बम के विस्फोट से एक ही क्षण में असंख्य निर्दोष लोग मारे गए और भयानक पीड़ा फैली। जले हुए पत्थर पर भाप बनकर उड़ गए व्यक्ति की छाया ने लेखक को विज्ञान के इस अमानवीय और विध्वंसक रूप का अनुभव कराया।
(ग) ‘साना-साना हाथ जोड़ि – –’ पाठ में लेखिका को कब एहसास हुआ कि तमाम भौगोलिक विविधता और वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद भारत की आत्मा एक ही है?
उत्तर – ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ में लेखिका को यह एहसास तब हुआ जब वे सिक्किम के पहाड़ी रास्तों पर घूमते हुए स्थानीय लोगों को धर्मचक्र (प्रेयर व्हील) घुमाते देखती हैं। उस क्षण उन्हें अनुभव हुआ कि भले ही भारत में भौगोलिक विविधता और वैज्ञानिक प्रगति हो, फिर भी लोगों की आस्थाएँ, विश्वास और पाप-पुण्य की धारणाएँ समान हैं। पहाड़ों में धर्मचक्र और मैदानों में गंगा की पवित्रता की भावना यह सिद्ध करती है कि पूरे देश की आत्मा एक ही सूत्र में बँधी हुई है।
खण्ड – ङ
14. ‘आदर्श जीवन मूल्य (माध्यम)’ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(i) ज्ञान को कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
उत्तर – ज्ञान अध्ययन, अनुभव, चिंतन और आत्मअनुशासन से प्राप्त होता है। यह आवश्यक नहीं कि ज्ञान केवल बड़ों से ही मिले; योग-सिद्ध व्यक्ति इसे आत्मचिंतन से पा लेता है और यदि छोटे लोगों से भी ज्ञान मिले तो उसे बिना संकोच स्वीकार करना चाहिए। पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान और अनुभवजन्य ज्ञान, दोनों ही त्याग-शक्ति, समझदारी और सही निर्णय क्षमता विकसित करते हैं, जिससे आदर्श जीवन मूल्यों का निर्माण होता है।
(ii) ‘प्रेरक प्रसंग’ पाठ के आधार पर आदर्श शिष्य में किन गुणों का समावेश अनिवार्य है?
उत्तर – आदर्श शिष्य में गुरु के प्रति आदर-भाव व श्रद्धा-भक्ति, आज्ञापालन, अनुशासन, जिज्ञासा, एकाग्रता (काक-चेष्टा), धैर्य (बक-ध्यान), अल्पाहार (श्वान-निद्रा), परिश्रम, त्याग, विनम्रता, निडरता और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण जैसे गुण अनिवार्य होते हैं। इन्हीं गुणों के माध्यम से वह ज्ञान को सही रूप में ग्रहण करता है और अपने जीवन को सार्थक दिशा देते हुए एक श्रेष्ठ तथा चरित्रवान मनुष्य बनता है।
(iii) वर्तमान भारतीय समाज में नारी का क्या स्थान है?
उत्तर – वर्तमान भारतीय समाज में नारी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है। आज नारी शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय, विज्ञान और घर-परिवार, सभी क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश के विकास में योगदान दे रही है। यद्यपि उसे अभी भी लैंगिक भेदभाव, हिंसा और असमानता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, फिर भी नारी सशक्तिकरण के माध्यम से वह समाज की धुरी बनकर आदर्श जीवन मूल्यों को सुदृढ़ कर रही है।
(iv) उत्साहपूर्वक जीवन जीने से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर – उत्साहपूर्वक जीवन जीने से हमें यह लाभ मिलता है कि हम जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति कर सकते हैं; चाहे पढ़ाई में अधिक अंक लाने की बात हो, किसी परीक्षा की तैयारी की बात हो अथवा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की बात हो या अन्य कोई भी कार्य हो। यदि हम उसे उत्साह से करेंगे तो हमें उसमें अवश्य ही सफलता मिलेगी। प्रत्येक कार्य में सफलता के लिए उत्साह का होना अति आवश्यक है। अतः हमें प्रत्येक कार्य उत्साहपूर्वक करना चाहिए।