HBSE Class 12 Geography Pre-Board Question Paper 2026 Answer Key

HBSE Class 12 Geography Pre-Board Question Paper 2026 Answer Key

SECTION – A (1 Mark)

1. नव निश्चयवाद के प्रवर्तक कौन थे?
(A) ग्रिफिथटेलर
(B) रैटजेल
(C) फेबद्रे
(D) रिटर
उत्तर – (A) ग्रिफिथटेलर

2. कौन-सा देश उच्च मानव विकास वाला नहीं है?
(A) नार्वे
(B) अर्जेंटीना
(C) जापान
(D) मिस्र
उत्तर – (D) मिस्र

3. वेल्ड घास क्षेत्र किस महा‌द्वीप में मिलता है?
(A) अफ्रीका
(B) एशिया
(C) आस्ट्रेलिया
(D) यूरोप
उत्तर – (A) अफ्रीका

4. 2011 की जनगणना के अनुसार, किस राज्य में जनसंख्या का सर्वाधिक घनत्व है :
(A) पश्चिम बंगाल
(B) बिहार
(C) पंजाब
(D) केरल
उत्तर – (B) बिहार

5. कौन-सा नगर नदी तट पर स्थित नहीं है?
(A) आगरा
(B) भोपाल
(C) पटना
(D) कोलकता
उत्तर – (B) भोपाल

6. कौन-सा नगर प्रशासनिक नगर है?
(A) रोहतक
(B) सूरत
(C) गाँधीनगर
(D) वाराणसी
उत्तर – (C) गाँधीनगर

7. किस स्थान पर पहला परमाणु ऊर्जा केन्द्र स्थापित किया गया?
(A) कल्पक्कम
(B) तारापुर
(C) नरौरा
(D) कैगा
उत्तर – (B) तारापुर

8. भरमौर क्षेत्र की प्रमुख नदी है :
(A) चेनाब
(B) सतलुज
(C) व्यास
(D) रावी
उत्तर – (D) रावी

9. अभिकथन (A) : जीवन निर्वाह कृषि स्वयं के उपभोग के लिए की जाती है।
कारण (R) : स्थानांतरी कृषि तथा काँटों और जलाओ कृषि एक नहीं है।
(A) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
(B) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं लेकिन कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
(C) अभिकथन सही है लेकिन कारण गलत है।
(D) अभिकथन गलत है लेकिन कारण सही है।
उत्तर – (C) अभिकथन सही है लेकिन कारण गलत है।

10. अभिकथन (A) : भारत में चावल एक खरीफ फसल है।
कारण (R) : चावल के लिए उच्च तापमान, उच्च नमी तथा पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता होती है।
(A) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
(B) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं लेकिन कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
(C) अभिकथन सही है लेकिन कारण गलत है।
(D) अभिकथन गलत है लेकिन कारण सही है।
उत्तर – (A) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।

SECTION – B (2 Marks)

11. निश्चयवाद से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – निश्चयवाद वह भौगोलिक विचारधारा है जिसके अनुसार मानव की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ मुख्य रूप से प्राकृतिक पर्यावरण जैसे जलवायु, स्थलाकृति, मृदा और वनस्पति द्वारा निर्धारित होती हैं तथा मानव का पर्यावरण पर नियंत्रण सीमित माना जाता है।

12. प्रादेशिक भूगोल से क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर – प्रादेशिक भूगोल, भूगोल की वह शाखा है जिसमें किसी विशेष क्षेत्र या प्रदेश के भौतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक तत्वों का आपसी संबंधों के साथ समन्वित और व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है, जिससे उस क्षेत्र की प्राकृतिक एवं मानवीय विशेषताओं की स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है।

13. पर्यावरण प्रदूषण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – पर्यावरण प्रदूषण वह अवस्था है जब वायु, जल, मृदा तथा ध्वनि में हानिकारक पदार्थों की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाती है, जिससे पर्यावरण की गुणवत्ता में गिरावट आती है तथा मानव एवं अन्य जीवों के जीवन और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

14. क्रमबद्ध भूगोल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – क्रमबद्ध भूगोल, भूगोल के अध्ययन का वह तरीका है जिसमें किसी एक भौगोलिक तत्व जैसे जलवायु, मृदा या जनसंख्या का विश्व स्तर पर अथवा किसी बड़े क्षेत्र में उसके स्वरूप, वितरण और प्रभावों का पृथक-पृथक एवं व्यवस्थित ढंग से अध्ययन किया जाता है।

15. समता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – समता का अर्थ निष्पक्ष और न्यायपूर्ण व्यवहार से है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आवश्यकताओं, क्षमताओं और परिस्थितियों के अनुसार संसाधन एवं अवसर प्रदान किए जाते हैं, ताकि समाज के सभी वर्गों को विकास के समान अवसर प्राप्त हो सकें और कोई भी व्यक्ति या वर्ग पीछे न रह जाए।

16. पनामा नहर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर – पनामा नहर पनामा में स्थित एक मानव निर्मित जलमार्ग है, जो अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है। इसकी लंबाई लगभग 82 किमी है और इसमें जहाजों के आवागमन हेतु लॉक प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस नहर से दक्षिण अमेरिका के चारों ओर की लंबी समुद्री यात्रा से बचाव होता है और यह विश्व व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

SECTION – C (3 Marks)

17. चतुर्थ तथा पंचम क्रियाकलापों को परिभाषित करें।
उत्तर – चतुर्थ क्रियाकलाप वे आर्थिक क्रियाकलाप हैं जो मुख्य रूप से ज्ञान, सूचना, अनुसंधान और तकनीक पर आधारित होते हैं। इनमें शोध एवं विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, परामर्श और डाटा सेवाएँ शामिल होती हैं तथा ये अर्थव्यवस्था को ज्ञान-आधारित बनाते हैं।
• पंचम क्रियाकलाप वे क्रियाकलाप हैं जो सीधे मानव कल्याण और सामाजिक सेवाओं से संबंधित होते हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवाएँ, सामाजिक कार्य, प्रशासन और उच्च स्तर के निर्णयात्मक कार्य शामिल होते हैं, जो समाज की जीवन गुणवत्ता में सुधार करते हैं।

18. सघन तथा एकाकी बस्तियों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर – सघन बस्तियाँ वे होती हैं जहाँ मकान एक-दूसरे के निकट बने होते हैं और जनसंख्या घनत्व अधिक पाया जाता है। ऐसी बस्तियों में सामाजिक संपर्क अधिक होता है और ये सामान्यतः उपजाऊ मैदानों, नदी घाटियों तथा शहरी क्षेत्रों में विकसित होती हैं।
• एकाकी बस्तियाँ वे होती हैं जहाँ मकान दूर-दूर स्थित होते हैं और जनसंख्या घनत्व कम होता है। इन बस्तियों में सामाजिक संपर्क सीमित होता है तथा ये प्रायः पर्वतीय, मरुस्थलीय या वन क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

19. पार महाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होता है? उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर – पार महाद्वीपीय रेलमार्ग वह लंबा रेलमार्ग होता है जो किसी महाद्वीप के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है। यह प्रमुख शहरों, बंदरगाहों और आंतरिक क्षेत्रों को जोड़कर लंबी दूरी की यात्रा तथा माल ढुलाई को सरल बनाता है। ऐसे रेलमार्ग आर्थिक विकास, व्यापार विस्तार और क्षेत्रीय एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण: रूस का ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग, कनाडा का ट्रांस-कनाडियन रेलमार्ग।

20. राष्ट्रीय व्यापार तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर – राष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जो एक ही देश की सीमाओं के भीतर होता है। इसमें वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान देश के विभिन्न राज्यों या क्षेत्रों के बीच किया जाता है तथा इसमें एक ही मुद्रा, कानून और सरकारी व्यवस्था लागू होती है।
• अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार वह व्यापार है जो दो या अधिक देशों के बीच किया जाता है। इसमें विभिन्न देशों की मुद्राएँ, व्यापार नीतियाँ, सीमा शुल्क और नियम शामिल होते हैं तथा यह व्यापार विदेशी मुद्रा और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर आधारित होता है।

21. शुष्क कृषि तथा आर्द्र कृषि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर – शुष्क कृषि कम वर्षा वाले क्षेत्रों (लगभग 75 सेमी से कम) में की जाती है। इन क्षेत्रों में बाजरा, चना और ज्वार जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जो कम जल में भी विकसित हो सकती हैं। इस प्रकार की कृषि मुख्यतः वर्षा पर निर्भर होती है और मृदा में नमी बनाए रखना आवश्यक होता है।
• आर्द्र कृषि अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (लगभग 75 सेमी से अधिक) में की जाती है। इसमें धान, गन्ना और जूट जैसी फसलें उगाई जाती हैं, जिन्हें अधिक जल की आवश्यकता होती है। यह कृषि सिंचाई सुविधाओं और मिट्टी में पर्याप्त नमी पर अधिक निर्भर करती है।

22. वर्षा जल संग्रहण के उद्देश्य स्पष्ट करें।
उत्तर – वर्षा जल संग्रहण का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का संरक्षण और समुचित उपयोग करना है। इसके द्वारा भूजल स्तर को बढ़ाया जाता है, जिससे कुओं और नलकूपों में जल उपलब्धता बनी रहती है। यह विधि पेयजल, सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए जल की पूर्ति में सहायक होती है। साथ ही, वर्षा जल संग्रहण से जल संकट को कम करने, बाढ़ और मृदा अपरदन पर नियंत्रण तथा स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।

SECTION – D (5 Marks)

23. विभिन्न आधारों पर उ‌द्योगों का वर्गीकरण करें।
उत्तर – उद्योगों को उनके स्वरूप और कार्यप्रणाली के आधार पर निम्नलिखित मुख्य आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है :
(i) कच्चे माल के आधार पर – इस आधार पर उद्योगों को कृषि-आधारित उद्योग (जैसे सूती वस्त्र, चीनी उद्योग), खनिज-आधारित उद्योग (जैसे लौह-इस्पात, सीमेंट उद्योग) तथा वन-आधारित उद्योग (जैसे कागज, फर्नीचर उद्योग) में बाँटा जाता है।
(ii) आकार के आधार पर – उद्योगों को उनके उत्पादन स्तर और पूँजी निवेश के आधार पर कुटीर उद्योग, लघु उद्योग और बड़े उद्योग में वर्गीकृत किया जाता है। कुटीर उद्योग घरेलू स्तर पर, जबकि बड़े उद्योग आधुनिक मशीनों और अधिक पूँजी से संचालित होते हैं।
(iii) स्वामित्व के आधार पर – इस आधार पर उद्योगों को निजी क्षेत्र के उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, संयुक्त क्षेत्र के उद्योग तथा सहकारी उद्योग में विभाजित किया जाता है।
(iv) उत्पादन के आधार पर – उद्योगों को मूल उद्योग (जैसे लौह-इस्पात), उपभोक्ता वस्तु उद्योग (जैसे कपड़ा, साबुन) तथा मध्यवर्ती उद्योग में वर्गीकृत किया जाता है, जो अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल तैयार करते हैं।
(v) श्रम के उपयोग के आधार पर – इस आधार पर उद्योग श्रम-प्रधान उद्योग और पूँजी-प्रधान उद्योग कहलाते हैं। जहाँ अधिक श्रमिकों का उपयोग होता है, वे श्रम-प्रधान होते हैं और जहाँ अधिक मशीनों व पूँजी का प्रयोग होता है, वे पूँजी-प्रधान कहलाते हैं।

24. भारत में चाय की खेती के लिए अनुकूल दशाएं, उत्पादन व वितरण का वर्णन करें।
उत्तर – चाय की खेती के लिए अनुकूल दशाएँ : भारत में चाय की खेती के लिए गरम एवं आर्द्र जलवायु सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है। इसके लिए लगभग 15°C से 30°C तापमान, 150 से 250 सेमी वार्षिक वर्षा, पाला-रहित मौसम तथा लंबी आर्द्र अवधि आवश्यक होती है। चाय की खेती सामान्यतः 600 से 2000 मीटर ऊँचाई वाले ढालदार क्षेत्रों में की जाती है। इसके लिए गहरी, उपजाऊ, हल्की अम्लीय तथा अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त होती है। चाय एक श्रम-प्रधान फसल है, इसलिए सस्ते और कुशल श्रम की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होती है।
• भारत में चाय का उत्पादन : भारत विश्व के प्रमुख चाय उत्पादक देशों में से एक है। यहाँ चाय की खेती मुख्यतः वृक्षारोपण (बागान) कृषि के रूप में की जाती है। चाय की कोमल पत्तियों की हाथ से चुनाई की जाती है, जिसके बाद किण्वन, सुखाने तथा प्रसंस्करण की विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा चाय तैयार की जाती है। भारत में उत्पादित चाय का एक बड़ा भाग घरेलू उपभोग में आता है, जबकि शेष का निर्यात किया जाता है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
• भारत में चाय का वितरण : भारत में चाय उत्पादन का वितरण मुख्यतः उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी भारत में केंद्रित है। उत्तर-पूर्वी भारत में असम तथा पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में सर्वाधिक चाय उत्पादन होता है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु के नीलगिरि क्षेत्र तथा केरल उच्च गुणवत्ता की चाय के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक के कुछ भागों में भी सीमित मात्रा में चाय की खेती की जाती है।

25. ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत कौन-से है? वर्णन करें।
उत्तर – अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत वे नवीकरणीय एवं पर्यावरण अनुकूल स्रोत हैं जिनकी प्रकृति द्वारा निरंतर पुनःपूर्ति होती रहती है और जिनका लंबे समय तक उपयोग किया जा सकता है। इन्हें अक्षय ऊर्जा स्रोत भी कहा जाता है। ये कोयला और पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प प्रदान करते हैं। प्रमुख अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत निम्नलिखित हैं :
(i) सौर ऊर्जा – सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं। इसका उपयोग सौर कुकर, सौर हीटर, सौर पैनल और विद्युत उत्पादन में किया जाता है। यह ऊर्जा अक्षय और प्रदूषण-रहित है।
(ii) पवन ऊर्जा – हवा की गति से प्राप्त ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। इसका उपयोग पवन चक्कियों द्वारा बिजली उत्पादन में किया जाता है। यह ऊर्जा विशेष रूप से तटीय और पठारी क्षेत्रों में उपयोगी है।
(iii) जैव ऊर्जा (बायोगैस) – पशुओं के गोबर, कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से प्राप्त ऊर्जा को जैव ऊर्जा कहते हैं। इससे बायोगैस बनती है, जिसका उपयोग ईंधन और बिजली उत्पादन में किया जाता है।
(iv) भू-तापीय ऊर्जा – पृथ्वी के भीतर की तापीय ऊर्जा को भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं। यह ऊर्जा ज्वालामुखीय क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है और इससे विद्युत उत्पादन किया जाता है।
(v) ज्वारीय ऊर्जा – समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा से प्राप्त ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं। इसका उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है और यह एक स्थायी ऊर्जा स्रोत है।

26. निम्नलिखित को भारत के मानचित्र पर दर्शाएं।
(i) कांडला बंदरगाह (कच्छ की खाड़ी, गुजरात)
(ii) रानीगंज कोयला क्षेत्र (वर्धमान, पश्चिमी बंगाल)
(iii) कैगा अणु ऊर्जा केन्द्र (उत्तर कन्नड़, कर्नाटक)
(iv) बरौनी तेल शोधनशाला (बेगूसराय, बिहार)
(v) मयूरभंज लौह अयस्क क्षेत्र (मयूरभंज, ओडिशा)
उत्तर –