HBSE Class 12 Geography Question Paper 2024 Answer Key

Haryana Board (HBSE) Class 12 Geography Question Paper 2024 Answer Key

SECTION – A (1 Mark)

1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपागम नहीं है?
(A) क्षेत्रीय विभिन्नता
(B) मात्रात्मक क्रान्ति
(C) स्थानिक संगठन
(D) अन्वेषण और वर्णन
उत्तर – (B) मात्रात्मक क्रान्ति

2. निम्नलिखित कृषि के प्रकारों में से कौन-सा प्रकार कर्तन-दहन कृषि का प्रकार है?
(A) विस्तृत जीवन निर्वाह कृषि
(B) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि
(C) आदिकालीन निर्वाहक कृषि
(D) मिश्रित कृषि
उत्तर – (C) आदिकालीन निर्वाहक कृषि

3. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग ऊर्जा स्रोत के समीप लगाया जाता है?
(A) सीमेंट उद्योग
(B) एल्युमिनियम उद्योग
(C) सूती वस्त्र उद्योग
(D) चीनी उद्योग
उत्तर – (B) एल्युमिनियम उद्योग

4. संसार के अधिकांश महान पतन निम्न में से किस वर्ग में वर्गीकृत किए गए हैं?
(A) नौसेना पतन
(B) विस्तृत पतन
(C) तेल पतन
(D) औद्योगिक पतन
उत्तर – (B) विस्तृत पतन

5. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार निम्न में से किस राज्य में नगरीय जनसंख्या अनुपात सर्वाधिक है?
(A) तमिलनाडु
(B) महाराष्ट्र
(C) केरल
(D) गोवा
उत्तर – (D) गोवा

6. निम्न में से कौन-सा सिंचित क्षेत्रों में भू-निम्नीकरण का मुख्य प्रकार है?
(A) अवनलिका अपरदन
(B) मृदा लवणता
(C) वायु अपरदन
(D) भूमि पर सिल्ट का जमाव
उत्तर – (B) मृदा लवणता

7. निम्नलिखित में से किस राज्य में भौम जल उपयोग (%) इसके कुल भौम जल संभाव्य से ज्यादा है?
(A) तमिलनाडु
(B) आन्ध्र प्रदेश
(C) कर्नाटक
(D) केरल
उत्तर – (A) तमिलनाडु

8. भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर – उड़ीसा (ओडिशा)

9. इंदिरा गाँधी नहर कौन-से बाँध से निकलती है?
उत्तर – हरिके बाँध

10. कोलकाता पत्तन कौन-सी नदी पर अवस्थित है?
उत्तर – हुगली नदी

SECTION – B (2 Marks)

11. मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
उत्तर – मानव भूगोल, भूगोल की वह शाखा है जो मानव समुदायों, संस्कृतियों, अर्थव्यवस्थाओं और जीवनशैली के स्थानिक संबंधों का अध्ययन करती है। यह यह समझने का प्रयास करती है कि लोग अपने भौतिक वातावरण के साथ कैसे अंतःक्रिया करते हैं और मानवीय गतिविधियों के पैटर्न तथा उनके स्थानों में अंतर को जानती है।

12. जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक कौन-कौन-से हैं?
उत्तर – जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक :
(i) जन्म दर – किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष प्रति 1000 लोगों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या।
(ii) मृत्यु दर – किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष प्रति 1000 लोगों पर मृत्यु होने वाले लोगों की संख्या।
(iii) आप्रवासन और प्रवासन – किसी क्षेत्र में लोगों के आने-जाने से जनसंख्या में होने वाला परिवर्तन।

13. उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग क्या है?
उत्तर – उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग वे उद्योग हैं जो नवीनतम विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके उन्नत और आधुनिक उत्पाद तथा सेवाएँ विकसित करते हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर और अंतरिक्ष उपकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे उद्योगों में अधिकतर कुशल और विशेषज्ञ सफेद कॉलर कर्मचारी काम करते हैं, जो प्रयोगशालाओं और कार्यालयों में अनुसंधान और विकास (R&D) करते हैं।

14. जल परिवहन के क्या लाभ हैं?
उत्तर – जल परिवहन के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। यह भारी और बड़े सामानों को कम लागत और कम ऊर्जा खर्च में लंबी दूरी तक पहुँचाने की क्षमता रखता है। जल मार्ग पर्यावरण के लिए अनुकूल होते हैं और कम प्रदूषण करते हैं। इसके अलावा, यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है और दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्य व्यापारिक और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ता है, जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान होता है।

15. नगरीय बस्तियों की कोई दो विशेषताएँ बताइये।
उत्तर – नगरीय बस्तियों की दो विशेषताएँ :
(i) नगरीय बस्तियों में जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक होता है और ये बस्तियाँ आकार में बड़ी होती हैं।
(ii) नगरीय बस्तियों के निवासी कृषि के बजाय निर्माण, व्यापार, परिवहन जैसी द्वितीयक और तृतीयक गतिविधियों में संलग्न होते हैं और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य नागरिक सुविधाएँ बेहतर मिलती हैं।

अथवा

बंजर भूमि तथा कृषि योग्य व्यर्थ भूमि में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर – बंजर भूमि तथा कृषि योग्य व्यर्थ भूमि में अन्तर :
(i) बंजर भूमि पूरी तरह अनुपजाऊ होती है और खेती के योग्य नहीं होती, जबकि कृषि योग्य व्यर्थ भूमि उपजाऊ है और खेती के लिए तैयार की जा सकती है।
(ii) बंजर भूमि अकसर पानी की कमी, पत्थर या रेतीली जमीन जैसी प्राकृतिक कठिनाइयों के कारण अनुपजाऊ होती है, जबकि कृषि योग्य व्यर्थ भूमि प्राकृतिक रूप से उपजाऊ होती है पर संसाधन या मानवीय कारणों से खाली पड़ी रहती है।

16. ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर – ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत ऐसे नवीकरणीय स्रोत हैं जिन्हें प्राकृतिक रूप से पुनःपूर्ति किया जा सकता है और ये कभी खत्म नहीं होते। इन स्रोतों में मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा (बायोमास), भूतापीय ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा शामिल हैं। इन्हें अक्षय या गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत भी कहा जाता है, क्योंकि ये कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित और अनुकूल हैं। अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत हमें स्थायी और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।

अथवा

भारत के कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा श्रम सहभागिता दर ऊँची क्यों है?
उत्तर – भारत के कुछ राज्यों में श्रम सहभागिता दर ऊँची होने का मुख्य कारण आर्थिक विकास का निम्न स्तर, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में रोजगार की कमी, और कृषि तथा अन्य प्राथमिक गतिविधियों पर निर्भरता है। इन राज्यों में अधिकतर लोग कृषि, पशुपालन और अन्य साधारण आर्थिक गतिविधियों में लगे रहते हैं, क्योंकि उच्च-कुशल या औपचारिक रोजगार के अवसर सीमित हैं। इसलिए लोग निर्वाह स्तर की गतिविधियों में शामिल होकर अपनी आजीविका चलाते हैं, जिससे श्रम सहभागिता दर स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है।

SECTION – C (3 Marks)

17. मानव का प्राकृतीकरण क्या है?
उत्तर – मानव का प्राकृतीकरण (पर्यावरणीय नियतत्ववाद) वह स्थिति है जिसमें मानव अपने जीवन और विकास के लिए पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर रहता है और प्राकृतिक नियमों, परिस्थितियों और संसाधनों को स्वीकार करता है। तकनीकी विकास के अभाव में प्रारंभिक मानव प्रकृति के अनुकूल रहकर जीवन यापन करता था। वह प्राकृतिक शक्तियों से प्रभावित होता, उनका सम्मान करता और कभी-कभी उनका पूजन भी करता था। मानव की बस्तियाँ, कृषि, परिवहन और जीवनशैली प्राकृतिक तत्वों के अनुसार ही विकसित होती थीं। इस प्रकार, मानव का प्राकृतीकरण यह दर्शाता है कि प्रारंभिक समाज में मानव की गतिविधियाँ और विकास पूरी तरह से प्राकृतिक पर्यावरण पर निर्भर थे।

18. मानव विकास अवधारणा के अन्तर्गत समता और सतत पोषणीयता से क्या समझते हैं?
उत्तर – मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत :
• समता (Equity) का अर्थ है समाज में सभी लोगों को समान अवसर, संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध कराना। इसका उद्देश्य अमीर और गरीब, शहर और गांव, पुरुष और महिला के बीच असमानता को कम करना और प्रत्येक व्यक्ति के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करना है।
• सतत पोषणीयता (Sustainability) का अर्थ है विकास इस तरह करना कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी हों, और भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसमें संसाधनों का विवेकपूर्ण, संतुलित और दीर्घकालिक उपयोग शामिल है, ताकि प्राकृतिक और मानव संसाधनों का संरक्षण हो और विकास स्थायी रूप से जारी रह सके।

19. चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुपालन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुपालन में अन्तर :
• चलवासी पशुचारण – इसमें पशुओं का पालन मुख्य रूप से परिवार की दैनिक आवश्यकताओं जैसे दूध, मांस और ऊन के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि परिवार के भोजन और उपयोग की वस्तुओं की पूर्ति करना होता है। इसमें आमतौर पर कम संख्या में पशु रखे जाते हैं और पालन-पोषण पारंपरिक तरीके से, जैसे स्थानीय चारा और सामान्य आवास में किया जाता है। इसका प्रबंधन सरल होता है और खर्च भी कम आता है।
• वाणिज्य पशुपालन – वाणिज्यिक पशुपालन का उद्देश्य मुख्य रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त करना होता है। इसमें अधिक संख्या में पशु रखे जाते हैं और उनका पालन वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों के अनुसार किया जाता है। पशुओं को उच्च गुणवत्ता वाला चारा, औषधि, और बेहतर आवास उपलब्ध कराया जाता है ताकि उत्पादन (दूध, मांस, अंडा, ऊन आदि) अधिक और गुणवत्ता में श्रेष्ठ हो। इसका प्रबंधन संगठित होता है और इसमें निवेश भी अधिक होता है।

20. भारत में जल संसाधनों में तेजी से कमी आ रही है। इसके उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर – भारत में जल संसाधनों में तेजी से कमी आने के उत्तरदायी कारक :
(i) अत्यधिक जल उपयोग और बढ़ती आबादी – कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पानी का अत्यधिक उपयोग जल संसाधनों पर भारी दबाव डालता है। विशेषकर सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर पानी की निकासी से नदियाँ, तालाब और भूजल स्रोत तेजी से घट रहे हैं। इसके साथ ही बढ़ती जनसंख्या के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उपलब्ध जल संसाधन संतुलन खो रहे हैं।
(ii) भूमि और जल प्रदूषण – औद्योगिक अपशिष्ट, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और घरेलू सीवेज नदियों, झीलों और तालाबों में मिलकर पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। इससे न केवल जल का शुद्ध रूप घटता है बल्कि पेयजल और सिंचाई योग्य पानी की कमी भी बढ़ जाती है।
(iii) अविवेकपूर्ण जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन – पानी का अपर्याप्त संग्रहण, भूजल का अत्यधिक दोहन और गहरी खानों से जल स्तर गिरना प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण असमान वर्षा, सूखे और बाढ़ जैसी परिस्थितियाँ बार-बार आती हैं, जो जल संसाधनों की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

21. बस्ती क्या है? संहत और प्रकीर्ण बस्तियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – बस्ती किसी स्थान पर लोगों के रहने और जीवन यापन के लिए बनी जगह को कहते हैं। इसमें लोग घरों, सड़कें, बाजार और अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ रहते हैं। बस्तियाँ गाँव, कस्बे या शहर के रूप में विकसित हो सकती हैं।
• सन्हत और प्रकीर्ण बस्तियों में अंतर :
(i) संहत बस्ती – संहत बस्ती में घर और अन्य निर्माण आपस में पास-पास और घने रूप से बने होते हैं। यह प्रकार आमतौर पर मैदान क्षेत्रों और कृषि प्रधान क्षेत्रों में देखने को मिलता है, ताकि खेती योग्य भूमि की अधिकतम बचत की जा सके। सड़कें और अन्य सुविधाएँ भी केंद्रित रूप में होती हैं, जिससे सामाजिक संपर्क और सामुदायिक जीवन अधिक विकसित होता है।
(ii) प्रकीर्ण बस्ती – प्रकीर्ण बस्ती में घर और निर्माण अलग-अलग और फैलाव वाले होते हैं। यह प्रकार पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों या बड़े खेतों वाले क्षेत्रों में अधिक देखा जाता है। इसमें लोगों के बीच दूरी अधिक होती है, और जमीन का उपयोग अधिक फैला होता है। सामाजिक संपर्क सीमित रहता है, लेकिन खेती और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है।

अथवा

भारत के आर्थिक विकास में सड़क परिवहन के महत्त्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर – भारत के आर्थिक विकास में सड़क परिवहन का महत्त्व :
(i) वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह को सरल बनाना: सड़क मार्ग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़कर कृषि, उद्योग और व्यापार की वस्तुओं को तेज़ी और सुरक्षित तरीके से पहुँचाने में मदद करता है। इससे उत्पादन समय पर बाजार तक पहुँचता है, माल का नुकसान कम होता है और पूरे देश में आर्थिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से बढ़ती हैं।
(ii) रोज़गार और क्षेत्रीय विकास – सड़क निर्माण और परिवहन सेवाओं से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। साथ ही, सड़कें दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य शहरों से जोड़कर वहाँ के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के अवसर उपलब्ध कराती हैं। इससे क्षेत्रीय विकास और समान आर्थिक अवसर सुनिश्चित होते हैं।
(iii) व्यापार और उद्योग को बढ़ावा – सड़क परिवहन सस्ती, लचीली और सुविधाजनक होने के कारण उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद आसानी से उपलब्ध कराता है। यह छोटे और बड़े उद्योगों तथा व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है, जिससे राष्ट्रीय GDP में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास को मजबूती मिलती है।

22. इंदिरा गाँधी नहर कमान क्षेत्र में सतत पोषणीय विकास को बढ़ावा देने के तीन उपाय सुझाइए।
उत्तर – इंदिरा गाँधी नहर कमान क्षेत्र में सतत पोषणीय विकास को बढ़ावा देने के उपाय :
(i) सिंचाई के लिए जल संरक्षण और दक्ष तकनीक अपनाना – ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकें अपनाकर जल का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। इससे न केवल पानी की बचत होती है बल्कि फसलों की उपज भी बढ़ती है। सतत जल प्रबंधन से नहर क्षेत्र में कृषि स्थायी और पर्यावरण के अनुकूल बनती है।
(ii) संतुलित और जैविक कृषि को बढ़ावा देना – रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के बजाय जैविक खाद, कम्पोस्ट और पोषण संतुलित फसल योजना अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इससे भूमि क्षरण कम होता है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है, जो सतत पोषणीय विकास का आधार है।
(iii) सामुदायिक और स्थानीय संसाधनों का सतत उपयोग – मिट्टी संरक्षण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और ग्रामीण युवाओं को सतत कृषि तकनीक में प्रशिक्षण देने से स्थानीय संसाधनों का कुशल उपयोग होता है। इससे किसानों की आजीविका सुरक्षित रहती है और क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक विकास दोनों सतत तरीके से होते हैं।

अथवा

चतुर्थ और पंचम क्रियाकलापों में अन्तर बताइये।
उत्तर – चतुर्थ और पंचम क्रियाकलापों में अन्तर :
(i) चतुर्थ क्रियाकलाप – चतुर्थ क्रियाकलाप उन गतिविधियों को कहते हैं जो व्यक्ति के व्यक्तिगत, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए की जाती हैं। इनमें पढ़ाई, अध्ययन, ध्यान, आत्मनिरीक्षण, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का विकास शामिल होता है। इन क्रियाकलापों का उद्देश्य व्यक्ति की सोच, समझ, कौशल और व्यक्तित्व को विकसित करना होता है, जिससे वह अपने जीवन में संतुलित और जिम्मेदार बन सके।
(ii) पंचम क्रियाकलाप – पंचम क्रियाकलाप वे गतिविधियाँ हैं जो समाज और समुदाय के विकास से संबंधित होती हैं। इसमें खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक परियोजनाओं में भाग लेना शामिल होता है। इन क्रियाकलापों का उद्देश्य सामाजिक संबंधों को मजबूत करना, सहयोग की भावना बढ़ाना और सामूहिक विकास को प्रोत्साहित करना है।

SECTION – D (5 Marks)

23. भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर – भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियाँ
(i) उच्च जन्म दर – भारत में जन्म दर अभी भी उच्च स्तर पर है, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में। इसके कई कारण हैं, जैसे कि परिवार में अधिक संतान को कृषि कार्य में सहायता और भविष्य में परिवार का सहारा मानना। सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ, शिक्षा की कमी और महिलाओं के प्रति सीमित अवसर भी उच्च जन्म दर को प्रभावित करते हैं।
(ii) मृत्यु दर में कमी और स्वास्थ्य सुधार – स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, टीकाकरण, पोषण और स्वच्छता के कारण मृत्यु दर में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। इससे जीवन प्रत्याशा बढ़ी है और अधिक लोग लंबे समय तक जीवित रहते हैं, जिससे जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि दर बढ़ती है।
(iii) प्रवासन और शहरीकरण – रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ता आंतरिक प्रवासन कुछ शहरों और क्षेत्रों में जनसंख्या दबाव बढ़ाता है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन भी स्थानीय जनसंख्या वृद्धि में योगदान करता है। शहरीकरण और औद्योगिक विकास ने भी जनसंख्या केंद्रों में घनत्व बढ़ाया है।

अथवा

जनांकिकीय संक्रमण क्या है? जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर – जनांकिकीय संक्रमण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई समाज उच्च जन्म दर और उच्च मृत्यु दर से निम्न जन्म दर और निम्न मृत्यु दर की ओर बढ़ता है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या वृद्धि विभिन्न चरणों से गुजरती है।
• जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाएँ :
(i) पहली अवस्था (उच्च स्थिर) – इस अवस्था में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों उच्च और अनिश्चित होती हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वच्छता की कमी के कारण मृत्यु दर अधिक रहती है। जनसंख्या वृद्धि धीमी या स्थिर रहती है, क्योंकि उच्च जन्म दर को उच्च मृत्यु दर संतुलित कर देती है। यह अवस्था आमतौर पर कृषि प्रधान और अविकसित समाजों में पाई जाती है।
(ii) दूसरी अवस्था (उच्च वृद्धि) – इस चरण में स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और स्वच्छता में सुधार के कारण मृत्यु दर में तेज़ी से गिरावट आती है, जबकि जन्म दर अभी भी उच्च बनी रहती है। इसके कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होती है, जिसे “जनसंख्या विस्फोट” कहा जाता है।
(iii) तीसरी अवस्था (निम्न स्थिर/गिरती वृद्धि) – इस चरण में जन्म दर घटने लगती है और मृत्यु दर भी कम बनी रहती है। शहरीकरण, शिक्षा और परिवार नियोजन की स्वीकार्यता के कारण लोग छोटे परिवार रखना पसंद करते हैं। परिणामस्वरूप जनसंख्या वृद्धि धीरे-धीरे स्थिर या धीमी हो जाती है। यह अवस्था विकसित और आर्थिक रूप से उन्नत समाजों में देखी जाती है।

24. चावल की कृषि की भौगोलिक दशाओं, उत्पादन और वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर – चावल की कृषि :
• भौगोलिक दशाएँ – चावल की खेती के लिए उष्ण और आर्द्र जलवायु अनिवार्य है। इसके लिए 20°–30°C तापमान तथा 100–200 से.मी. तक की वर्षा उपयुक्त मानी जाती है। यह फसल जल अधिक सोखने और रोकने वाली जलोढ़, दोमट तथा चिकनी मिट्टी में अच्छी उगती है। समतल एवं दलदली भूमि तथा पानी भराव की दशाएँ इसकी वृद्धि के लिए विशेष रूप से लाभकारी होती हैं।
• उत्पादन – भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 40% भाग चावल से प्राप्त होता है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और पंजाब इस फसल के सर्वाधिक उत्पादक राज्य हैं। भारत में खरीफ ऋतु की मुख्य फसल होने के कारण इसका उत्पादन मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहता है, हालांकि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में सिंचाई के सहारे भी बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जाता है।
• वितरण – चावल का प्रमुख वितरण गंगा-ब्रह्मपुत्र घाटी, पूर्वी और दक्षिणी भारत में पाया जाता है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, ओडिशा और हरियाणा इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। पूर्वी भारत में वर्षा आधारित खेती प्रमुख है, जबकि उत्तर-पश्चिमी भारत में यह नहरों और ट्यूबवेलों की सिंचाई पर आधारित है। इस प्रकार चावल पूरे देश में व्यापक रूप से वितरित फसल है।

अथवा

भारत में पेट्रोलियम के उत्पादन और वितरण का वर्णन करें।
उत्तर – पेट्रोलियम, जिसे “काला सोना” कहा जाता है, भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह परिवहन, उद्योग, बिजली उत्पादन, रसायन और उर्वरक उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग होता है। भारत विश्व में पेट्रोलियम उपभोग करने वाले शीर्ष देशों में है, लेकिन उत्पादन की दृष्टि से अभी भी सीमित है।
भारत में पेट्रोलियम :
• उत्पादन – भारत में पेट्रोलियम का उत्पादन मुख्य रूप से असम, गुजरात, मुंबई हाई (बॉम्बे हाई), राजस्थान, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे क्षेत्रों में होता है। कच्चा तेल मुख्यतः पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर भारत से प्राप्त होता है। इसके लिए कुएं खोदे जाते हैं और समुद्र के अपतटीय क्षेत्रों से भी तेल निकाला जाता है। इस प्रक्रिया का संचालन प्रमुख रूप से तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) द्वारा किया जाता है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादन देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन कुल मांग के मुकाबले यह सीमित है, इसलिए आयात पर भी निर्भरता रहती है।
• वितरण – उत्पादन के बाद कच्चे तेल को रिफाइनरियों तक पहुँचाया जाता है, जहाँ इसे क्रूड डिस्टिलेशन, हाइड्रो-ट्रीटमेंट और रिसाइकलिंग जैसी प्रक्रियाओं द्वारा पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, एविएशन फ्यूल, बिटुमेन और टैरपीन जैसे उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है। तैयार उत्पाद पाइपलाइन, टैंकर और कंटेनरों के माध्यम से देशभर में वितरित किए जाते हैं। भारत में रिफाइनिंग क्षमता में वृद्धि हुई है, जिससे देश न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। इसके अलावा, सरकार ने तेल अन्वेषण और उत्पादन के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए हैं।

25. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार क्या है? अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जिसमें दो या दो से अधिक देशों के बीच सीमाओं के बाहर वस्तुएँ, सेवाएँ, पूंजी और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान होता है। इसमें आयात (Import) और निर्यात (Export) शामिल हैं। आयात वह प्रक्रिया है जिसमें देश अन्य देशों से वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदता है, जबकि निर्यात वह प्रक्रिया है जिसमें देश अपनी वस्तुएँ और सेवाएँ अन्य देशों को बेचता है। यह व्यापार देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, तकनीकी प्रगति बढ़ाने और उपभोक्ताओं को विकल्प देने में मदद करता है।
• अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार :
(i) संसाधनों का असमान वितरण – सभी देशों में प्राकृतिक संसाधनों का वितरण समान नहीं होता। उदाहरण के लिए, मध्य पूर्व के देश तेल में समृद्ध हैं, जबकि भारत में पर्याप्त प्राकृतिक तेल नहीं है। इसी कारण से मध्य पूर्व से तेल का आयात और भारत से आईटी सेवाओं का निर्यात किया जाता है।
(ii) विशेषज्ञता और दक्षता – प्रत्येक देश कुछ वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन में विशेषज्ञता हासिल करता है। उदाहरण के लिए, भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) में माहिर है, जर्मनी मशीनरी और वाहन निर्माण में दक्ष है। यह विशेषज्ञता अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देती है।
(iii) आर्थिक लाभ – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से देश उन वस्तुओं को सस्ते में प्राप्त कर सकते हैं जिन्हें वे स्वयं महँगी लागत में बना सकते हैं। इसी तरह, वे उन वस्तुओं को निर्यात करते हैं जिनमें उन्हें दक्षता और विशेषज्ञता है। इससे लागत कम होती है और अधिक लाभ मिलता है।
(iv) विविधता और प्रतिस्पर्धा – व्यापार से उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार के उत्पाद और सेवाएँ मिलती हैं। इससे न केवल उनकी पसंद के विकल्प बढ़ते हैं, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होता है और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
(v) संसाधनों की उपलब्धता – कुछ देश किसी विशेष संसाधन में बहुत समृद्ध होते हैं, इसलिए वे उसका उत्पादन और निर्यात करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ उपलब्ध हैं, जबकि अमेरिका कृषि उत्पादों में समृद्ध है।

अथवा

वायु प्रदूषण के कारण व प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – वायु प्रदूषण के कारण :
(i) औद्योगिक गतिविधियाँ – फैक्ट्रियों और रिफाइनरी से निकलने वाला धुआँ, गैस और रसायन वायु में मिलकर प्रदूषण पैदा करते हैं। यह वायु को जहरीला बनाता है और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
(ii) वाहनों का धुआँ – कार, बस, ट्रक और अन्य वाहन पेट्रोल और डीजल जलाते हैं, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं। यह न केवल श्वसन तंत्र को प्रभावित करती हैं बल्कि वायु की शुद्धता भी कम करती हैं।
(iii) जलाना और धूम्रपान – घरेलू ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी और प्लास्टिक का जलाना वायु में हानिकारक कण और रसायन छोड़ता है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ता है और सांस लेने में कठिनाई होती है।
(iv) प्राकृतिक कारण – जंगल की आग, धूल भरी हवाएँ और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक घटनाएँ भी वायु में हानिकारक तत्व छोड़ती हैं। हालांकि, मानवजनित गतिविधियों की तुलना में इनका योगदान कम होता है।
• वायु प्रदूषण के प्रभाव :
(i) स्वास्थ्य पर प्रभाव: प्रदूषित वायु के संपर्क में आने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएँ होती हैं। बच्चे, बुजुर्ग और रोगी वर्ग अधिक प्रभावित होते हैं।
(ii) पर्यावरण पर प्रभाव – वायु प्रदूषण से पेड़-पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है, फसलें कम होती हैं और कुछ पौधों की प्राकृतिक वृद्धि बाधित होती है। इससे पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो सकता है।
(iii) जलवायु परिवर्तन – वायु प्रदूषण से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है और ओजोन परत को नुकसान पहुँचता है। इससे प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ती है और मौसम में असामान्य परिवर्तन होते हैं।
(iv) दृश्यता और सौंदर्य पर प्रभाव – धुंध, धूल और धुआँ वातावरण को गंदा बनाते हैं और दृश्यता कम कर देते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और शहरों की सुंदरता भी प्रभावित होती है।

SECTION – E (5 Marks : MAP)

26. भारत के मानचित्र पर निम्नलिखित को दर्शाइए :
(i) सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य (बिहार)
(ii) भारत का कॉफी उत्पादक राज्य (कर्नाटक)
(iii) रानीगंज कोयला क्षेत्र (पश्चिम बंगाल)
(iv) कांडला बंदरगाह (गुजरात)
(v) खेतड़ी (राजस्थान)
उत्तर –