HBSE Class 12 Economics Important Question Answer 2024-2025

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HBSE Class 12 Economics Important Question Answer 2024-2025


 

Objective Questions

1. सीमांत उपयोगिता हो सकती है :
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) शुन्य
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

2. “क्या होना चाहिए” का विषय वस्तु हैं :
(a) वास्तविक विज्ञान
(b) आदर्शात्मक विज्ञान
(c) प्राकृतिक विज्ञान
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (b) आदर्शात्मक विज्ञान

3. उत्पादन संभावना वक्र का ढलान होता है :
(a) मूल बिन्दू ‘0’ की ओर उन्नोदर
(b) मूल बिंदू की ओर नतोदर
(c) एक सीधी रेखा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (b) मूल बिंदू की ओर नतोदर

4. बंधी लागत कौन-सी है :
(a) बिजली का बिल
(b) कच्चे माल पर खर्च
(c) दैनिक श्रम की मजदूरी
(d) स्थाई पूंजी पर ब्याज
उत्तर – (d) स्थाई पूंजी पर ब्याज

5. सही समीकरण चुनिए :
(a) TR = AR/Q
(b) AR = MR/Q
(c) MR = ∆TR/∆Q
(d) AR = TR × Q
उत्तर – (c) MR = ∆TR/∆Q

6. निम्नलिखित में से कौन-सा व्यष्टि अर्थशास्त्र का अध्ययन है?
(a) राष्ट्रीय आय
(b) समग्र माँग
(c) व्यापार प्रक
(d) माँग का सिद्धांत
उत्तर – (d) माँग का सिद्धांत

7. उपभोक्ता के संतुलन बिंदु पर
(a) MRSxy = Px/Py
(b) MRSxy > Px/Py
(c) MRSxy < Px/Py
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर – (a) MRSxy = Px/Py

8. आगतों का वस्तु में परिवर्तन कहलाता है :
(a) लाभ
(b) हानि
(c) उत्पादन
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर – (c) उत्पादन

9. जब सीमांत उत्पादन घटता है तो कुल उत्पादन की क्या अवस्था होती है :
(a) अधिकतम
(b) स्थिर
(c) घटती दर से बढ़ता है
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर – (c) घटती दर से बढ़ता है

10. औसत स्थिर लागत किसके द्वारा प्रकट की जाती है?
(a) रेक्टैगुलर हाइपरबोला द्वारा
(c) Y-अक्ष समांनातर एक सरल रेखा द्वारा
(b) X-अक्ष समांनातर एक सरल रेखा द्वारा
(d) U-आकार के वक्र द्वारा
उत्तर – (a) रेक्टैगुलर हाइपरबोला द्वारा

11. निम्नलिखित में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या नहीं है?
(a) किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए
(b) उत्पादन किसके लिए किया जाए
(c) संसाधनों का पूर्ण उपयोग
(d) गरीबी और बेरोजगारी की समस्या
उत्तर – (d) गरीबी और बेरोजगारी की समस्या

12. मांग वक्र के खिसकाव का अर्थ है :
(a) कीमत में वृद्धि के कारण मांग में कमी
(b) कीमत में कमी के कारण मांग में वृद्धि
(c) कीमत में परिवर्तन के बिना मांग में परिवर्तन
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर – (c) कीमत में परिवर्तन के बिना मांग में परिवर्तन

13. निम्न में से किन स्थितियों में MR ऋणात्मक हो सकता है?
(a) जब AR बढ रहा हो
(b) जब AR घट रहा हो
(c) जब AR स्थिर हो
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (b) जब AR घट रहा हो

14. समविच्छेद बिंदु पर फर्म की लाभ तथा हानि होती है :
(a) शुन्य
(b) धनात्मक
(c) ऋणात्मक
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर – (a) शुन्य

15. पुर्ति वक्र जब खड़ी हुई सरल रेखा होती है, तो यह बताती है :
(a) पूर्ण लोचदार पुर्ति
(b) पूर्ण बेलोचदार पुर्ति
(c) इकाई लोचदार पुर्ति
(d) इकाई से अधिर लोचदार पुर्ति
उत्तर – (b) पूर्ण बेलोचदार पुर्ति

16. कीमत सिद्धांत को क्या कहा जाता है?
(a) समष्टि अर्थशास्त्र
(b) व्यष्टि अर्थशास्त्र
c) सार्वजनिक वित्त
(d) कीमत नियंत्रण
उत्तर – (b) व्यष्टि अर्थशास्त्र

17. सामान्यतः प्रतिस्थापन की सीमान्त दर :
(a) घटती है
(b) बढती है
(c) स्थिर रहती है
(d) इनमें से कोई नही
उत्तर – (a) घटती है

18. गिफ्फन वस्तु की स्थिति में मांग वक्र का ढलान होता है :
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) OX अक्ष के समान्तर
(d) OY अक्ष के समान्तर
उत्तर – (a) धनात्मक

19. कौन से बाजार के लिए फर्म के लिए कीमत रेखा क्षैतिज सरल रेखा होती है?
(a) एकाधिकारी
(b) पूर्व प्रतिस्पर्धा
(c) एकाधिकारी प्रतियोगिता
(d) अल्पाधिकारी
उत्तर – (b) पूर्व प्रतिस्पर्धा

20. पूर्ण प्रतियोगिता में वस्तु की कीमत की निर्धारण :
(a) अकेली वस्तु की मांग करती है
(b) अकेली वस्तु की आपूर्ति करती है
(c) वस्तु की मांग और आपूर्ति दोनो द्वारा होता है
(d) सरकार द्वारा किया जाता है।
उत्तर – (c) वस्तु की मांग और आपूर्ति दोनो द्वारा होता है

21. जब सीमांत उत्पादन –ve होता है तो कुल उत्पादन
(a) शून्य
(b) बढ़ता
(c) घटता
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (c) घटता

22. रेक्टैंगुलर हाइपरबोला (Retangular Hyperbola) लागत वक्र
(a) कुल स्थिर लागत
(b) कुल परिवर्तनशील लागत
(c) औसत स्थिर लागत
(d) औसत परिवर्तशील लागत
उत्तर – (c) औसत स्थिर लागत

23. परिवर्ती अनुपात का नियम किससे सम्बन्धित है?
(a) लागत
(b) उत्पादन
(c) आगम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (b) उत्पादन

24. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में फर्म का मांग वक्र होता है :
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) OX के समांतर
(d) OY के समांतर
उत्तर – (c) OX के समांतर

25. व्यष्टि अर्थशास्त्र में निम्न का अध्ययन किया जाता है।
(a) राष्ट्रीय आय
(b) व्यापार चक्र
(c) मांग का सिद्धांत
(d) मुद्रास्फीति
उत्तर – (c) मांग का सिद्धांत

26. समष्टि-अर्थशास्त्र अध्ययन करता है :
(a) सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का
(b) एक उद्योग का
(c) एक फर्म का
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (a) सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का

27. भारत में एक रूपये का नोट कौन जारी करता है?
(a) भारतीय रिजर्व बैंक
(b) भारत सरकार
(c) व्यापारिक बैंक
(d) हरियाणा सरकार
उत्तर – (b) भारत सरकार

28. सीमान्त उपभोग प्रवृति (MPC) बराबर है :
(a) ΔΥ/∆C
(b) ∆C/∆Y
(c) C/Y
(d) Y/C
उत्तर – (b) ∆C/∆Y

29. निम्नलिखित में से प्रत्यक्ष कर का उदाहरण कौन-सा है?
(a) आयात-निर्यात कर
(b) उत्पादन कर
(c) बिक्री कर
(d) आयकर पर सरचार्ज
उत्तर – (d) आयकर पर सरचार्ज

30. विदेशी मुद्रा की मांग तथा विनिमय दर में क्या सम्बंध पाया जाता है?
(a) विपरीत
(b) प्रत्यक्ष
(c) कोई सम्बंध नहीं
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (a) विपरीत

31. समष्टि अर्थशास्त्र का सम्बध है :
(a) अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन स्तर से
(b) सामान्य कीमत स्तर
(c) जी.डी.पी. वृद्धि
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

32. ‘परिवार की आय’ किस चर का उदाहरण है?
(a) स्टॉक
(b) प्रवाह
(c) (a) और (b) दोनो
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (b) प्रवाह

33. साख नियंत्रण से अभिप्राय है :
(a) साख की संकुचन
(b) साख का विस्तार
(c) साख का संकुचन और विस्तार
(d) मुद्रा का संकुचन और विस्तार
उत्तर – (c) साख का संकुचन और विस्तार

34. “पुर्ति स्वयं अपनी मांग उत्पन्न करती है।” यह कथन किसका है?
(a) मार्शल
(b) केन्ज
(c) जे.बी. से
(d) रोबिन्स
उत्तर – (c) जे.बी. से

35. निम्नलिखित में से कौन-सी प्रवाह चर है?
(a) उपभोग
(b) धन
(c) मुद्रा की मात्रा
(d) इनमे से कोई नहीं
उत्तर – (a) उपभोग

36. ‘समावेश’ में निम्नलिखित में से किसको शामिल नहीं किया जाता?
(a) निवेश
(b) आयात
(c) निर्यात
(d) उपयोग व्यय
उत्तर – (b) आयात

37. यदि MPC = 0.5 हो तो, गुणक (K) का मुल्य होगा :
(a) 1
(b) 2
(c) 8
(d) 5
उत्तर – (b) 2

38. राष्ट्रीय आय को मापने में निम्नलिखित में से कौन-सी रेखांकित कठिनाई नहीं है?
(a) स्थिर कीमतें
(b) दोहरी गणना
(c) प्रतिफल सहित सेवाएं
(d) विदेशी कंपनियों की आय
उत्तर – (a) स्थिर कीमतें

39. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना कब हुई?
(a) 1905
(b) 1920
(c) 1935
(d) 1990
उत्तर – (c) 1935

40. शुद्ध निवेश बराबर होता है :
(a) सकल निवेश + मुल्य ह्रास
(b) सकल निवेश – मुल्य ह्रास
(c) सकल निवेश × मुल्य ह्रास
(d) सकल निवेश ÷ मुल्य ह्रास
उत्तर – (b) सकल निवेश – मुल्य ह्रास

41. व्यापार शेष की तुलना में भूगतान शेष है :
(a) अधिक व्यापक
(b) कम व्यापक
(c) a और b दोनो
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (a) अधिक व्यापक

42. विनिमय दर से अभिप्राय अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा बाजार में एक कंरेसी की अन्य करेसियों के रूप में :
(a) कीमत से
(b) विनिमय के अनुपात से है
(c) a और b दोनो
(d) वस्तु विनिमय से है
उत्तर – (b) विनिमय के अनुपात से है

43. कर एक :
(a) ऐच्छिक भूगतान है
(b) अनिवार्य भुगतान है
(c) एक कानूनी भुगतान नहीं है
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (b) अनिवार्य भुगतान है

44. सस्ती मौद्रिक नीति का उदेश्य है :
(a) साख का विस्तार करना
(b) वस्तु और सेवाओं की मांग में वृद्धि करना
(c) अवस्फीतिक अंतराल कम करना
(d) ये सभी
उत्तर – (d) ये सभी

45. आय के चक्रीय प्रवाह के रिसाव में निम्न को शामिल किया जाता है ?
(a) फर्म द्वारा उधार
(b) सार्वजनिक व्यय
(c) निवेश
(d) बचत
उत्तर – (d) बचत

46. निवल निवेश बराबर होता है
(a) सकल निवेश – घिसावट
(b) सकल निवेश + घिसावट
(c) सकल निवेश ÷ घिसावट
(d) सकल निवेश × घिसावट
उत्तर – (a) सकल निवेश – घिसावट

47. राष्ट्रीय आय में निम्न को शामिल नहीं किया जाता है?
(a) घरेलू सेवाएं
(b) हस्तांतरण आय
(c) मध्यवर्ती वस्तुएं
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

48. भारत का केन्द्रीय बैंक कौन सा है?
(a) RBI
(b) SBI
(c) PNB
(d) HDFC
उत्तर – (a) RBI

49. भारत में वित्त वर्ष किस तिथि को प्रारम्भ होता है?
(a) 1 जुलाई
(b) 1 जनवरी
(c) 31 मार्च
(d) 1 अप्रैल
उत्तर – (d) 1 अप्रैल

50. RBI की फुल फॉर्म क्या है?
(a) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया
(b) रूरल बैंक ऑफ इंडिया
(c) राइट बैंक ऑफ इंडिया
(d) रिजर्व बैंक ऑफ ईरान
उत्तर – (a) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

51. “Principles of Economics” नामक पुस्तक …………………. द्वारा लिखी गई है। (रोबिन्स / मार्शल)
उत्तर – मार्शल

52. तटस्थता मानचित्र एक ग्राफ है जो ……………… तटस्थता वक्र/वक्रों का प्रतिनिधित्व करता है। (एक / एक से अधिक)
उत्तर – एक से अधिक

53. पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत ……………. (औसत आय > सीमान्त आय / औसत आय = सीमान्त आय)
उत्तर: औसत आय = सीमान्त आय

54. औसत लागत वक्र ……………… का होता है। (सीधी रेखा / U-आकार)
उत्तर – U-आकार

55. पूर्ति के नियम के अनुसार किसी वस्तु की कीमत और पूर्ति के बीच ……………… संबंध होता है। (ऋणात्मक / धनात्मक)
उत्तर – धनात्मक

56. पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत कीमत …………..… निधारित होती है। (फर्म / बाजार)
उत्तर – बाजार

57. उत्पादन फलन भौतिक आगत और भौतिक निर्गत के बीच के ……………… सम्बंध को दर्शाता है। (तकनीकी / आर्थिक)
उत्तर – तकनीकी

58. उपभोक्ता संतुलन के तटस्थता वक्र विश्लेषण उपयोगिता के माप की ………………. अवधारणा पर आधारित है। (क्रमवाचक / प्रमुखता)
उत्तर – क्रमवाचक

59. जब कीमत के बढ़ने पर पूर्ति बढ जाती है, तो इसे ……………… कहते है। (पूर्ति की विस्तार / पूर्ति में वृद्धि)
उत्तर – पूर्ति की विस्तार

60. घटते-बढ़ते अनुपात का नियम ……………… लागु होता है। (अल्पकाल / दीर्घकाल )
उत्तर – अल्पकाल

61. औसत आगम वक्र को ……………… कहते है। (मांग वक्र / पूर्ति वक्र)
उत्तर – मांग वक्र

62. पेप्सी और कोक …………….. वस्तुएं हैं। (पूरक / प्रतिस्थापन)
उत्तर – प्रतिस्थापन

63. उत्पादन सम्भावना वक्र …………….. होते हैं। (उन्नोत्तर / नतोदर)
उत्तर – नतोदर

64. वाणिज्यिक बैंक मुद्रा की आपूर्ति में कौन योगदान करता हैं? (नगद ऋण / मांग जमा में ऋण)
उत्तर – मांग जमा में ऋण

65. ऋण की वसूली एक ……..……. प्राप्ति है। (राजस्व / पूँजी)
उत्तर – राजस्व

66. दो-क्षेत्रीय बंद अर्थ अवस्था में, यदि उपभोग आय के बराबर औसत बचत प्रवृति …………….. होगी। (शुन्य / एक)
उत्तर – शुन्य

67. …………….. व्यय सरकार के लिए संपति बनाता है। (आय / पूँजी)
उत्तर – पूँजी

68. यदि सीमांत उपभोग प्रवृति (MPC) = 1, तो गुणक ……………… होगा। (एक / अनंत)
उत्तर – अनंत

69. मौद्रिक प्रवाह विभिन्न क्षेत्रो में ………………. प्रकट करता है। (मुद्रा के प्रवाह / सेवाओ का प्रवाह)
उत्तर – मुद्रा के प्रवाह

70. अप्रत्यक्ष कर तथा आर्थिक सहायता के अंतर को ……………….. कहते है। (निवल प्रत्यक्ष कर / निवल अप्रत्यक्ष कर)
उत्तर – निवल अप्रत्यक्ष कर

71. स्वचालित निवेश ………………. में परिवर्तन से स्वतन्त्र है। (आय / उपभोग)
उत्तर – आय

72. ……………… ये वाला स्टाक चर का उदाहरण है। (सम्पति / सीमेन्ट उत्पादन)
उत्तर – सम्पति

73. अवितरित लाभ …………….. का एक भाग है। (ब्याज / लाभ)
उत्तर – लाभ

74. MPC + MPS = …………… (एक / शुन्य)
उत्तर – एक

75. लाभांश ………… का एक भाग होता है। (ब्याज / लाभ)
उत्तर – लाभ

76. सामान्य कीमत स्तर का अध्ययन …………….. अर्थशास्त्र में होता है। (व्यष्टि / समष्टि)
उत्तर – समष्टि

77. प्राथमिक घाटा = …………….. – ब्याज का भुगतान। (राजस्व घाटा / राजकोषीय घाटा)
उत्तर – राजकोषीय घाटा

 


 

Assertion-Reason Based Questions (अभिकथन-कारण आधारित प्रश्न)

निम्नलिखित प्रश्नों में दो कथनों को अभिकथन (A) और कारण (R) के रूप में बताया गया है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनें।
(a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।
(b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है लेकिन कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) अभिकथन (A) सही है लेकिन कारण (R) गलत है।
(d) अभिकथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।

1. अभिकथन (A) : कुल उत्पादन स्थिर है जब सीमांत उत्पादन शून्य हैं।
कारण (R) : सीमांत उत्पादन, कुल उत्पादन में परिवर्तन को मापता है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

2. अमिकथन (A) : ऋणात्मक सीमांत आय तभी संभव है जब कीमत गिर रही हो।
कारण (R) : पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत, औसत आय = सीमांत आय और दोनों स्थिर है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

3. अभिकथन (A) : जब तक सीमांत उपयोगिता धनात्मक है तब कुल उपयोगिता में वृद्धि होती है।
कारण (R) : सीमांत उपयोगिता कुल उपयोगिता का ढलान है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

4. अभिकथन (A) : विलासिता वस्तुओं की मांग लोचदार होती है।
कारण (R) : जब मांगी गई मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से कम होता है, तो मांग को लोचदार कहा जाता है।
उत्तर – (c) अभिकथन (A) सही है लेकिन कारण (R) गलत है।

5. अभिकथन (A) : परिवर्तनशील अनुपात के नियम से बचा जा सकता है।
कारण (R) : तकनीक में सुधार के साथ ही हम परिवर्तनशील अनुपात के नियम को स्थागित कर सकते है।
उत्तर – (d) अभिकथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।

6. अभिकथन (A) : जब तक सीमान्त उपयोगिता सकारात्मक है तब तक कुल उपयोगिता बढती है।
कारण (R) : सीमान्त उपयोगिता कूल उपयोगिता की ढलान है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

7. अभिकथन (A) : औसत लागत वक्र U आकार का होता है।
तर्क (R) : परिवर्ती अनुपात का नियम अल्पकाल में लागू होता है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।

8. अभिकथन (A) : गिफ्फन वस्तुएं मांग के नियम का अपवाद होती है।
तर्क (R) : पूर्ति वक्र का ढलान धनात्मक होता है।
उत्तर – (b) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

9. अभिकथन (A) : हस्तांतरण आय को राष्ट्रीय आय के आंकलन में शामिल नहीं किया जाता है।
कारण (R) : स्थांतरण आय को साधन सेवाएँ प्रदान करने के लिए पुरस्कार के रूप में अर्जित नहीं की जाती।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

10. अभिकथन (A) : नोट और सिक्के सरकार के अधिकार से समर्पित धन है।
कारण (R) : नोट और सिक्के वैध मुद्रा है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

11. अभिकथन (A) : छात्रवृति एक राजस्व व्यय है।
कारण (R) : छात्रवृत्ति से किसी भी प्रकार की संपत्ति का निर्माण नहीं होता है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

12. अभिकथन (A) : किसी फर्म द्वारा निगम कर का भुगतान राष्ट्रीय आय के अनुमान में शामिल नही होता है।
कारण (R) : निगम कर फर्मों को एक हस्तांतरण भुगतान है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

13. अभिकथन (A) : जब व्यापार सन्तुलन घाटे में होता है, तो भुगतान संतुलन घाटे में नहीं होता है।
कारण (R) : व्यापार सन्तुलन BOP खाते का ही हिस्सा है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

14. अभिकथन (A) : विदेश से प्राप्त साधन आय भारत की घरेलू साधन आय का हिस्सा नही है।
कारण (R) : यह भारत की घरेलु सीमा में उत्पन्न नहीं होती है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही है और कारण (R) अभिकथन (A) को सही व्याख्या है।

15. अभिकथन (A) : एकत्रीकरण केवल समष्टि अर्थशास्त्र में शामिल है।
कारण (R) : किसी फर्म का उत्पादन / आगत समष्टि चर नहीं है।
उत्तर – (d) अभिकथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।

16. अभिकथन (A) : GDP के आकलन में निर्यात को भी शामिल किया जाता है।
कारण (R) : छात्रो को दी गई छात्रवृति को GDP के आकलन में शामिल किया जाता है।
उत्तर – (c) अभिकथन (A) सही है लेकिन कारण (R) गलत है।

17. अभिकथन (A) : M3, M1 की तुलना में विस्तृत धारणा है।
तर्क (R) : केन्द्रीय बैंक मुद्रा की पूर्ति को नियंत्रित करता है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।

18. अभिकथन (A) : बैंक दर मौद्रिक नीति का एक भाग है।
तर्क (R) : कर मौद्रिक नीति का एक भाग है।
उत्तर – (c) अभिकथन (A) सत्य है परन्तु तर्क (R) असत्य है।

 


 

Subjective Questions

1. कर किसे कहते है? कर की विशेषताएं बताएं।
उत्तर – कर सरकार द्वारा वैधानिक रूप से ग्रहस्थों तथा उत्पादकों पर लगाया गया एक आवश्यक भुगतान है जो मुख्यतः प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों में वर्गीकृत किया गया है।
इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है:
(i) कर एक अनिवार्य भुगतान है जिसका भुगतान करदाता को अवश्य करना पड़ता है।
(ii) सरकार द्वारा कर से प्राप्त आय का प्रयोग सार्वजनिक हित के कार्यों में किया जाता है।
(iii) सरकार करदाता को कर के बदले में प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करने का कोई आश्वासन नही देती है।

2. पैमाने के समान प्रतिफल को स्पष्ट करे।
उत्तर – पैमाने के समान प्रतिफल, उत्पादन की उस स्थिति को प्रकट करता है, जिसमें यदि कारकों को निश्चित अनुपात में बढाया जाएगा तो उत्पादन में उसी अनुपात में वृद्धि होगी।

3. उत्पादन फलन की धारणा की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – उत्पादन फलन, भौतिक आगतों तथा भौतिक उत्पादन के बीच कार्यात्मक संबंध का अध्ययन करता है। इसमें केवल भौतिक आगतों तथा उत्पादन को ध्यान में रखा जाता है उनके बाजार मुल्य को नहीं।

4. गैर कीमत प्रतियोगिता का अर्थ उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर – उत्पादन गैर मुल्य प्रतिस्पर्धा एक ऐसी रणनीति है जिसका तात्पर्य कम कीमत के बजाय बेहतर माल की गुणवता और उत्कृष्ट सेवा प्रदान करके ग्राहको को आकर्षित करना और बिक्री बढाना है।

5. मांग के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – अन्य बाते समान रहने पर किसी वस्तु की अपनी कीमत बढ़ने पर उसकी मांग कम हो जाती है तथा अपनी कीमत कम होने पर उसकी मांग बढ़ जाती है।

6. पूर्ति के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – अन्य बाते समान रहने पर किसी वस्तु की अपनी कीमत बढ़ने पर उसकी पुर्ति बढ़ जाती है तथा कीमत कम होने पर पुर्ति भी कम हो जाती है।

7. अधिमांग क्या होती है?
उत्तर – अधिमांग वह स्थिति है जिसमें समग्र मांग अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार के लिए आवश्यक समग्र पूर्ति से अधिक होती है।

8. मांग की कीमत की लोच किसे कहते हैं? इसे प्रभावित करने वाले किन्हीं तीन तत्वों की व्याख्या करें?
उत्तर – मांग की कीमत, लोच कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन तथा मांग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन का अनुपात है। इसे प्रभावित करने वाले घटक है: वस्तु की प्रकृति, उपभोक्ता की आय और कीमत स्तर।

9. माँग का क्या अर्थ है? वस्तु की माँग को प्रभावित करने वाले तीन तत्व कौन-से हैं?
उत्तर – मांग का अर्थ वस्तु को खरीदने की इच्छा, उसे संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त धन तथा धन को खर्च करने की तत्परता है। इसे प्रभावित करने वाले घटक इस प्रकार है: वस्तु की कीमत, उपभोक्ता की आय, जनसंख्या।

10. पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत एक फर्म की भूमिका की व्याख्या कीजिए?
उत्तर – पूर्ण प्रतियोगी बाजार की फर्म उस बिन्दु पर अपना उत्पादन निर्धारित करती है जहां सीमांत लागत और सीमांत आय आपस में बराबर हो, तथा सीमांत लागत वक्र नीचे से ऊपर की ओर उठता हुआ हो, क्योकि फर्म यहां कीमत ग्राही होती है इसलिए वह कीमत स्वीकार करती है जो उधोग में बाजार शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है।

11. आर्थिक समस्या से क्या अभिप्राय है? यह क्यों उत्पन्न होती हैं?
उत्तर – आर्थिक समस्या का संबधं संसाधनों के बटवारे से है जिसकी उत्पति सीमित साधनों तथा असीमित आवश्यकताओं के कारण होती है। आर्थिक समस्या इसलिए उत्पन्न होती है क्योकि आवश्यकताओं की तुलना में संसाधन सीमित होते है और इन संसाधनों के वैकल्पिक उपयोग होते है।

12. दोहरी गणना की समस्या से क्या अभिप्राय है? इससे कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर – उत्पाद विधि द्वारा राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने के संबंध में दोहरी गणना की समस्या उत्पन्न हो सकती हे। दोहरी गणना से अभिप्राय किसी वस्तु के मुल्य की गणना एक से अधिक बार होना है। इस समस्या से बचने के लिए विभिन्न फर्मों के उत्पादन को जोड़े बिना, मुल्य वृद्धि को जोड़ कर इससे बचा जा सकता है।

13. बाजार मांग वक्र को परिभाषित करे।
उत्तर – बाजार मांग वक्र वह वक्र है जो किसी वस्तु की विभिन्न कीमतों पर बाजार के सभी उपभोक्ताओं द्वारा मांगी गई मात्राओं के जोड़ को प्रकट करता है। बाजार मांग वक्र व्यक्तिगत मांग वक्र का समस्तर जोड़ है।

14. अवसर लागत की धारणा को स्पष्ट करें।
उत्तर – अवसर लागत की धारणा लागत की आधुनिक धारणा है। किसी साधन की अवसर लागत से अभिप्राय दूसरे सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक प्रयोग में उसके मूल्य से है। अतः किसी साधन की अवसर लागत वह लागत है जिसका उस साधन को किसी एक कार्य में कार्यरत होने के फलस्वरुप दुसरे वैकल्पिक कार्य को नहीं कर पाने के कारण त्याग करना पड़ता है।

15. उत्पादन संभावना वक्र क्या हैं? एक तालिका तथा चित्र द्वारा स्पष्ट करें।
उत्तर – उत्पादन सम्भावना वक्र वह वक्र है जो दिए हुए साधनों तथा तकनीकों में दो वस्तुओं के उत्पादनों की वैकल्पिक सम्भावनाओं को प्रकट करता है।

16. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार के अंतर्गत आगम वक्र की व्याख्या करें।
उत्तर – पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की वह स्थिति है जिसमें किसी समरूप वस्तु के बहुत से क्रेता तथा विक्रेता होते है। पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति में फर्म केवल बाजार कीमत पर ही अपने उत्पादन का विक्रय कर सकती है। पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति में फर्म की प्रत्येक इकाई की विक्रय कीमत समान होती है। परिणामस्वरुप उसका सीमांत तथा औसत आगम बराबर होता है।

17. ‘खुले बाजार की क्रियाओं’ से क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर – खुले बाजार की क्रियाओं से अभिप्राय केन्द्रीय बैंक द्वारा प्रतिभुतियों की खुले बाजार में बेचना तथा खरीदना हैं। प्रतिभुतियों को बेचने से केन्द्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मौजुद नकद कोषो को अपनी ओर खीच लेता है। ये नकद शेष, उच्च बलयुक्त मुद्रा होती है जिसके आधार पर व्यापारिक बैंक साख का निर्माण करते है।

18. ‘से’ के बाजार के नियम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – समग्र पूर्ति समग्र मांग के बराबर होती है। ‘से’ का बाजार नियम प्रो. से. के द्वारा दिया गया था, जिसके अनुसार ‘पूर्ति स्वयं अपनी मांग का निर्माण करती है। अतः अर्थव्यवस्था में समग्र पूर्ति का समग्र मांग के बराबर होना अनिवार्य है।

19. बचत फलन की अवधारणा को समझाइये।
उत्तर – आय में से उपभोग घटाने के बाद जो शेष बचता है उसे बचत कहते है तथा जो बचत और आप के संबंध को प्रकट करता है उसे बचत का फलन है। बचत आय पर निर्भर करती है क्योंकि आय के बढ़ने पर बचत बढ़ती है और कम होने पर कम होती है। बचत में वृद्धि की दर समान्यतः आय में वृद्धि की दर से अधिक होती है।

20. मांग से विस्तार की रेखाचित्र द्वारा व्याख्या करे।
उत्तर – अन्य बाते समान रहने पर जब किसी वस्तु की अपनी कीमत में कमी होने के फलस्वरूप उसकी मांग अधिक हो जाती है तो इसे मांग का विस्तार कहा जाता है।

21. भुगतान शेष में अंसतुलन दूर करने के उपाय लिखे।
उत्तर – असंतुलन उस स्थिति को कहते है जिसमें भुगतान शेष या तो बचत वाला या घाटे वाला होता है।
इसे ठीक करने के उपाय इस प्रकार है : आयातों को हतोत्साहित करना, निर्यातों को प्रोत्साहित करना, मुद्रा विस्फीति, अवमूल्यन

22. रेखाचित्रों की सहायता से पूर्ति में विस्तार तथा पूर्ति में वृद्धि में अन्तर बताईए।
उत्तर –

23. भुगतान शेष से आप क्या समझते हैं? इसके मदों के नाम लिखों?
उत्तर – भुगतान शेष को संबंध किसी देश के शेष विश्व के साथ हुए सभी आर्थिक लेन-देन के लेखांकन के रिकार्ड से है। प्रत्येक देश विश्व के अन्य देशों के साथ आर्थिक लेन-देन करता है। इस लेन-देन के फलस्वरुप, उसे अन्य देशों से प्राप्तियां होती है तथा उसे अन्य देशो को भुगतान भी करने पडते है। भुगतान शेष इन्ही प्राप्तियों एवं भुगतानों का विवरण होता है। इसकी तीन मदें निम्नलिखित है: दृश्य मदें, अदृश्य मदें, पुंजी अंतरण।

24. उपभोक्ता बजट की अवधारणा को सन्क्षेप में समझाइए।
उत्तर – उपभोक्ता बजट से अभिप्राय उपभोक्ता की निर्धारित आय से है, जिसे इसे बजट रेखा द्वारा भी परिभाषित किया जा सकता हैं जो दो वस्तुओं के सेट के विभिन्न संयोगों को प्रकट करती है जो एक उपभोक्ता अपनी दी हुई आय तथा वस्तुओं की दी हुई कीमत पर खरीद सकता है। इसे कीमत रेखा भी कहते है क्योकि यह वस्तु-x तथा वस्तु-y के बीच कीमत अनुपात को प्रकट करती है।

25. बंधी लागत की धारणा को स्पष्ट करे।
उत्तर – बंधी लागत एक ऐसा व्यय है जो बिक्री या उत्पादन की मात्रा बढ़ने या घटने पर नहीं बदलता है। बंधी लागत वे खर्च हैं जो एक व्यवसाय द्वारा किए जाते हैं जो उत्पादित वस्तुओं या प्रदान की गई सेवाओं की मात्रा के साथ नहीं बदलते हैं। ये लागत सीधे तौर पर किसी उत्पाद के निर्माण या सेवा प्रदान करने से जुड़ी नहीं है।

26. अधि मांग से क्या अभिप्राय है? इसे किस प्रकार नियमित किया जाता हैं? कोई दो उपाय बताएँ?
उत्तर – अधि मांग वह स्थिति है जिसमें समग्र मांग पूर्ण रोजगार के लिए आवश्यक समग्र पूर्ति से अधिक होती है। अधि मांग के फलस्वरुप अर्थव्यवस्था में मुद्रा-स्फीति या कीमतों में वृद्धि की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसे नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जाते हैः करों में वृद्धि करके, सार्वजनिक व्यय में कमी करके।

27. पूर्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर – किसी वस्तु की पूर्ति से अभिप्राय वस्तु की उन मात्राओं से है जिन्हे एक विक्रेता विभिन्न सम्भव कीमतों पर निश्चित समय में बेचने के लिए तैयार होता है।
यह दो प्रकार की होती है: व्यक्तिगत पूर्ति व बाजार पूर्ति।

28. सामान्य वस्तुओं और घटिया वस्तुओं के बीच अन्तर करें।
उत्तर – मांग के दृष्टिकोण के आधार पर वस्तुओं को सामान्य वस्तु एवं घटिया वस्तु के रूप में वर्गीकृत किया गया है। जिनकी परिभाषा इस प्रकार है:
• सामान्य वस्तुएं – सामान्य वस्तुएं वे वस्तुएं है जिनका आय प्रभाव धनात्मक होता है। सामान्य वस्तुओं के संबंध में उपभोक्ता की आय और सामान्य वस्तुओं की मांग में प्रत्यक्ष होता है।
• घटिया वस्तुएं – घटिया वस्तुएं वे वस्तुएं है जिनकी मांग आय पर घटती है और आय घटने पर बढती है अर्थात जिनका आय प्रभाव ऋणात्मक होता है।

29. आर्थिक समस्या के कौन-2 से कारण है?
उत्तर – आर्थिक समस्या के कारण :
(i) असीमित आवश्यकताएं – मनुष्य की आवश्यकता असीमित है और प्रतिदिन ये आवश्यकताएं बढ़ती जा रही है।
(ii) सीमित साधन – असीमित आवश्यकताओं को पूरा करने वाले साधन सीमित होते है अर्थात् दुर्लभ।
(iii) वैकल्पिक उपयोग – साधन सीमित होने के साथ-साथ इनका वैकल्पिक उपयोग होता है। अतः मनुष्य को चुनाव करना होता है। चुनाव की समस्या ही आर्थिक समस्या कहलाती हैं।

30. उपभोग फलन क्या होता है? रेखाचित्र द्वारा समझाइये।
उत्तर – उपभोग फलन वह अनुसूचि है जो आय के विभिन्न स्तरो पर उपभोग की मात्रा को बताती है। उपभोग से अभिप्राय किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय में उपभोग पर किए जाने वाले समग्र व्यय से है जो अपनी आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से सन्तुष्ट करने के लिए लोगो द्वारा वस्तुओं तथा सेवाओं को खरीदने पर खर्च की जाने वाली मुद्रा की मात्रा को उपभोग व्यय कहा जाता है। C = f(Y)

31. अधिमान वक्रो की सहायता से उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या करें।
उत्तर – एक उपभोक्ता उस समय संतुलन में होता है जब वह अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है। संतुलन की शर्ते :
(i) सीमांत प्रतिस्थापन की दर (MRSxy) = Px/Py (बजट रेखा का ढलान)
(ii) इस अवस्था मे तटस्थता वक्र मूल बिन्दु की ओर उन्नोत्तर होते हैं।

32. बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद किसे कहते हैं? समुच्चय सहित बताए।
उत्तर – किसी देश की घरेलु सीमा में एक लेखा वर्ष में सभी उत्पादकों द्वारा जितनी भी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है जिसमें मुल्यह्रास भी शामिल होता है उनकी बाजार कीमत के जोड़ को बाजार कीमत पर सकल घरेलु उत्पाद कहा जाता है।
बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNPmp) = बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDPmp) + विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय

33. बजट घाटा क्या होता है? इसे कैसे पूरा किया जा सकता है?
उत्तर – बजट घाटे से अभिप्राय उस स्थिति से है जिसमें सरकार का बजट व्यय, सरकार की बजट प्राप्तियों से अधिक होता है। बजटिय घाटा वह स्थिति है जिसमें सरकारी व्यय > सरकारी प्राप्तियां।
यह तीन प्रकार का होता है :
(i) राजस्व घाटा, (ii) राजकोषीय घाटा, (iii) प्राथमिक घाटा
प्राथमिक घाटे को पुरा करने के उपाय इस प्रकार : सरकारी व्यय को कम करके और सरकारी प्राप्तियों में वृद्धि करके।

34. बैंक दर से क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर – बैंक दर ब्याज की वह न्युनतम दर है जिस पर देश का केन्द्रीय बैंक अंतिम ऋणदाता होने के कारण वाणिज्यिक बैंको को ऋण देने के लिए तैयार होता है। बैंक दर बढने से ब्याज दर बढती है तथा ऋण मंहगा होता है। इसके फलस्वरुप साख की मांग कम हो जाती है। इसके विपरीत, बैंक दर कम करने पर व्यापारिक बैंको द्वारा अपने उधारकर्ताओं से लिए जाने वाले ब्याज की बाजार दर कम हो जाती है अर्थात साख सस्ती हो जाती है। मुद्रा स्फीति के समय केन्द्रिय बैंक मंहगी साख नीति अपनाता है तथा अवस्फीति की स्थिति मे सस्ती साख नीति अपनाता है।

35. स्टॉक तथा प्रवाह में अंतर स्पष्ट करें?
उत्तर : स्टॉक – यह समय के एक निश्चित बिन्दु पर मापी जाने वाली मात्रा है। मान लिजिए आपके बैंक खाते में 1 जनवरी 2016 को 1000 रु हो सकते है। 10 जनवरी 2016 को आपके खाते में 5000 रु हो सकते है। इन सभी मात्राओं को स्टॉक कहा जाता है। पूंजी तथा मुद्रा का परिमाण स्टॉक के उल्लेखनीय उदाहरण है।
• प्रवाह – यह समय की एक विशिष्ट अवधि में मापी जाने वाली मात्रा है। आप शायद 150 रु प्रतिमाह जेब खर्च प्राप्त करते है, आप शायद 5 रु प्रतिदिन कैंटिन में खर्च करते है। ये सब मात्राएं ‘प्रवाह’ कहलाती हैं। आय, व्यय, उत्पादन तथा ब्याज भी प्रवाह के महत्वपूर्ण उदाहरण है।

36. पूर्ति में होने वाले परिवर्तन की सन्तुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर – जब मांग स्थिर रहती है तो आपूर्ति में एक सकारात्मक परिवर्तन आपूर्ति वक्र को दाईं ओर स्थानांतरित कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप एक प्रतिच्छेदन होता है जिससे कम कीमतें और अधिक मात्रा प्राप्त होती है। दूसरी ओर, आपूर्ति में नकारात्मक परिवर्तन, वक्र को बाईं ओर स्थानांतरित कर देता है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं और मात्रा घट जाती है।

37. केन्द्रीय बैंक के चार मुख्य कार्य बताइये।
उत्तर – केन्द्रीय बैंक देश की समस्त बैंकिग प्रणाली का सर्वोच्च बैंक है जो देश की संपूर्ण मौद्रिक तथा बैंकिग प्रणाली को नियंत्रित करता है।
इसके मख्य कार्य निम्नलिखित है :
(i) केन्द्रीय बैंक नोट जारी करता है।
(ii) केन्द्रीय बैंक सरकार के बैंकर का कार्य करता है।
(iii) केन्द्रीय बैंक देश के अन्य बैंको के लिए बैंकर का कार्य करता है।
(iv) बैंको का बैंक होने के कारण, केन्द्रीय बैंक, व्यापारिक बैंको का निरिक्षण का कार्य करता है।

38. कुल लागत, औसत लागत तथा सीमान्त लागत की धारणाओ की व्याख्या करे।
उत्तर : कुल लागत – किसी वस्तु की एक निश्चितम मात्रा का उत्पादन करने के लिए जो कुल धन व्यय करना पड़ता है, उसे कुल लागत कहते है।
• औसत लागत – किसी उत्पाद की प्रति इकाई लागत को औसत लागत कहा जाता है।
• सीमांत लागत – किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने से कुल लागत में जो अंतर आता है उसे सीमांत लागत कहते है।

39. अभावी मांग किसे कहते हैं? राजकोषीय उपायों के द्वारा किस प्रकार अभावी मांग को दूर किया जा सकता है ?
उत्तर – अभावी मांग वह स्थिति है जिसमे समग्र मांग (AD) अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार के लिए आवश्यक समग्र पूर्ति (AS) से कम होती है।
अभावी मांग को ठीक करने के लिए राजकोषीय नीति के उपाय :
(i) करो में कमी
(ii) सार्वजनिक व्यय में वृद्धि
(iii) घाटे की वित्त व्यवस्था में वृद्धि
(iv) सार्वजनिक ऋण में कमी

40. कुल आगम, सीमांत आगम और औसत आगम से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : कुल आगम – कुल आगम से अभिप्राय हैं कि एक उत्पादक को अपना कुल उत्पादन बेचकर प्राप्त होने वाली मौद्रिक प्राप्तियां।
TR = AR × Q
• सीमांत आगम – सीमांत आगम से अभिप्राय किसी वस्तु की एक ईकाई अधिक बेचने से कुल आगम में होने वाला परिवर्तन।
MR = TRn – TRn-1 = ∆TR/∆Q
• औसत आगम – औसत आगम से अभिप्राय उत्पादक को प्रति ईकाई उत्पादन बेचकर प्राप्त होने वाली मौदिक प्राप्तियां।
AR = TR/Q

41. पूर्व प्रतियोगी बाजार में अल्पकालीन संतुलन की स्थिति में लाभ की विभिन्न सम्भावनाओ की व्याख्या करे।
उत्तर – संतुलन की स्थिति में यह आवश्यक नही है कि फर्म को असमान्य लाभ अवश्य ही मिल रहे हो। इस अवस्था में तीन स्थितियां हो सकती है :
(i) फर्म को असामान्य लाभ मिल सकते है क्योंकि अल्पकाल में नई फर्मे उधोग में प्रवेश नही कर सकती है।
(ii) फर्म को सामान्य लाभ मिल सकते है।
(iii) फर्म को न्यूनतम हानि भी उठानी पड़ सकती है क्योंकि अल्पकाल में कीमत कम होने पर भी फर्म हमेशा के लिये उत्पादन करना बंद नहीं कर देगी। यदि वह केवल थोड़े समय के लिये उत्पादन बंद करेगी तो भी उसे स्थिर लागतों की हानि उठानी पड़ेगी, यह फर्म की न्यूनतम हानि होगी।

42. कुल उत्पादन और सीमान्त उत्पादन के बीच के संबंध को तालिका एवं रेखाचित्र द्वारा समझाए।
उत्तर : कुल उत्पादन – एक निश्चित समय में उत्पादित की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की कुल मात्रा को कुल उत्पादन कहा जाता है।
• सीमांत उत्पादन – परिवर्तनशील कारक की एक इकाई का कम या अधिक प्रयोग करने से कुल उत्पाद में जो अंतर आता है उसे सीमांत उत्पादन कहा जाता है।

43. मध्यवर्ती वस्तु की अवधारणा को समझाइये।
उत्तर – मध्यवर्ती वस्तुओं को वे वस्तुएं कहा जाता है जिनका उपयोग उद्योग द्वारा वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन के लिए किया जाता है। इन वस्तुओं को उत्पादक वस्तुएं भी कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, मध्यवर्ती वस्तुओं का उपयोग अंतिम वस्तुओं या उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन के लिए किया जाता है। मध्यवर्ती सामान- जैसे नमक भी तैयार उत्पाद हो सकते हैं, क्योंकि इसका उपभोक्ताओं द्वारा सीधे उपभोग किया जाता है और उत्पादकों द्वारा अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है।

44. व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय का आकलन करते समय बरती जाने वाली तीन सावधानियां बताइये।
उत्तर – व्यय विधि वह विधि है जिसके द्वारा एक लेखा वर्ष में बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद पर किए गए अंतिम व्यय को मापा जाता है। यह अंतिम व्यय बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद के बराबर होता है।
व्यय विधि का प्रयोग करते समय निम्नलिखित सावधनियां आवश्यक है :
(i) सकल व्यय का माप करते समय, दोहरी गणना से बचने के लिए, केवल अंतिम व्यय को ही उसमें शामिल किया जाना चाहिए।
(ii) राष्ट्रीय आय की गणना करते समय मध्यवर्ती वस्तु के व्यय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
(iii) सरकार द्वारा हस्तांतरण भुगतान को शामिल नहीं किया जाता।

45. धन के निकास को समझाइये।
उत्तर – वस्तुओं के आदान प्रदान को सुविधाजनक बनाने की आवश्यकता के कारण मुद्रा का विकास हुआ। दुनिया एक ऐसे चरण से गुजरी जब पैसे का उपयोग नहीं किया गया था और वस्तु विनिमय नामक प्रणाली में वस्तुओं का एक दूसरे के लिए सीधे आदान प्रदान किया जाता था। वस्तु विनिमय की असुविधाओं और कमियों के कारण धीरे धीरे विनिमय के माध्यम का उपयोग शुरू हो गया। सभी प्रकार की वस्तुओं का उपयोग विनिमय के माध्यम के रूप में किया गया है। इन्हें कमोडिटी मनी कहा जाता है। कमोडिटी मनी की अपर्याप्तता के कारण धातु मुद्रा, यानी सोना और चांदी का विकास हुआ। धातुओं का उपयोग करते समय एकरूपता की कमी के कारण सरकार ने सिक्के ढालने का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इससे अंततः कागजी मुद्रा बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

46. निवेश गुणक से क्या अभिप्राय है? उपयुक्त उदाहरण द्वारा समझाइये।
उत्तर – गुणक की धारणा केन्ज की आय, उत्पादन तथा रोजगार सिद्धान्त की एक महत्वपूर्ण धारणा है। इस धारणा का संबंध निवेश में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरूप आय में होने वाले परिवर्तन से है। यह एक आर्थिक तथ्य है कि जब निवेश में वृद्धि होती है तो आय में उतनी वृद्धि नही होती जितनी कि निवेश में वृद्धि हुई है बल्कि आय में निवेश की वृद्धि की तुलना में कई गुना अधिक वृद्धि होती है। जितने गुना वृद्धि अधिक होती है उसे गुणक कहते है। केन्ज का गुणक सिद्धांत निवेश तथा आय में संबंध स्थापित करता है, इसलिए इसे निवेश गुणक कहते है। गुणक की धारणा निवेश में प्रारंभिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप आय में होने वाले अंतिम परिवर्तन के संबंध को व्यक्त करती है। यह निवेश में होने वाले परिवर्तन के कारण आय में होने वाले परिवर्तन का अनुपात होता है।

47. कारक के प्रतिफल से क्या अभिप्राय है? समझाये।
उत्तर – कारक के प्रतिफल के नियम के अनुसार, अन्य कारकों को स्थिर रखने और जब परिवर्तनीय कारक में वृद्धि होती है तो कुल उत्पाद पहले बढ़ती दर से बढ़ता है, फिर कम दर से बढ़ता है और अंततः घट जाता है। कारक के प्रतिफल का नियम कुल उत्पादन के व्यवहार से संबंधित होता है। यह एक अल्पकालिक अवधारणा है।
कारक के प्रतिफल के तीन पहलू हैं :
(i) कारक के बढ़ता प्रतिफल
(ii) कारक के लगातार प्रतिफल
(iii) कारक के घटते प्रतिफल।

48. सरकारी बजट क्या है? इसके मुख्य उदेश्य बताइये।
उत्तर – बजट सरकार की वार्षिक आय तथा व्यय का ऐसा ब्योरा है जो अगले वित वर्ष अप्रैल 1 से मार्च 31 तक के अनुमानों को प्रकट करता। इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों तथा अनुपलब्धियों संबंधी रिपोर्ट सम्मिलित होती है। अधिकतर बजट के उस भाग पर विशेष ध्यान दिया जाता है जिसमें आने वाले वर्ष में सरकार की अनुमानित प्राप्तियों (आय) तथा व्यय का ब्योरा होता है।
बजट के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है :
(i) आय तथा संपति का पुनः वितरण करने में सहायता होती है।
(ii) साधनों का पुनः बंटवारा करने में सहायता होती है।
(iii) अर्थव्यवस्था में स्थिरता स्थापित करने में सहायक।
(iv) सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंध करने में सहायक।

49. पूर्ण प्रतियोगी बाजार किसे कहते है? इसकी कोई दो विशेषताए बताइए।
उत्तर – पूर्ण प्रतियोगिता बाजार उस बाजार को कहते है जिसमें किसी समरूप वस्तु के बहुत से विक्रेता होते है तथा वस्तु की कीमत उधोग द्वारा निधारित होती है। इस बाजार में सभी फर्मे एक जैसी वस्तुएं बेचती है और बाजार में वस्तु की एक ही कीमत प्रचलित होती हैं।
इसकी विशेषताएं निम्नलिखित है :
(i) इस बाजार में फर्मे स्वतंत्र रूप से प्रवेश कर सकती है और पुरानी फर्मे उस उधोग को छोड़ कर जा सकती है।
(ii) इस बाजार में वस्तु बाजार तथा साधन बाजार में साधनों में पूर्ण गतिशीलता पाई जाती है।

50. नगद निधि अनुपात एवं वैधानिक तरलता अनुपात की व्याख्या करें।
उत्तर : नकद निधि अनुपात – इसका अर्थ बैंक की कुल जमाओ का वह न्युनतम अनुपात है जो उसे केन्द्रीय बैंक के पास जमा रखना पड़ता है। व्यापारिक बैंको को कानूनी तौर पर अपनी जमाओं का एक निश्चित प्रतिशत केंन्द्रीय बैंक के पास नकद निधि के रूप में रखना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि न्युनतम निधि अनुपात 10 प्रतिशत है और किसी बैंक की कुल जमा 100 करोड़ है तो इस बैंक का 10 करोड़ केन्द्रीय बैंक के पास रखने होगे।
• वैधानिक तरलता अनुपात – प्रत्येक बैंक को अपनी परिसंपतियों के एक निश्चित प्रतिशत को अपने पास नकद रूप में या अन्य तरल परिसंपतियों के रूप में कानूनी तौर पर रखना पड़ता है जिसे वैधानिक तरलता अनुपात कहते है। यदि वैधानिक तरलता अनुपात 20% है, तो बैंक 2 लाख रुपये तरल संपत्ति में रखेगा और शेष 8 लाख रुपये ही ऋण दे सकेगा।

51. ऐच्छिक बेरोजगारी तथा अनैच्छिक बेरोजगारी की व्याख्या करे।
उत्तर : ऐच्छिक बेरोजगारी – ऐच्छिक बेरोजगारी से अभिप्राय उस स्थिति से है जिसमें एक श्रमिक रोजगार उपलब्ध होने पर भी, मजदूरी की वर्तमान दर पर काम करने के लिए तैयार नही होता है। उदाहरण के लिए, एक डाक्टर का बाजार में प्रचलित वेतन 10 हजार रूपये प्रतिमाह है परंतु वह इस वेतन पर काम करने लिए तैयार नहीं है, इसे ऐच्छिक बेरोजगारी कहा जाएगा। इस बेरोजगारी को समग्र अनुमान में शामिल नहीं किया जाता। किसी देश मे ऐच्छिक बेरोजगारी के होते हुए भी पूर्ण रोजगार हो सकता है।
• अनैच्छिक बेरोजगारी – अनैच्छिक बेरोजगारी यह बेरोजगारी की वह स्थिति है जिसमें रोजगार के अवसर के अभाव में बेरोजगार रहना पड़ता है, यद्यपि वे मजदुरी की वर्तमान दर पर काम करने तैयार होते है। अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के समग्र अनुमान में अनैच्छिक बेरोजगारी को शामिल किया जाता।

52. पूर्ण रोजगार एवं अल्प रोजगार संतुलन मे अंतर बताए।
उत्तर : पूर्ण रोजगार – पूर्ण रोजगार उस स्थिति को व्यक्त करता है जिसमें समग्र मांग, समग्र पूर्ति के बराबर हो और वे सभी जो काम करने के योग्य तथा काम करने के इच्छुक है, वर्तमान मजदुरी की दर पर काम प्राप्त कर लेते है। पूर्ण रोजगार संतुलन एक स्थिर संतुलन है जहा वास्तविक उत्पादन अधिकतम बिंदु पर पहुंच जाता है। पूर्ण रोजगार संतुलन से आगे बढ़ने की अवस्था में कीमत स्तर में वृद्धि होती है।
• अल्प रोजगार संतुलन – अल्प रोजगार संतुलन वह स्थिति हे जिसमें समग्र मांग समग्र पूर्ति के बराबर तो होती है लेकिन वे सभी जो काम करने के योग्य एवं इच्छुक है वर्तमान मजदुरी दर पर काम प्राप्त नहीं कर पाते है अल्प रोजगार संतुलन एक स्थिर संतुलन नही है और यहां वास्तविक उत्पादन उच्चतम बिंदु पर नही पहुंच पाता। अल्प रोजगार संतुलन से आगे बढ़ने पर कीमत स्तर में भी वृद्धि नहीं होती है।

53. निवेश गुणक से क्या अभिप्राय है? उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर – निवेश गुणक नई परियोजनाओं के रूप में सरकार द्वारा किए गए निवेश में वृद्धि के परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था की कुल आय में वृद्धि को संदर्भित करता है। निवेश गुणक का आकार किसी अर्थव्यवस्था में खर्च (जिसे उपभोग करने की सीमांत प्रवृत्ति के रूप में जाना जाता है) या बचत (बचत करने की सीमांत प्रवृत्ति के रूप में जाना जाता है) के क्षेत्रों में परिवारों के निर्णयों द्वारा निर्धारित किया जाता है।
गुणक को निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया जा सकता है :
Κ = ΔΥ / ΔΙ

54. मौद्रिक नीति के मुख्य उपायों की व्याख्या करें?
उत्तर – मौद्रिक नीति या साख नियत्रंण से अभिप्राय देश के केन्द्रीय बैंक द्वारा निश्चित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए साख के संकुचन तथा साख के विस्तार का नियंत्रण करना है। एक देश के केंन्द्रीय बैंक की मौद्रिक नीति के मुख्य उपकरण अथवा उपाय इस प्रकार हैं: आरबीआई की मौद्रिक नीति (साख नीति) में नीचे दिए गए चार्ट में दिए गए दो उपकरण शामिल हैं:
मौद्रिक उपाय
(i) मात्रात्मक माप – बैंक रेट, नकद निधि अनुपात, वैधानिक तरलता अनुपात
(ii) गुणात्मक माप – सीमांत आवश्यकताएँ, चयनात्मक साख नियंत्रण, नैतिक समाधान

55. करेतर राजस्व प्राप्तियां कौन-सी होती है ?
उत्तर – करेतर राजस्व प्राप्तियां सरकार की वे प्राप्तियां है जो करों को छोड़ कर अन्य स्त्रोतों जैसे ब्याज, लाभाशं, आदि से प्राप्त होती है।
कुछ करेतर राजस्व प्राप्तियां निम्नलिखित है :
(i) फीस लाइसेंस तथा परमिट
(ii) एसचीट
(iii) विशेष आंकन
(iv) जुर्माना एवं जब्ती
(v) सरकारी उद्यमों से आय
(vi) उपहार तथा अनुदान

56. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था किसे कहते है? उदाहरण सहित समझाए।
उत्तर – पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से अभिप्राय उस अर्थव्यवस्था से है जिसमें आर्थिक क्रियाओं को बाजार शाक्तियों की स्वतंत्र अंत:क्रिया पर छोड़ दिया जाता है। उत्पादक उन वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करने में स्वतंत्र है जिनकी मांग अधिक है ताकि वे अपने लाभ अधिकतम कर सके अर्थात इस पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन लाभ कमाने के उद्देश्य से किया जाता है।
इस अर्थव्यवस्था के मुख्य लक्षण इस प्रकार है :
(i) निजी संपति की स्वतंत्रता होती है।
(ii) कीमत सयंत्र
(iii) उद्यम की स्वतंत्रता
(iv) लाभ प्रेरणा

57. आपूर्ति की कीमत लोच को परिभाषित करे। आपूर्ति की लोच की निम्नलिखित स्थितियों में से प्रत्येक के लिए आपूर्ति वक्र बनाए।
(a) आपूर्ति की लोच > 1
(b) आपूर्ति की लोच < 1
(c) आपूर्ति की लोच = 1
उत्तर – पूर्ति की कीमत लोच किसी वस्तु की कीमत में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरुप उसकी पूर्ति में होने वाले परिवर्तन का माप है।
(a) पूर्ति की लोच > 1 : जब किसी वस्तु की पूर्ति में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन से अधिक होता है इस दशा में पूर्ति की लोच इकाई से अधिक होती है।
(b) पूर्ति की लोच < 1 : जब किसी वस्तु की पूर्ति में प्रतिशत परिवर्तन कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन से कम होता है तो इस दशा में पूर्ति की लोच इकाई से कम होती है।
(c) पूर्ति की लोच = 1 : जब किसी वस्तु की पूर्ति में परिवर्तन उसी अनुपात में होता है जिस अनुपात में उसकी कीमत में परिवर्तन हुआ हैं तो उस वस्तु की पूर्ति को इकाई लोच कहते हैं।

58. बाजार अर्थव्यवस्था तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था में अन्तर स्पष्ट करे।
उत्तर : बाजार अर्थव्यवस्था (पूंजीवादी अर्थव्यवस्था) –
(i) एक ऐसी प्रणाली है जहां निजी संस्थाएं उत्पादन के कारकों जैसे श्रम, प्राकृतिक संसाधन या पूंजीगत सामान को नियंत्रित करती हैं।
(ii) पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में, मांग और आपूर्ति बल वस्तुओं और सेवाओं की कीमत को प्रभावित करते हैं।
(iii) पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
• समाजवादी अर्थव्यवस्था –
(i) समाजवादी अर्थव्यवस्था एक आर्थिक प्रणाली है जहां उत्पादन के कारक जैसे श्रम, प्राकृतिक संसाधन या पूंजीगत सामान सरकार के नियंत्रण में होते हैं।
(ii) समाजवादी अर्थव्यवस्था में, वस्तुओं और सेवाओं की कीमत सरकार की देखरेख और नियंत्रण में होती है।
(iii) समाजवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन का मुख्य उद्देश्य आम जनता का कल्याण है।

59. एकाधिकारी प्रतियोगिता बाजार की चार विशेषताए बताइए।
उत्तर – एकाधिकार प्रतियोगिता एक बाजार मॉडल है जिसमें कई कंपनियां अलग-अलग उत्पाद (गुणवत्ता, ब्रांडिंग, शैली और प्रतिष्ठा में भिन्न) पेश करती हैं और एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं। वे अपने ग्राहकों को जो सामान या सेवाएँ प्रदान करते हैं वे समान हैं लेकिन स्थानापन्न समान नहीं हैं।
विशेषताए :
(i) क्रेताओं और विक्रेताओं की अधिक संख्या।
(ii) प्रत्येक फर्मे समान लेकिन भिन्न उत्पाद बनाती है।
(iii) फर्मों द्वारा उद्योग में निःशुल्क प्रवेश और निकास।
(iv) कंपनियां उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत और उत्पाद का विपणन कैसे किया जाता है, इसके आधार पर प्रतिस्पर्धा करती हैं।

60. मांग में वृद्धि तथा मांग में कमी को रेखाचित्र सहित व्याख्या करे।
उत्तर – मांग में वृद्धि :
(i) जब उसी कीमत पर पहले से अधिक मात्रा की मांग की जाती है, तो यह मांग में वृद्धि को संदर्भित करता है।
(ii) मांग में वृद्धि तब होती है जब समान कीमत पर अधिक खरीदा जाता है और समान मात्रा में कमी अधिक कीमत पर खरीदी जाती है।
(iii) मांग में वृद्धि को मांग वक्र में दाईं ओर बदलाव से दर्शाया जाता है।
• मांग में कमी :
(i) जब समान कीमत पर पहले की तुलना में कम मात्रा की मांग की जाती है, तो यह मांग में कमी को संदर्भित करता है।
(ii) मांग में कमी तब होती है जब समान कीमत पर कम खरीदा जाता है या कम कीमत पर समान मात्रा खरीदी जाती है।
(iii) मांग में कमी को मांग वक्र में बाईं ओर बदलाव से दर्शाया जाता है।

61. संतुलन कीमत तथा समर्थन कीमत में क्या सम्बन्ध होता है?
उत्तर : संतुलन कीमत – संतुलन कीमत वह कीमत होती है जहां वस्तु की मांग तथा पूर्ति बराबर होती है। संतुलन कीमत पर खरीदार और विक्रेता दोनों कोई बदलाव की स्थिति में नहीं हैं। तकनीकी रूप से इस कीमत पर खरीदारों द्वारा मांगी गई मात्रा विक्रेताओं द्वारा आपूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है।
• समर्थन कीमत – समर्थन कीमत सरकार द्वारा किसानों को न्यूनतम आय सुनिश्चित कराने के लिए निश्चित की जाती है। समर्थन कीमत संतुलन कीमत के ऊपर निर्धारित की जाती है। समर्थन मूल्य किसानों को उनके उत्पादों के लिए न्यूनतम मूल्य की गारंटी देने का काम करता है। वस्तुओं की कीमतें ऊंची रखने और किसानों के मुनाफे को बनाए रखने के लिए, सरकार का समाधान बाजार में पर्याप्त मात्रा में सामान खरीदना था ताकि कीमत पर दबाव डाला जा सके।

62. पूर्ति वक्र की परिभाषा दीजिए और इसके निर्धारक तत्वों की व्याख्या करे।
उत्तर – आपूर्ति वक्र एक ग्राफ है जो कीमत और आपूर्ति के बीच संबंध दिखाता है। जैसे-जैसे कीमतें बढ़ती हैं, आपूर्ति की मात्रा भी आम तौर पर बढ़ जाती है। किसी वस्तु की आपूर्ति की लोच के आधार पर, आपूर्ति वक्र आकार और स्थिरता में भिन्न होते हैं।
आपूर्ति वक्र दो प्रकार के होते हैं: व्यक्तिगत और बाज़ार।
एक व्यक्तिगत आपूर्ति वक्र दर्शाता है कि किसी व्यवसाय की आपूर्ति की मात्रा कीमतें बढ़ने के साथ कैसे बदलती है। बाज़ार आपूर्ति वक्र दी गई कीमतों के लिए समग्र बाज़ार की आपूर्ति को दर्शाता है: यह सभी विक्रेताओं के आपूर्ति वक्रो का योग है।
पूर्ति के निर्धारक तत्व :
(i) कीमत
(ii) बाज़ार में विक्रेताओं की संख्या
(iii) संसाधनों की कीमत
(iv) कर दरें और सब्सिडी
(v) प्रौद्योगिकी और स्वचालन में सुधार
(vi) आपूर्तिकर्ताओं की उम्मीदे
(vii) संबंधित उत्पादों की कीमत

63. राष्ट्रीय आय को आय विधि द्वारा मापते समय क्या सावधानिया अपनाई जाती है?
उत्तर – राष्ट्रीय आय एक वर्ष की अवधि के दौरान किसी देश द्वारा उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है।
मापते समय सावधानिया :
(i) स्थानांतरण आय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
(ii) अवैध गतिविधियों से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
(iii) वित्तीय लेनदेन (शेयर, डिबेंचर और बॉन्ड आदि) की बिक्री और खरीद से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
(iv) सेकेंड हैंड सामान की बिक्री से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा क्योंकि इससे दोहरी गिनती की समस्या होती है।

64. मांग का नियम किसे कहते हैं?
उत्तर – मांग का नियम यह बताता है कि अन्य बातें समान रहने पर, किसी वस्तु की अपनी कीमत बढ़ने पर उसकी मांग कम हो जाती है तथा अपनी कीमत कम होने पर उसकी मांग बढ़ जाती है।

65. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार किसे कहते है? इसकी विशेषताएं बताइए।
उत्तर – पूर्ण प्रतियोगिता बाजार उस बाजार को कहते है जिसमें समरूप वस्तु के असंख्य क्रेता और असंख्य विक्रेता होते हैं जो समरूप वस्तु को समान कीमत पर बेचते और खरीदते हैं।
विशेषताएं –
(i) क्रेताओं और विक्रेता की अधिक संख्या
(ii) समरूप वस्तुएं
(iii) पूर्ण ज्ञान
(iv) पूर्ण गतिशीलता
(v) फर्मों का स्वतंत्र प्रवेश व छोड़ना
(vi) यातायात लागत का अभाव
(vii) AR और MR बराबर
(viii) वस्तु की कीमत उद्योग द्वारा निर्धारित

66. सरकारी बजट से आप क्या समझते हैं और इसके मुख्य उद्देश्य बताएं।
उत्तर – सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान सरकार की प्राप्तियों तथा सरकार के व्यय के अनुमानों का विवरण होता है, जो एक अप्रैल से 31 मार्च तक के अनुमानित आय और व्यय को प्रकट करता है।
इसके मुख्य उद्देश्य –
(i) आय और सम्पत्ति का पुनः वितरण – अर्थव्यवस्था में आय और सम्पत्ति के बंटवारे में सुधार लाने हेतु सरकार कराधान तथा आर्थिक सहायता के वित्तीय उपकरणों का प्रयोग करती है।
(ii) साधनों का पुनः बंटवारा – अपनी बजट सम्बन्धी नीति द्वारा सरकार साधनों का बंटवारा इस प्रकार करती है जिसमें अधिकतम लाभ तथा सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
(iii) आर्थिक स्थिरता – बजट के द्वारा अर्थव्यवस्था में आने वाले व्यापार चक्रों को भी नियंत्रित किया जाता है जिससे मन्दी और तेजी की स्थिति को सुधारा जा सके।
(iv) सार्वजनिक उद्यमों का प्रबन्ध – सरकार सार्वजनिक उद्यमों का प्रबन्ध करती है जिसके द्वारा देश की विकास की गति को तीव्र किया जाता है।

67. मुद्रा और उसके कार्य की व्याख्या करें।
उत्तर – मुद्रा की परिभाषा ऐसी किसी वस्तु के रूप में दी जा सकती है जिसे साधारणतः विनियम का माध्यम स्वीकार किया जाता हो और उसके साथ ही जो मूल्य के मापक और मूल्य के संचय का भी कार्य करती हो।
(i) विनियम का माध्यम – मुद्रा के रूप में एक व्यक्ति अपनी वस्तुओं को बेचता है तथा दूसरी वस्तओं को खरीदता है। मुद्रा क्रय तथा विक्रय दोनों में ही एक माध्यम का कार्य करती है।
(ii) मूल्य का मापदण्ड – मुद्रा लेखें की इकाई के रूप में मूल्य का माप करती है अर्थात प्रत्येक वस्तु तथा सेवा का मूल्य मुद्रा के रूप में मापा जाता है।
(iii) स्थगित भुगतानों का माप – जिन लेन-देन का भुगतान तत्काल न करके भविष्य के लिए स्थगित किया जा सकता हैं उन्हें स्थगित भुगतान कहा जाता है। मुद्रा इस प्रकार के स्थगित भुगतानों के माप का कार्य करती है क्योंकि इसका मूल्य स्थिर रहता और सामान्य स्वीकृति का गुण पाया जाता है।
(iv) मूल्य का संचय – मूल्य का संचय का अर्थ मुद्रा का धन के रूप में संचय से है। वस्तु विनियम प्रणाली में यह कार्य कठिन था परन्तु मुद्रा के अविष्कार से धन का संचय बचत के रूप में करना आसान हो गया है।
(v) मूल्य का हस्तांतरण – मूल्य का हस्तांतरण से अभिप्राय पूंजी का एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना। मुद्रा में तरलता एवं सामान्य स्वीकृति के कारण मूल्य का हस्तांतरण संभव हो पाया है।

68. तटस्थता वक्रों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – तटस्थता वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं के सेट के विभिन्न संयोगो को प्रकट करता है। प्रत्येक संयोग उपभोक्ता को संतुष्टि का समान स्तर प्रदान करता है।
इसकी विशेषताएं: तटस्थता वक्र ऋणात्मक ढाल वाली होती है। यह वक्र मुल बिन्दु की ओर उन्नतोदर होती है। यह वक्र कभी भी एक दुसरे को छूती नही है। ऊची तटस्थता वक्र संतुष्टि के ऊचे स्तर को बतलाती है। यह न तो x-अक्ष को और न y-अक्ष को छूती है।

69. उत्पादन की तीन अवस्थाएं कौन-सी हैं?
उत्तर – उत्पादन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा आगतों को निर्गतों में परिवर्तित किया जाता है। उत्पादन फर्मों द्वारा किया जाता है। उत्पादन को अल्पकाल और दीर्घकाल के सन्दर्भ में परिभाषित किया जा सकता है। इसकी तीन अवस्थाएं दर्शाई गई है।
• प्रथम अवस्था बढते प्रतिफल की है जब परिवर्ति साधन का सीमांत उत्पाद बढ रहा होता है।
• दुसरी अवस्था घटते प्रतिफल की है जब परिवर्ति साधन का सीमांत उत्पाद घट रहा होता है।
• तीसरी अवस्था ऋणात्मक प्रतिफल की है जब परिवर्ति साधन का सीमांत उत्पाद ऋणात्मक होता है। उत्पादक केवल दुसरी अवस्था में ही उत्पादन करना चाहेगा।

70. दोहरी गणना की समस्या किसे कहते है? उत्पाद विधि (मूल्य वृद्धि विधि) के संदर्भ में राष्ट्रीय आय को मापने की सावधानियों को लिखो?
उत्तर – एक वस्तु के मूल्य की गणना जब एक बार से अधिक होती है तो उसे दोहरी गणना कहते है। उत्पाद विधि (मूल्य वृद्धि विधि) वह विधि है जो एक लेखा वर्ष में देश की घरेलु सीमा के अंतर्गत प्रत्येक उत्पादक उद्यम के उत्पादन में योगदान की गणना करके राष्ट्रीय आय को मापती है। इस विधि में सबसे पहले उन उद्यमों की पहचान की जाती है जो उत्पादन करते है, और उनका वर्गीकरण तीन श्रेणियों में किया जाता है। उसके बाद दोहरी गणना को ध्यान में रखते हुए, मूल्य वृद्धि की गणना की जाती है।
उत्पाद विधि (मुल्य वृद्धि विधि) से संबंधित सावधानियां :
(i) पुरानी वस्तुओं के क्रय विक्रय को मुल्य वृद्धि में शामिल नही किया जाना चाहिए।
(iii) पुरानी वस्तुओं के व्यापारियों की दलाली को मूल्य वृद्धि में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
(iii) मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को मूल्य वृद्धि में शामिल नही किया जाना चाहिए।
(iv) जिन मकानों में मालिक खुद रह रहे है उनका भी आरोपित किराया शामिल किया जाता है।

71. अधिमान वक्रो की सहायता से उपरोक्ता संतुलन की व्याख्या करें।
उत्तर – एक उपभोक्ता उस समय संतुलन में होता है जब वह अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है। संतुलन की शर्ते :
(i) सीमांत प्रतिस्थापन की दर (MRSxy) = Px/Py (बजट रेखा का ढलान)
(ii) इस अवस्था मे तटस्थता वक्र मूल बिन्दु की ओर उन्नोत्तर होते हैं।

72. कारक के समान प्रतिफल की व्याख्या रेखाचित्र एवं तालिका सहित करों।
उत्तर : कारक के समान प्रतिफल – अल्पकाल में जब स्थिर कारकों की निश्चित इकाईयों के साथ परिवर्तनशील कारको में वृद्धि की जाए। इस अवस्था में कुल उत्पादन (TP) समान दर पर बढ़ता है एवं सीमांत उत्पादन (MP) एवं सीमातं लागत (MC) स्थिर रहती है।

श्रम की ईकाईयां 1 2 3 4 5 6 7
भूमि की ईकाईयां 1 1 1 1 1 1 1
कुल उत्पादन 10 20 30 40 50 60 70
सीमांत उत्पादन 10 10 10 10 10 10 10

73. कारक के घटते प्रतिफल की व्याख्या रेखाचित्र एवं तालिका सहित करों।
उत्तर : कारक के घटते प्रतिफल – अल्पकाल में जब स्थिर कारकों की निश्चित इकाईयों के साथ परिवर्तनशील कारको में वृद्धि की जाए। इस अवस्था में कुल उत्पादन (TP) घटते दर पर बढता है एवं सीमांत उत्पादन (MP) घटता एवं सीमातं लागत (MC) बढ़ती है।

श्रम की ईकाईयां 1 2 3 4 5 6 7
भूमि की ईकाईयां 1 1 1 1 1 1 1
कुल उत्पादन 5 9 12 14 15 15 14
सीमांत उत्पादन 5 4 3 2 1 0 -1

74. औसत परिवर्तनशील (AVC), औसत स्थिर लागत (AFC), कुल परिवर्तनशील लागत (TVC) और सीमांत लागत (MC) ज्ञात करें।

उत्पाद 0 1 2 3 4 5 6
कुल लागत 40 80 110 126 128 135 180

उत्तर – 

उत्पाद 0 1 2 3 4 5 6
कुल लागत (TC) 40 80 110 126 128 135 180
TFC 40 40 40 40 40 40 40
TVC 0 40 70 86 88 95 140
AFC 40 20 13.33 10 8 6.67
AVC 40 35 28.7 22 19 23.3
MC 40 30 16 2 7 45

 

75. संतुलित कीमत की व्याख्या अनुसूची और रेखाचित्र की सहायता से करें।
उत्तर – संतुलित कीमत वह कीमत है जिस पर किसी वस्तु की मांग और पूर्ति बराबर होती है अर्थात क्रेताओं का क्रय और विक्रेताओं का विक्रय एक दूसरे के बराबर होता है।

कीमत 1 2 3 4 5
मांग 50 40 30 20 10
पूर्ति 10 20 30 40 50

76. मांग की कीमत लोच मापने की व्यय विधि की व्याख्या करें।
उत्तर – कुल व्यय विधि यह बताती है कि किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर कुल व्यय में कितना परिवर्तन और किस दिशा में हुआ है।
(i) वस्तु की कीमत बढ़ने या घटने पर उस वस्तु पर किया गया कुल व्यय स्थिर रहे तो मांग की कीमत लोच ईकाई होगी।
(ii) वस्तु की कीमत बढ़ने पर कुल व्यय घट जाए और कीमत घटने पर कुल व्यय बढ़ जाए तो मांग की कीमत लोच इकाई से अधिक होगी।
(iii) वस्तु की कीमत बढ़ने पर कुल व्यय बढ़ जाए और कीमत घटने पर कुल व्यय घट जाए तो मांग की कीमत लोच इकाई से कम होगी।

कीमत मात्रा कुल व्यय मांग की लाेच
1

2

10

5

10

10

Ed = 1
1

2

10

4

10

8

Ed > 1
1

2

10

6

10

12

Ed < 1

77. सीमांत आगम और सीमांत लागत की सहायता से उत्पादक संतुलन की शर्तों की व्याख्या करें।
उत्तर – फर्म के संतुलन को ज्ञात करने की महत्वपूर्ण विधि सीमांत विधि कहलाती है। एक फर्म संतुलन की अवस्था में उस समय होगी जब निम्नलिखित शर्ते पूर्ण होगी :
(i) MC = MR (आवश्यक शर्त)
(ii) MC वक्र MR वक्र को नीचे से काटे
(a) यदि सीमांत आगम (MR) सीमात लागत (MC) से अधिक है तो फर्म अपने उत्पादन मे वृद्धि करेगी।
(b) यदि सीमांत आगम (MR) सीमात लागत (MC) से कम है तो फर्म अपने उत्पादन में कमी करेगी।
(c) यदि सीमांत आगम (MR) सीमात लागत (MC) के बराबर है और सीमांत लागत (MC) बढ़ रही हो तब उत्पादन संतुलन की स्थिति में होगा।

78. सीमांत उपभोग प्रवृति और सीमांत बचत प्रवृति ज्ञात करें।

आय 0 100 200 300 400
उपभोग 60 110 150 180 200

उत्तर –

आय 0 100 200 300 400
उपभोग 60 110 150 180 200
आय में परिवर्तन 100 100 100 100
उपभोग में परिवर्तन 50 40 30 20
सीमांत उपभोग प्रवृति 0.5 0.4 0.3 0.2
सीमांत बचत प्रवृति 0.5 0.6 0.7 0.8

79. अर्थव्यवस्था का बचत फलन S = 200 + 0.25Y है। ज्ञात करें
(i) स्वतंत्र उपयोग
(ii) उपयोग फलन
(iii) निवेश गुणक (K)
उत्तर : (i) जब आय शून्य है तो S = -200 + 0.25(0) = -200
अतः स्वतंत्र उपयोग = 200
(ii) उपयोग फलन C = Y – S
C =Y – (-200 + 0.25Y)
C = Y + 200 – 0.25Y
C = 200 + 0.75Y
(iii) निवेश गुणक (K) = 1/MPS = 1/0.25 = 4

80. व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर बताइए।
उत्तर –

व्यष्टि अर्थशास्त्र समष्टि अर्थशास्त्र
1. व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक समस्या का अध्ययन किया जाता है। 1. सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक समस्या का अध्ययन किया जाता है।
2. व्यष्टि अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या कीमत निर्धारित है।  2. समष्टि अर्थशास्त्र की केन्द्रीय समस्या उत्पादन एवं रोजगार का निर्धारण है।
3. इसमें समष्टि चरों को स्थिर मानते हैं। 3. इसमें व्यष्टि चरों को स्थिर मानते है।

 

81. निवेश गुणक से आप क्या समझते है? निवेश गुणक प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए जब निवेश में प्रारम्भिक वृद्धि (∆I) 2000 करोड़ रूपये और सीमांत उपभोग प्रवृति (MPC) 0.5 हो।
उत्तर :  K = ∆Y/∆I = 1/(1-MPC) = 1/MPS

K = 1/(1-MPC) = 1/(1-0.5) = 1/0.5 = 2
K = ∆Y/∆I = 2
∆Y/2000 = 2
∆Y = 2 × 2000 = 4000

82. व्यापार शेष और भुगतान शेष में क्या अंतर पाया जाता है ?
उत्तर –

व्यापार शेष भुगतान शेष
1. इसमें केवल दृश्य मदों को शामिल किया जाता है। 1. इसमें दृश्य, अदृश्य और पूंजी अंतरण सभी को शामिल किया जाता है।
2. यह एक संकुचित धारणा है।  2. यह एक विस्तृत धारणा है।
3. आर्थिक दृष्टि से कम महत्वपूर्ण है। 3. आर्थिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है।
4. व्यापार शेष संतुलित या असंतुलित हो सकता है। 4. भुगतान शेष सदैव संतुलित होता है।

 

83. केन्द्रिय और व्यापारिक बैंक में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर –

केन्द्रिय बैंक व्यापारिक बैंक
1. केन्द्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा होता है। 1. व्यापारिक बैंकों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना है।
2. इनका जनता के साथ सीधा लेन-देन नहीं होता है। 2. इनका जनता के साथ सीधा लेन-दन होता है ।
3. यह एक सरकारी संस्था होती है। 3. ये सरकारी एवं गैर सरकारी संस्था हो सकते है।
4. केन्द्रीय बैंक को नोट जारी करने का पूर्ण एकाधिकार होता है। 4. व्यापारिक बैंक नोट जारी नहीं कर सकते।
5. यह देश की बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करता है। 5. ये केन्द्रीय बैंक के नियंत्रण में कार्य करते हैं।
6. यह देश के विदेशी विनिमय का संरक्षक होता है। 6. यह बैंक विदेशी विनिमय सम्बन्धी कार्यों के लिए केन्द्रीय बैंक की स्वीकृति पर निर्भर करते हैं।

 

84. राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए : (a) आय विधि (b) व्यय विधि

मद रूपये करोड़ में
(i) कर्मचारियों का पारिश्रमिक 600
(ii) सरकारी अन्तिम उपयोग व्यय 550
(iii) विदेशों से प्राप्त निवल (शुद्ध) कारक आय -10
(iv) निवल निर्यात -15
(v) लाभ 400
(vi) निवल अप्रत्यक्ष कर 60
(vii) स्वनियोजित व्यक्तियों की मिश्रित आय 350
(viii) किराया 200
(ix) ब्याज 310
(x) निजी अन्तिम उपयोग व्यय 1000
(xi) निवल घरेलू पूंजी निर्माण 385
(xii) अचल पूंजी का उपयोग 85
(xiii) स्टाक में परिवर्तन 20

उत्तर –
(a)आय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय –

कर्मचारियों का पारिश्रमिक 600
किराया 200
ब्याज 310
लाभ 400
स्वनियोजित व्यक्तियों की मिश्रित आय 350
+
शुद्ध घरेलू आय (NDPFC) 1860
+ विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय +(-10)
राष्ट्रीय आय (NNPFC) 1850 करोड़ रुपए

 

(b) व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय –

निजी अन्तिम उपयोग व्यय 1000
सरकारी अन्तिम उपयोग व्यय 550
निवल घरेलू पूंजी निर्माण 385
निवल निर्यात +(-15)
+
बाजार कीमत पर निवल घरेलू आय (NDPMP) 1920
– शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) -60
+ विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय +(-10)
राष्ट्रीय आय (NNPFC) 1850 करोड़ रुपए

 

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