HBSE Class 11th Hindi Solved Question Paper 2022

HBSE Class 11th Hindi Solved Question Paper 2022

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1. निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प का चयन कर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :

(i) कबीर की रचना का नाम है :

(क) हठयोग 

(ख) बीजक

(ग) गंगा लहरी 

(घ) कृष्णावतार

Ans. (ख) बीजक


(ii) ‘डिंभ’ शब्द का अर्थ है :

(क) दम्भ

(ख) रम्भ

(ग) प्रगल्भ       

(घ) विश्वंभर 

Ans. (क) दम्भ


(iii) मीरा की भाषा मूलतः किस प्रकार की है ?

(क) अवधी

(ख) बघेली

(ग) राजस्थानी

(घ) भोजपुरी 

Ans. (ग) राजस्थानी


(iv) अविनाशी ईश्वर को पाने की मानसिकता का नाम क्या है ?

(क) विदग्धता

(ख) संदिग्धता

(ग) विप्रलब्धा

(घ) सहजता 

Ans. (घ) सहजता 


(v) ‘चिदंबरा’ किस कवि की रचना है ?

(क) सुमित्रानन्दन पंत

(ख) मीरा

(ग) कबीर

(घ) निर्मला पुतुल 

Ans. (क) सुमित्रानन्दन पंत


(vi) दृगों में क्या लहरा रहे थे ?

(क) तारे

(ख) खेत

(ग) वैभव-विलास

(घ) आमोद-प्रमोद 

Ans. (ख) खेत


(vii) ‘छाती पर साँप लोटने’ का अर्थ है :

(क) साँप की मस्ती

(ख) केंचुली

(ग) तिरछी चाल

(घ) भारी पीड़ा 

Ans. (घ) भारी पीड़ा 


(viii) पिताजी को क्या व्याप्त नहीं हुआ था ?

(क) संक्रामक रोग

(ख) बुढ़ापा

(ग) कठोरता 

(घ) दिव्य दर्शन 

Ans. (ख) बुढ़ापा


(ix) कवि ने बहनों को क्या कहा है ?

(क) प्यार

(ख) दहेजागार

(ग) बाँटनहार

(घ) अलख संसार 

Ans. (क) प्यार


(x) श्रावण मास को कौन-सा विशेषण दिया गया है ?

(क) इन्द्रलोक

(ख) सजीला

(ग) प्रलयलोक

(घ) गोलोक 

Ans. (ख) सजीला


(xi) हरेक घर के लिए क्या तय हुआ था ?

(क) हीटर

(ख) वातानुकूलित

(ग) चिराग

(घ) वाहन  

Ans. (ग) चिराग


(xii) नजर में क्या बसना चाहिए ?

(क) ईश्वरीयता

(ख) हसीन नजारा

(ग) वैचारिकी

(घ) एकाकीपन 

Ans. (ख) हसीन नजारा


(xiii) नदियों की वांछनीयता क्या है ?

(क) निर्मलता

(ख) प्रवाहिकता

(ग) धारासार वर्षा

(घ) विद्युत्-उत्पादन

Ans. (क) निर्मलता


2. निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

अंधकार की गुहा सरीखी

उन आँखों से डरता है मन,

भरा दूर तक उनमें दारुण

दैन्य दुख का नीरव रोदन।

Ans. प्रसंग– प्रस्तुत पंक्तियाँ प्रसिद्ध कवि सुमित्रानदंन पतं द्वारा रचित कविता ‘वे आँखें’ से अवतरित हैं। यह उनकी प्रगतिवादी दौर की कविता है। इसमें कवि स्वतत्र भारत में भी किसानों की दुर्दशा को देखकर आहत होता है। वह उनकी दशा का यथार्थ अकन करते हुए कहता है।

व्याख्या– भारत स्वाधीन तो हो गया पर किसानों की दशा में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया। उनकी दुख दीनता से परिपूर्ण आँखों की ओर देखने से भी मन भयभीत होता है। किसान की आँखें अंधकार से भरी गुफा के समान हैं अर्थात् उनमें प्रकाश की कोई किरण नजर नहीं आती। उनमें अत्यधिक वेदना, दीनता और दुख-पीड़ा का शांत रोदन भरा हुआ है। किसानों के मन की पीड़ा उनकी आँखों में झलकती है। यह पीड़ा इतनी अधिक है कि उनकी आँखों की ओर देखने का साहस तक नहीं होता। 


                                       अथवा

वह तुम्हारा मन समझकर 

और अपनापन समझकर

गया है सो ठीक ही है

यह तुम्हारी लीक ही है।

Ans. प्रसंग– प्रस्तुत काव्याशं भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता ‘घर की याद, से अवतरित है। कवि अपने जेल-प्रवास में घर के एक-एक सदस्य का स्मरण करता है। यहाँ वह अपनी माँ के स्वभाव का उल्लेख कर रहा है।

व्याख्या– कवि की माँ ने पिताजी को यह कहकर समझाया होगा कि भवानी ने तुम्हारे मन की बात को समझा और अपनेपन का अनुभव करके ही वह भारत छोड़ो आदोलन में भाग लेकर जेल गया है अर्थात् मन से तुम भी ऐसा चाहते थे। उसने बिल्कुल ठीक काम किया है। यह तो तुम्हारी बनाई परंपरा का ही अनुसरण है। उसने हमारे खानदान की मर्यादा का ही पालन किया है।


3. निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चयन कर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :

(i) ‘भारत माता की जय’ का क्या अर्थ है ?

(क) दुर्गा की जय

(ख) भारतवासियों की जय

(ग) भारतीय माताओं की जय

(घ) भारतीय मान्यताओं की जय 

Ans. (ख) भारतवासियों की जय


(ii) ‘जिनका नजरिया महदूद था’ उपवाक्य में ‘महदूद’ शब्द का क्या अर्थ है ?

(क) सीमित

(ख) महान

(ग) आधुनिक 

(घ) उच्च 

Ans. (क) सीमित


(iii) किसके जीवन की फाइल पूर्ण हो चुकी थी ?

(क) अधिकारी की

(ख) कर्मचारी की

(ग) नेता की

(घ) कवि की 

Ans. (घ) कवि की


(iv) जामुन के पेड़ को काटने किस विभाग के आदमी आए ?

(क) बिजली विभाग के

(ख) स्वास्थ्य विभाग के

(ग) सिंचाई विभाग के

(घ) वन विभाग के 

Ans. (घ) वन विभाग के 


(v) पेड़ के नीचे दबे हुए कवि की रचना का नाम लिखिए :

(क) ओस के फूल

(ख) घास की बात

(ग) अनाम आदमी

(घ) सुधार- सार 

Ans. (क) ओस के फूल


(vi) ‘पावस’ शब्द का अर्थ लिखिए :

(क) शीत 

(ख) वर्षा

(ग) ग्रीष्म

(घ) शिशिर 

Ans. (ख) वर्षा


(vii) स्पीति का धरातल मुख्यतः कैसा है ?

(क) सघन वन प्रधान 

(ख) मेघमय 

(ग) नंगा और वीरान

(घ) घनी आबादी से पूर्ण 

Ans. (ग) नंगा और वीरान


(viii) धनराम कौन था ?

(क) शिक्षक

(ख) सुनार

(ग) कहार

(घ) लुहार 

Ans. (घ) लुहार


(ix) वंशीधर मोहन को क्या देखना चाहते थे ?

(क) संत

(ख) बड़ा अफसर

(ग) प्रचारक

(घ) मजदूर 

Ans. (ख) बड़ा अफसर


(x) बब्बन मियाँ कौन थे ?

(क) कारीगर

(ख) फ़कीर

(ग) अफसर

(घ) नेता 

Ans. (क) कारीगर


(xi) मियाँ नसीरुद्दीन सिर हिलाते समय कैसे दिखे ?

(क) रुस्तम-जैसे

(ख) अभिनेता-जैसे

(ग) संगतकार-जैसे

(घ) सुकरात -जैसे  

Ans. (क) रुस्तम-जैसे


(xii) अलोपीदीन-संपदा में वंशीधर क्या बने ? 

(क) मैनेंजर

(ख) पहरेदार

(ग) सफाईकर्मी

(घ) माली 

Ans. (क) मैनेंजर


(xiii) वंशीधर के साथ जमादार कौन थे ?

(क) स्नेह शर्मा

(ख) बदलू सिंह

(ग) प्रवीण

(घ) दर्शन सिंह 

Ans. (ख) बदलू सिंह


4. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

मैं कगारे पर का वृक्ष हो रहा हूँ, न मालूम कब गिर पडू। अब तुम्हीं घर के मालिक-मुख्तार हो। नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए। 

प्रसंग– प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह’ के पाठ  ‘नमक का दरोगा’ से लिया गया है। इसके रचयिता मुंशी प्रेमचंद जी हैं। 

व्याख्या– खुद करे।  


                                             अथवा

प्रधानमंत्री ने इस पेड़ को काटने का हुक्म दे दिया और इस घटना की सारी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी अपने सिर ले ली है। कल यह पेड़ काट दिया जाएगा और तुम इस संकट से छुटकारा हासिल कर लोगे।

प्रसंग– प्रस्‍तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्‍तक ‘आरोह’ के पाठ ‘जामुन का पेड़’ से लिया गया है। इसके लेखक श्री कृश्‍नचंदर जी हैं।

व्याख्या– खुद करे।


5. ‘अभिव्यक्ति और माध्यम’ से सम्बद्ध निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प का चयन कर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : 

(i) एक व्यक्ति से सम्बद्ध सूचनाओं का एक अनुशासित प्रवाह क्या कहलाता है ?

(क) परिपत्र

(ख) ज्ञापन

(ग) स्ववृत्त

(घ) अनुस्मारक 

Ans. (ग) स्ववृत्त


(ii) दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान क्या है ?

(क) संचार

(ख) फीचर

(ग) आवेदन

(घ) अधिसूचना 

Ans. (क) संचार


(iii) पटकथा की संरचना किस विधा से अधिक मिलती है ?

(क) कहानी से

(ख) उपन्यास से

(ग) आत्मकथा से

(घ) नाटक से

Ans. (घ) नाटक से


(iv) निजी स्तर पर घटित घटनाओं और तत्संबंधी बौद्धिक भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का लेखा-जोखा क्या है ?

(क) आत्मकथा

(ख) डायरी लेखन

(ग) जीवनी 

(घ) साक्षात्कार

Ans. (ख) डायरी लेखन


6. निम्नलिखित व्याकरणिक प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : 

(i) ‘स्वाध्याय’ शब्द में सन्धि-भेद लिखिए :

(क) यण स्वर-संधि 

(ख) दीर्घ स्वर-संधि 

(ग) गुण स्वर-संधि 

(घ) वृद्धि स्वर-संधि 

Ans. (ख) दीर्घ स्वर-संधि 


(ii) ‘प्रेषक’ शब्द का सही संधि विच्छेद क्या है ?

(क) प्र + एषक

(ख) प्र + ऐषक

(ग) प्र + ईषक 

(घ) प्र + इषक

Ans. (घ) प्र + इषक


(iii) ‘वाग्जाल’ शब्द में कौन-सी संधि है ? 

(क) दीर्घ संधि 

(ख) विसर्ग संधि

(ग) व्यंजन संधि

(घ) वृद्धि संधि

Ans. (ग) व्यंजन संधि


(iv) ‘रजोगुण’ शब्द का सही संधि-विच्छेद छाँटिए :

(क) रजः + गुण

(ख) रजस्गुण

(ग) रज + ओगुण 

(घ) रजो + गुण

Ans. (क) रजः + गुण


(v) ‘योग्यतानुसार’ शब्द में कौन-सा समास-भेद है ? 

(क) अव्ययीभाव

(ख) तत्पुरुष

(ग) बहुव्रीहि

(घ) कर्मधारय

Ans. (ख) तत्पुरुष


(vi) ‘शरीरव्यापी’ शब्द का सही विग्रह है।

(क) शरीर की व्याप्ति

(ख) शरीर द्वारा व्याप्त

(ग) शरीर को व्यापा हुआ 

(घ) शरीर के लिए व्याप्त

Ans. (ग) शरीर को व्यापा हुआ


(vii) ‘त्रिकूट’ शब्द में कौन-सा समास-भेद है ?

(क) बहुव्रीहि

(ख) कर्मधारय

(ग) द्विगु

(घ) अव्ययीभाव

Ans. (ग) द्विगु


(viii) ‘दुग्धधवल’ शब्द में कौन-सा समास है ?

(क) द्वन्द्व

(ख) द्विगु

(ग) बहुव्रीहि

(घ) कर्मधारय

Ans. (क) द्वन्द्व


(ix) निम्नलिखित वाक्यों में कौन-सा विकल्प सही है ?

(क) मैंने उनका धन्यवाद किया।

(ख) मैंने उन्हें धन्यवाद दिया।

(ग) मैंने उनको धन्यवाद किया।

(घ) मैंने उनके लिए धन्यवाद किया।

Ans. (क) मैंने उनका धन्यवाद किया।


(x) वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध विकल्प छाँटिए :

(क) गंभीर्य दुर्लभ है।

(ख) मेरा भविष्य उज्जवल है।

(ग) यह रचना आलंकारिक है।

(घ) ये दवाईयाँ अच्छी हैं।

Ans. (ग) यह रचना आलंकारिक है।


7. मीरा अथवा दुष्यंतकुमार के जीवन, रचनाओं तथा काव्यात्मक विशेषताओं का परिचय दीजिए। 

Ans. मीरा– कृष्ण भक्त कवियों में मीराबाई का प्रमुख स्थान है। उनका जन्म 1498 ई० में मारवाड़ रियासत के कुड़की नामक गाँव में हुआ। इनका विवाह 12 वर्ष की आयु में चित्तौड़ के राणा सांगा के पुत्र कुंवर भोजराज के साथ हुआ। शादी के 7-8 वर्ष बाद ही इनके पति का देहांत हो गया। इनके मन में बचपन से ही कृष्ण-भक्ति की भावना जन्म ले चुकी थी। इसलिए वे कृष्ण को अपना आराध्य और पति मानती रहीं। इन्होंने देश में दूर-दूर तक यात्राएँ कीं। चित्तौड़ राजघराने में अनेक कष्ट उठाने के बाद ये वापस मेड़ता आ गई। यहाँ से उन्होंने कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन की यात्रा की। जीवन के अंतिम दिनों में वे द्वारका चली गई। माना जाता है कि वहीं रणछोड़ दास जी की मंदिर की मूर्ति में वे समाहित हो गई। इनका देहावसान 1546 ई. में माना जाता है। 

रचनाएँ- मीरा ने मुख्यत: स्फुट पदों की रचना की। ये पद ‘मीराबाई की पदावली’ के नाम से संकलित हैं। दूसरी रचना नरसीजी-रो-माहेरो है। 

साहित्यिक विशेषताएँ- मीरा सगुण धारा की महत्वपूर्ण भक्त कवयित्री थीं। कृष्ण की उपासिका होने के कारण इनकी कविता में सगुण भक्ति मुख्य रूप से मौजूद है, लेकिन निर्गुण भक्ति का प्रभाव भी मिलता है। संत कवि रैदास उनके गुरु माने जाते हैं। इन्होंने लोकलाज और कुल की मर्यादा के नाम पर लगाए गए सामाजिक और वैचारिक बंधनों का हमेशा – विरोध किया। इन्होंने पर्दा प्रथा का पालन नहीं किया तथा मंदिर में सार्वजनिक रूप से नाचने-गाने में कभी हिचक महसूस नहीं की। मीरा सत्संग को ज्ञान प्राप्ति का माध्यम मानती थीं और ज्ञान को मुक्ति का साधन। निंदा से वे कभी विचलित नहीं हुई। वे उस युग के रूढ़िग्रस्त समाज में स्त्री-मुक्ति की आवाज बनकर उभरी।

भाषा शैली- मीरा की कविता में प्रेम की गंभीर अभिव्यंजना है। उसमें विरह की वेदना है और मिलन का उल्लास भी। इनकी कविता में सादगी व सरलता है। इन्होंने मुक्तक गेय पदों की रचना की। उनके पद लोक व शास्त्रीय संगीत दोनों क्षेत्रों में आज भी लोकप्रिय हैं। इनकी भाषा मूलत: राजस्थानी है तथा कहीं-कहीं ब्रजभाषा का प्रभाव है। कृष्ण के प्रेम की दीवानी मीरा पर सूफियों के प्रभाव को भी देखा जा सकता है। 


                                              अथवा

दुष्यंतकुमार– दुष्यंत कुमार नई कविता के सशक्त हस्ताक्षर हैं। इनका जन्म। सितम्बर, सन् 1933 को राजापुर-नवादा, जिला बिजनौर में हुआ था। उनके बचपन का नाम दुष्यंत नारायण था। इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से एमए की उपाधि प्राप्त की। उनके साहित्यिक जीवन का प्रारंभ भी प्रयाग से ही हुआ। उनके घनिष्ठ मित्रों में कमलेश्वर, माकण्डेय आदि थे। वे ‘परिमल’ की गोष्ठियों में भाग लेते रहे। ‘नये पत्ते’ जैसी महत्वपूर्ण पत्रिका के साथ वे जुड़े रहे। उन्होंने कुछ समय तक आकाशवाणी में भी नौकरी की। बाद में सहायक निदेशक के रूप में मध्य प्रदेश के भाषा विभाग में कार्य किया। वे अधिक दिन तक जीवित न रह सकें। तैंतालीस वर्ष की अल्पायु में ही 30 दिसम्बर, 1975 को भोपाल में उनकी मृत्यु हो गई।

साहित्यिक विशेषताएं- दुष्यंत कुमार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम. ए. किया। उनके साहित्यिक जीवन का आरंभ इलाहाबाद से ही हुआ। उन्होंने ‘परिमल’ की गोष्ठियों में सक्रिय रूप से भाग लिया और ‘नए पत्ते’ जैसे महत्त्वपूर्ण पत्र से जुड़े रहे। दुष्यंत कुमार ने अपनी आजीविका के लिए आकाशवाणी में नौकरी की और देश के अनेक आकाशवाणी केंद्रों पर हिन्दी कार्यक्रमों को सँभालने का महत्वपूर्ण कार्य किया। बाद में सहायक निदेशक के रूप में मध्य प्रदेश के भाषा विभाग से जुड़ गए।

दुष्यंत कुमार का लेखन सहज और स्वाभाविक था, जिससे उन्हें लोकप्रियता प्राप्त हुई। हिन्दी कविता में गीत और गजल लिखने में दुष्यंत कुमार का कोई सानी नहीं था। उन्होंने कविता, के क्षेत्र में कई नए प्रयोग किए, किन्तु उनकी विशिष्ट देन है हिन्दी गजल। अपनी गजलों के बारे में उन्होंने लिखा है-’ मैं स्वीकार करता हूँ कि गजल को किसी भूमिका की जरूरत नहीं होती…मैं प्रतिबद्ध कवि हूँ..यह प्रतिबद्धता किसी पार्टी से नहीं, आज के मनुष्य से है और मैं जिस आदमी के लिए लिखता हूँ, यह भी चाहता हूँ कि वह आदमी उसे पड़े और समझे।’

श्री दुष्यंत कुमार नई कविता के एक प्रतिभाशाली कवि थे। उन्होंने कविता के क्षेत्र में अनेक सफल प्रयोग किए, किन्तु उनकी ख्याति का आधार रहे हैं-गीत और गजल। अन्य विधाओं के समान गजल भी हिन्दी के लिए नई रही है। गजल लिखने में जो सलीका और अंदाज होना चाहिए, वह दुष्यंत कुमार में हमें देखने को मिलता है।

दुष्यंत कुमार का लेखन सहज एवं स्वाभाविक था। उन्होंने कविता के क्षेत्र में कई नए प्रयोग किए। वे मूलत: कवि थे, किन्तु उन्होंने उपन्यास और नाटक-विद्या में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। ‘एक कंठ विषपायी’ दुष्यंत कुमार का एक महत्वपूर्ण गीति नाट्य है। मुख्य काव्य रचनाएँ: सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे, साये में धूप, जलते हुए वन का वसंत आदि।

उपन्यास- छोटे-छोटे सवाल, गिन में एक वृक्ष, दोहरी जिंदगी।


8. कवयित्री ने पशुओं के लिए हरी-हरी घास के मैदान बचाने का आग्रह क्यों किया हैं ?

Ans. खुद करे। 


9. मोहन अथवा मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्त्व पर प्रकाश डालिए।

Ans. मोहन– ‘गलता लोहा’ पाठ में मोहन कहानी का मुख्य पात्र है। वह एक ब्राह्मण जाति का है, गाँव के पुरोहित का बेटा है। वह एक स्कूल में पढ़ता है और उसकी धनराम लोहार नाम के लड़के से दोस्ती है। ऊंची जाति का होने के बावजूद निम्न जाति के धनराम लोहार के साथ जातिगत भेदभाव भूलकर दोस्ती कायम रखता है। वह पढ़ने में अत्यंत मेधावी छात्र है, जो अपने गाँव के स्कूल में सबसे मेधावी छात्र रहा था। गाँव के स्कूल के मास्टर त्रिलोक सिंह ने भविष्यवाणी कर दी थी कि वह एक दिन स्कूल का नाम रोशन करेगा। लेकिन मोहन जब शहर गया तो वहाँ पर उसके रिश्तेदार रमेश ने उसका जीवन बर्बाद कर दिया। उसके रिश्तेदार ने उसे घर के काम में लगा दिया। इस कारण मोहन शहर के स्कूल में अपना समय नहीं दे पाया और स्कूल में वह पिछड़ता गया। इस तरह एक मेधावी छात्र का जीवन नष्ट हो गया। 


                                          अथवा 

मियाँ नसीरुद्दीन– मियाँ नसीरुद्दीन का व्यक्तित्व बड़ा ही दिलचस्प और रोचक है। एक ऐसे कलाकार माने जा सकते हैं जिनकी कला-कौशल उनके साथ ही लुप्त होने के कगार पर है। वह अपने पारंपरिक-पारिवारिक पेशे में बड़े माहिर हैं। उनकी बात करने का अंदाज भी बड़ा ही दिलचस्प और निराला है। यदि उनसे कोई कुछ सवाल पूछता है तो बदले में वो ही सवाल पूछने लगते हैं और किसी भी सवाल का जवाब बड़ा ही घुमा-फिरा कर देते हैं। वह अपने क्षेत्र में खुद को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। वे खुद को दार्शनिक भी समझते हैं और खुद को सुकरात से कम नहीं समझते हैं। बहुत बोलते भी हैं, पर वे काम में बड़े मेहनती हैं और उनकी मेहनतकशी अनुसरण करने योग्य है। उनकी आँखों में चालाकी भी है, भोलापन भी है। उनके माथे पर यह हुनरमंद कारीगर की तरह के तेवर दिखाई देते हैं। वक्त की मार के साथ वे स्वयं को बढ़ा खानदानी व्यक्ति समझते हैं और उसके लिए तरह-तरह के उदाहरण भी देते हैं।


10. नेहरूजी ने ‘भारत माता की जय’ का क्या अर्थ बताया ? 

Ans. नेहरू जी की अवधारणा थी कि हिंदुस्तान वह सब कुछ है जिसे उन्होंने समझ रखा है, लेकिन वह इससे भी बहुत ज्यादा है। देश का हर हिस्सा- नदी, पहाड़, खेत आदि सभी इसमें शामिल हैं। दरअसल भारत में रहने वाले करोड़ों लोग हैं, ‘भारत माता की जय’ का अर्थ है-करोड़ों भारतवासियों की जय। इस धारणा का अर्थ है-देशवासियों से ही देश बनता है।


11. ‘वितान’ (भाग-1) के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(क) बेबी को सुखदीप और रमण क्यों अच्छे लगे ? 

Ans. सुखदीप और रमण काम पर से लौटकर फ़ौरन सोने चले जाते। 


(ख) तातुश की प्रकृति का चित्रण कीजिए। 

Ans. तातुश सज्जन प्रवृत्ति के अधेड़ अवस्था के शिक्षक हैं, वे दयालु हैं तथा करुण भाव से युक्त हैं। जब बेबी उनके घर काम करने आई तो उन्होंने उसके काम की प्रशंसा की। वे उसे अपनी बेटी के समान समझते थे। वे उसे कदम-कदम पर प्रोत्साहित करते थे।


(ग) मरुभूमि में कुंई खोदने का काम कठिन क्यों होता है ?

Ans. पानी गिरने पर कण भारी हो जाते हैं, परंतु अपनी जगह नहीं छोड़ते। इस कारण मरुभूमि में धरती पर दरारें नहीं पड़तीं वर्षा का भीतर समाया जल अंदर ही रहता है। यह नमी बूंद-बूंद करके कुंई में जमा हो जाती है। 


(घ) बाड़मेर के गाँव-गाँव में कुंइयाँ ही कुंइयाँ क्यों हैं ? 

Ans. रेत के नीचे सब जगह खड़िया की पट्टी नहीं है, इसलिए कुंई भी पूरे राजस्थान में नहीं मिलेगी। चुरू, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर के कई क्षेत्रों में यह पट्टी चलती है और इसी कारण वहाँ गाँव-गाँव में कुंइयाँ ही कुंइयाँ हैं। 


(ङ) चित्रपट संगीत में लता को अतुलनीय क्यों कहा गया है ? 

Ans. लता के स्वर बहुत ही निर्मल, कोमल तथा मुग्ध होते हैं। उनके स्वरों में ये गुण बिखेरे हुए हैं। सुनने वालों का इनसे परिचय हो जाता है। इसके माध्यम से लता का गायन और विशेष हो जाता है।


12. ‘अभिव्यक्ति और माध्यम’ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(क) पटकथा लेखन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। 

Ans. ‘पटकथा’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है-‘पट’ और ‘कथा’। इनमें ‘पट’ शब्द का अर्थ है-परदा और’कथा’ शब्द का अर्थ है-कहानी। इस प्रकार ‘पटकथा’ शब्द से तात्पर्य ऐसी कहानी से है जो परदे पर दिखायी जाए। परदा छोटा अथवा बड़ा कोई भी हो सकता है। कहने का भाव यह है कि जो कहानी टेलीविज़न अथवा सिनेमा में दिखाए जाने के लिए लिखी जाती है, उसे पटकथा कहा जाता है। पटकथा के आधार पर ही निर्देशक फ़िल्म अथवा धारावाहिक की शूटिंग की योजना बनाता है। अभिनेता, कैमरामैन, तकनीशियन, सहायक आदि भी पटकथा के आधार पर ही अपना-अपना कार्य करते हैं।

पटकथा का स्रोत कुछ भी हो सकता है। हमारे स्वयं के साथ घटी कोई घटना अथवा हमारे आस-पास घटी कोई घटना भी पटकथा का आधार बन सकती है। इसके अतिरिक्त अखबार में छपा कोई समाचार, हमारी कल्पना से अपनी कोई कहानी, इतिहास में वर्णित कोई व्यक्तित्व, कोई सच्चा किस्सा अथवा साहित्य की किसी प्रसिद्ध रचना पर पटकथा लिखी जा सकती है। प्रसिद्ध साहित्यिक रचनाओं को तो बहुत बार पटकथा का आधार बनाया गया है। उदाहरण के रूप में शरत्चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘देवदास’ पर तीन बार फ़िल्म बनाई जा चुकी है।

फिल्म तथा दूरदर्शन की पटकथा में पात्र-चरित्र, नायक-प्रतिनायक, घटनास्थल, दृश्य, कहानी का क्रमिकविकास, वंद्व, समाधान आदि सभी कुछ होता है। इसमें छोटे-छोटे दृश्य, असीमित घटनास्थल होते हैं। इसकी कथाफ़्लैशबैक अथवा फ़्लैश फ़ॉरवर्ड तकनीक से किसी भी प्रकार से प्रस्तुत की जा सकती है। फ़्लैशबैक से अतीत में हो चुकी और फ़्लैश फ़ारवर्ड से भविष्य में होने वाली घटनाओं को प्रस्तुत किया जाता है। इसमें एक ही समय में अलग-अलग स्थानों पर घटित घटनाओं को भी दिखाया जा सकता है। कथानक को विभिन्न दृश्यों में बदलते हुए अंत की ओर ले जाया जाता है। 


(ख) समाचार के तत्त्वों का परिचय दीजिए। 

Ans. नवीनता– नवीनता समाचार का प्रमुख तत्व है “प्रकृति के यौवन का श्रृंगार करेंगे तभी ना बासी फूल।”प्रसाद की इस उक्ति के अनुसार बासी समाचार पत्रों को गौरवान्वित नहीं कर सकते हैं। दैनिक पात्रों में 24 घंटे एवं सप्ताहिक पत्रों में 1 सप्ताह के बाद समाचार छपने पर समाचार नहीं रह जाता। आशय या है कि ताजा से ताजा समाचार पाठक को आकर्षित करता है विलंब होने पर निरर्थक हो जाता है नवीनता के अभाव में समाचार गल्प बातचीत आख्यान बन जाता है। समाचार के लिए तत्काल तक्षण अनिवार्य है (तत्काल तक्षण और अविलंब को समाचार का प्राण कहा गया है।)

सत्यता– समाचार का सबसे अनिवार्यता तत्व है सत्यता समाचारों को केवल सही तथ्यों पर आधारित होना चाहिए इसमें अनेक विचार अनुभव या टिप्पणी आदि नहीं जोड़े जा सकते हैं। झूठ या गलत बातें जोड़ना अथवा अनुमान या स्वाकलन के आधार पर समाचार तैयार करने से समाचार की विश्वसनीयता समाप्त हो जाती हैं Gardeyan के संपादक सीपी स्कॉट के अनुसार समाचार भले ही पत्रकार की भावना पर आघात करने वाला हो अथवा उसके विचारों के अनुकूल नहीं हो पर समाचार के तत्वों में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए और निरपेक्ष यानी तथास्तु रहते हुए सही जानकारी और सूचना जनता तक पहुंचाना चाहिए।
स्पष्टता– अगर सही बात यह जानकारी को साफ-साफ भाषा में प्रस्तुत नहीं किया जाए तो पाठकों श्रोताओं और दर्शकों के लिए समाचार को समझना मुश्किल होगा इसलिए समाचार को इतना स्पष्ट होना चाहिए कि उसे कोई भी बिना किसी उलझन के आसानी से समझ सके। समाचार लिखते समय सरल भाषा सही घटनाक्रम और व्यवस्थित विस्तार पर विशेष ध्यान देना चाहिए शब्द यथासंभव बोलचाल वाली भाषा के हो और भाषा में प्रवाह हो तभी समाचार स्पष्ट रूप से समझे जा सकेंगे।
संक्षिप्ता– समाचार सूचना या जानकारी पहुंचाने का माध्यम है व्यर्थ के विस्तार से समाचारों के प्रति लोगों की रूचि और उत्सुकता समाप्त हो जाती हैं इसलिए समाचार लिखते समय शब्द के आडम्बर और अनावश्यक विवरण देने से बचना चाहिए। कम शब्दों में प्राप्त जानकारी देना समाचार लेखन की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती हैं।
सुरुचि– समाचार लेखन सुरुचिपूर्ण होना चाहिए जहां लोग रुचि के समाचारों को आवश्यक विवरण देकर सजाया जाना जरूरी होता है वही वीभत्स और मन में भय उत्पन्न करने वाले समाचारों को यथासंभव कम शब्दों में केवल सूचना देने के रूप में लिखा जाना चाहिए अर्थात् जान भावना को ध्यान में रखकर उन्हीं समाचारों को महत्व दिया जाना चाहिए जिनमें जनता का हित हो और लोग जीने पसंद करते हैं। 

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