HBSE Class 12 Hindi Half Yearly Question Paper 2022 Answer Key

Haryana Board (HBSE) Class 12 Hindi Half Yearly Question Paper 2022 Answer Key. Haryana Board Class 12th Half Yearly Question Paper Pdf Download 2022. Haryana Board Class 12th Half Yearly Question Paper September 2022. HBSE Class 12th Half Yearly Exam September 2022. Hindi Half Yearly Question Paper September 2022 Exam.

 

HBSE Class 12 Hindi Half Yearly Question Paper 2022 Answer Key

विद्यार्थी का नाम ………. रोल नंबर ……….
अर्धवार्षिक आकलन – सितम्बर 2022
कक्षा – 12
विषय – Hindi
समय : 90 मिनट         कुल अंक : 40

निर्देश : 1. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
2. प्रश्न संख्या 1 से 15 तक प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। प्रश्न संख्या 16 से 18 तक प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, प्रश्न संख्या 19 से 21 प्रत्येक प्रश्न 3 अंक तथा प्रश्न संख्या 22 से 23 तक प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है।

(1-10) सही उत्तर पर (✓) का निशान लगाएँ।
1. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में कवि की आत्मा कैसी हो गई है ?
(क) कमजोर
(ख) दृढ़
(ग) संवेदनशील
(घ) संवेदनहीन
उत्तर – (क) कमजोर

2. ‘उषा का जादू’ किससे टूटने की बात कही गई है ?
(क) लाल केसर
(ख) भोर से
(ग) नभ से
(घ) सूर्योदय से
उत्तर – (घ) सूर्योदय से

3. सीधी बात किसके चक्कर में फंस गई है ?
(क) दर्शन के
(ख) तर्कशास्त्र के
(ग) विज्ञान के
(घ) भाषा के
उत्तर – (घ) भाषा के

4. पतंग उड़ाते समय बच्चों को महज एक धागे के सहारे कौन थाम लेता है ?
(क) पतंगों की ऊंचाइयां
(ख) सीढ़ियां
(ग) मुंडेर
(घ) रोमांचित शरीर का संगीत
उत्तर – (क) पतंगों की ऊंचाइयां

5. ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में ‘मेंढक मंडली’ पहला नारा क्या लगाती थी ?
(क) पानी दे गुड़धानी दे
(ख) काले मेघा पानी दे
(ग) बोल गंगा मैया की जय
(घ) प्यासे बैलों को पानी दे
उत्तर – (ग) बोल गंगा मैया की जय

6 पहलवान ने ‘चांद सिंह’ को कहां के दंगल में हराया ?
(क) जामनगर
(ख) श्यामनगर
(ग) भावनगर
(घ) चांदनगर
उत्तर – (ख) श्यामनगर

7. पति की मृत्यु के समय भक्तिन की आयु कितने वर्ष थी ?
(क) 26 वर्ष
(ख) 29 वर्ष
(ग) 36 वर्ष
(घ) 39 वर्ष
उत्तर – (ख) 29 वर्ष

8. जैनेंद्र कुमार के मित्र ने बाजार को क्या संज्ञा दी है ?
(क) जी का जंजाल
(ख) शैतान का जंजाल
(ग) आंखो का भ्रम
(घ) आफत का घर
उत्तर – (ख) शैतान का जंजाल

9. टेलीविजन किस प्रकार का माध्यम है ?
(क) दृश्य माध्यम
(ख) श्रव्य माध्यम
(ग) दृश्य-श्रव्य माध्यम
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ग) दृश्य-श्रव्य माध्यम

10. समाचार संगठन के लिए निश्चित मानदेय के आधार पर काम करने वाले पत्रकार को क्या कहते हैं ?
(क) संवाददाता रिपोर्टर
(ख) पूर्णकालिक पत्रकार
(ग) अंशकालिक पत्रकार
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ग) अंशकालिक पत्रकार

(11-15) इन प्रश्नों के उत्तर 1-2 शब्दों में लिखें।
11. ‘पतंग’ कविता में ‘कपास’ किसका प्रतीक है ?
उत्तर – कोमलता का

12. कवि ने गरीबी को क्या बताया है ?
उत्तर – गरबीली

13. ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में लेखक को किस सभा का उप-मंत्री बनाया गया ?
उत्तर – कुमार-सुधार सभा का

14. सेवक धर्म में भक्तिन किससे स्पर्धा करने वाली थी ?
उत्तर – हनुमान जी से

15. उल्टा पिरामिड शैली के सभी हिस्सों के नाम लिखिए।
उत्तर – मुखड़ा/इंट्रो/लीड, बॉडी और समापन

(16-18) इन प्रश्नों के उत्तर 20-30 शब्दों में लिखें।
16. सूर्योदय से उषा का कौन सा जादू टूट जाता है ?
उत्तर – नीला आकाश, काली सिर पर पुते केसर-से रंग, स्लेट पर लाल खड़िया चाक, नीले जल में नहाती किसी गोरी नायिका की झिलमिलाती देह आदि दृश्य उषा के जादू के समान प्रतीत होते हैं। सूर्योदय के होते ही ये सभी दृश्य समाप्त हो जाता है। इसी को उषा का जादू टूटना कहा गया है।

17. ‘बाजार के जादू’ का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर – बाजार ग्राहक को आकर्षित करता है। वहाँ सुन्दर ढंग से सजी चीजों को देखकर मनुष्य उनको खरीदने के लिए मजबूर हो जाता है। यह जादू उन पर प्रभाव डालता है जिनको अपनी आवश्यकताओं का पता नहीं होता और जेब में खूब पैसा होता है। बाजार जाकर वे जो अच्छा लगता है उसे खरीद लेते हैं। यह नहीं देखते कि उनको उसकी जरूरत है या नहीं। वे फिजूलखर्ची करते हैं। इस जादू के उतरने पर उनको पता चलता है कि ज्यादा चीजें सुख नहीं देतीं बल्कि उसमें बाधा डालती हैं।

18. ‘किशन दा’ का बुढ़ापा सुख से क्यों नहीं बीता ?
उत्तर – क्योंकि उनके तमाम साथियों ने हौजखास, ग्रीनपार्क, कैलाश कहीं-न-कहीं ज़मीन ली, मकान बनवाया, लेकिन उन्होंने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। रिटायर होने के छह महीने बाद जब उन्हें क्वार्टर खाली करना पड़ा तब उनके द्वारा उपकृत लोगों में से एक ने भी उन्हें अपने यहाँ रखने की पेशकश नहीं की। इसलिए ‘किशन दा’ का बुढ़ापा सुख से नहीं बीता।

(19-21) इन प्रश्नों के उत्तर 30-40 शब्दों में लिखें।
19. ‘बात सीधी थी’ कविता का मूल भाव स्पष्ट करें।
उत्तर – ‘बात सीधी थी’ कविता का मूल भाव यह है कि जीवन में सीधी बातों का अहमियत होता है। जीवन में कुछ बातें अपने आप सीधी हो जाती हैं, जो हमें उनके महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती हैं। कविता में इस बात को दर्शाया गया है कि हमें सीधी बातों को धैर्य से समझना चाहिए और सच्चाई से कभी नहीं भागना चाहिए।

20. ‘जूझ’ पाठ में बचपन में लेखक के मन में पढ़ने के प्रति क्या विचार थे ?
उत्तर – लेखक की पाठशाला में मराठी भाषा के अध्यापक सौंदलगेकर, कविता के अच्छे रसिक व मर्मज्ञ थे। वे कक्षा में सस्वर कविता-पाठ करते थे तथा लय, छद, गति-यति, आरोह-अवरोह आदि का ज्ञान कराते थे। लेखक इनको देखकर बहुत प्रभावित हुआ। इस प्रकार उसके मन में स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास पैदा हुआ।

21. ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण का मूल भाव स्पष्ट करे।
उत्तर – ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ ‘धर्मवीर भारती’ द्वारा लिखित है। इसमें लेखक ने लोक आस्था और विज्ञान के द्वंद्व का सुंदर चित्रण किया है। विज्ञान का अपना तर्क है और विश्वास की अपनी सामर्थ्य। लेखक ने किशोर जीवन के इस संस्मरण में दिखलाया है कि अनावृष्टि से मुक्ति पाने हेतु गाँव के बच्चों की इंदर सेना द्वार-द्वार पानी माँगने जाती है लेकिन लेखक का तर्कशील किशोर मन भीषण सूखे में उसे पानी की निर्मम बर्बादी समझता है। लेखक की जीजी इस कार्य को अंधविश्वास न मानकर लोक आस्था त्याग की भावना कहती है। लेखक बार-बार अपनी जीजी के तर्को का खंडन करता हुए इसे पाखंड और अंधविश्वास कहता है।

(22-23) इन प्रश्नों के उत्तर 50-60 शब्दों में लिखें।
22. ‘हरिवंश राय बच्चन’ अथवा ‘गजानन माधव मुक्तिबोध’ के जीवन, रचनाओं एवं भाषा शैली का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर –

हरिवंश राय बच्चन

जन्म – हरिवंश राय बच्चन का जन्म सन् 1907 में इलाहाबाद में हुआ।
शिक्षा – इन्होंने एम.ए.पी.एच.डी.(कैंब्रिज) तक की। ये 1942-1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे तथा आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से संबंधित भी रहे, उसके बाद ये विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ रहे।
प्रमुख रचनाएँ – इनकी रचनाएं निम्नलिखित हैं : मधुशाला(1935), मधुबाला(1938), मधुकलश(1938), निशा-निमंत्रण, आकुल-अंतर, एकांत संगीत, मिलनयामिनी, सतरंगिणी, नए पुराने झरोखे, टूटी-फूटी कड़ियाँ (काव्य संग्रह); क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, आरती और अंगारे, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक (आत्मकथा); प्रवास की डायरी (डायरी); हैमलेट, जनगीता, मैकबेथ (अनुवाद)। उनका पूरा वाङ्मय ‘बच्चन ग्रंथावली’ के नाम से दस खंडों में प्रकाशित हो चुका है।
साहित्यिक विशेषताएँ – दोनों महायुद्धों के बीच के मध्यवर्गीय बेचैन विकल मन को कवि बच्चन जी ने अपनी वाणी द्वारा अभिव्यक्त किया है। उन्होंने छायावादी लाक्षणिक वक्रता के बजाय सीधी-सादी जीवंत और संवेदनशील गेय शैली में अपनी बात को अभिव्यक्त किया है। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में घटी हुई घटनाओं को भी सहज एवम् अनुभूति की ईमानदारी से अभिव्यक्त किया। बच्चन के द्वारा कविता का जो रूप प्रकट हुआ, यह रूप हिंदी काव्य संसार में उनकी विलक्षण लोकप्रियता का मूल कारण रहा है।
भाषा शैली – लेखक ने अत्यन्त सहज तथा बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है जिस कारण सर्वत्र रोचकता बनी रहती है। लेखक की भाषा मे चित्रात्मकता का गुण विद्यमान है। लेखक ने अपने भावों को अभिव्यक्ति प्रदान करने के लिए तत्सम, देशज, विदेशी शब्दों के अतिरिक्त मुहावरों का भी यथास्थान सहज रूप से प्रयोग किया है।
निधन – इनका निधन सन् 2003 में मुम्बई में हुआ।

अथवा

गजानन माधव मुक्तिबोध

जन्म – गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर सन् 1917, श्योपुर, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ था ।
शिक्षा – उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उज्जैन में की। 1938 में इन्होंने इंदौर के होल्कर से बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की। 1954 में उन्होंने एम. ए. की डिग्री प्राप्त की। वे उज्जैन के मॉर्डन स्कूल में अध्यापक के पद पर आसीन रहे। सन 1958 में उन्हें प्राध्यापक पद पर राजनाँद गाँव के दिग्विजय कॉलेज में नियुक्ति मिली।
प्रमुख रचनाएँ – इनकी रचनाएं निम्नलिखित हैं : चाँद का मुँह टेढ़ा है, भूरी-भूरी खाक धूल (कविता संग्रह); काठ का सपना, विपात्र, सतह से उठता आदमी (कथा साहित्य); कामायनी – एक पुनर्विचार, नयीं कविता का आत्मसंघर्ष, नये साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, (अब ‘आखिर रचना क्यों’ नाम से) समीक्षा की समस्याएँ, एक साहित्यिक की डायरी (आलोचना); भारत : इतिहास और संस्कृति।
साहित्यिक विशेषताएं – छायावाद और स्वच्छंदतावादी कविता के बाद जब नयी कविता आई तो मुक्तिबोध उसके अगुआ कवियों में से एक थे। मराठी संरचना से प्रभावित लंबे वाक्यों ने उनकी कविता को आम पाठक के लिए कठिन बनाया लेकिन उनमें भावनात्मक और विचारात्मक ऊर्जा अटूट थी, जैसे कोई नैसर्गिक अंत: स्रोत हो जो कभी चुकता ही नहीं बल्कि लगातार अधिकाधिक वेग और तीव्रता के साथ उमड़ता चला आता है। यह ऊर्जा अनेकानेक कल्पना-चित्रों और फैंटेसियों का आकार ग्रहण कर लेती है।
भाषा शैली – इनकी भाषा उत्कृष्ट है। भावों के अनुरूप शब्द गढ़ना और उसका परिष्कार करके उसे भाषा में प्रयुक्त करना भाषा-सौंदर्य की अद्भुत विशेषता है। इन्होंने तत्सम शब्दों के साथ-साथ उर्दू, अरबी और फ़ारसी के शब्दों का भी प्रयोग किया है। इनकी प्रमुख शैली व्यंजनात्मक, चित्रात्मक, व्यंग्यात्मक, प्रतीकात्मक हैं।
निधन – इनका निधन 11 सितंबर सन् 1964, नयी दिल्ली में हुआ।

23. किसी कहानी का ‘नाट्य रूपांतरण’ करते समय दृश्य-विभाजन कैसे किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य विभाजन निम्न प्रकार करते हैं –
• कहानी की कथावस्तु को समय और स्थान के आधार पर विभाजित करके दृश्य बनाए जाते हैं।
• प्रत्येक दृश्य कथानक के अनुसार बनाया जाता है।
• एक स्थान और समय पर घट रही घटना को एक दृश्य में लिया जाता है।
• दूसरे स्थान और समय पर घट रही घटना को अलग दृश्यों में बांटा जाता है।
• दृश्य विभाजन करते समय कथाक्रम और विकास का भी ध्यान रखा जाता है। 

 

Leave a Comment

error: