HBSE Class 10 Sanskrit Question Paper 2025 Answer Key

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HBSE Class 10 Sanskrit Question Paper 2025 Answer Key

खण्डः ‘क’ (अपठित-अवबोधनम्)

1. अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानामुत्तराणि यथानिर्देशं संस्कृतेन लिखत-
द्वापरयुगे हस्तिनापुरे शान्तनुः नाम राजा अभवत्। तस्य पुत्रस्य नाम देवव्रतः आसीत्। सः पराक्रमी आसीत् तस्य मातुः नाम गंगा आसीत्। अतः जनाः तं ‘गांगेय’ इत्यपि कथयन्ति स्म। सः बालब्रह्मचारी पितृभक्तश्च आसीत्। देवव्रतस्य कठोर प्रतिज्ञावशात् पितामहः भीष्मः इति तस्य नाम अभवत्।
प्रश्नाः
(अ) एकपदेन उत्तरत- (2 × 1 = 2 अंक)
(i) शान्तनोः पुत्रस्य किं नाम आसीत् ?
उत्तर – देवव्रतः

(ii) हस्तिनापुरे कः राजा अभवत् ?
उत्तर – शान्तनुः

(आ) पूर्णवाक्येन उत्तरत- (2 × 2 = 4 अंक)
(i) देवव्रतस्य मातुः नाम किम् आसीत् ?
उत्तर – देवव्रतस्य मातुः नाम गंगा आसीत्।

(ii) राजा शान्तनुः कस्य पिता आसीत् ?
उत्तर – राजा शान्तनुः देवव्रतस्य पिता आसीत्।

(इ) यथानिर्दिष्टम् उत्तरत- (3 × 1 = 3 अंक)
(i) ‘अभवत्’ पदे कः लकारः ?
उत्तर – लङ् लकारः

(ii) ‘नृपः’ पदस्य पर्याय पदं लिखत गद्यांशतः।
उत्तर – राजा

(iii) ‘पितामहः’ पदस्य हिन्दी अर्थ लिखत।
उत्तर – दादा

(ई) गद्यांशस्य उचितं शीर्षकं लिखत। (1अंक)
उत्तर – देवव्रतः (भीष्मः)

खण्डः ‘ख’ (रचनात्मक-कार्यम्)

2. (क) प्रदत्त प्रार्थना-पत्रं पठित्वा मञ्जूषातः उचित पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (4 × 1 = 4 अंक)
रा०उ०वि० हिसारतः
पूज्य पितृ चरणयोः ………(i)………..।
अत्र कुशलं ………(ii)………..। अद्यैव मम नवम-कक्षायाः परिणामः आगतः। अहं कक्षायां प्रथमं स्थानं ………(iii)………..। शीघ्रमेव मम दशम कक्षायाः अध्ययनं प्रारप्यस्यते। अहं ………(iv)……….. क्रेतुमिच्छामि। एतदर्थं भवान् मह्यं सहस्ररूप्याकाणि प्रेषयेत्। मातृचरणेषु प्रणामाः।
भवतः पुत्रः,
महेशः।
[मञ्जूषा– पुस्तकानि, लब्धवान्, प्रणामाः, तत्रास्तु]
उत्तर – (i) प्रणामाः, (ii) तत्रास्तु, (iii) लब्धवान्, (iv) पुस्तकानि

(ख) निर्दिष्टचित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि पठित्वा च मञ्जूषायाः उचितपदैः रिक्तस्थानानि पूरयित्वा लिखत- (4 × 1 = 4 अंक)

[मञ्जूषा– एकः, वृक्षः, नृत्यति, सन्ति]
वाक्यानि-
(i) चित्रेऽस्मिन् एकः विशालः ………….. अस्ति।
उत्तर – वृक्षः

(ii) वृक्षोपरि खगाः …………..।
उत्तर – सन्ति

(iii) अधः मयूरः …………..।
उत्तर – नृत्यति

(iv) जले ………….. बालकः स्नानं करोति।
उत्तर – एकः

खण्डः ‘ग’ (पठित-अवबोधनम्)

3. गद्यांशं पठित्वा हिन्दीभाषया सप्रसङ्ग सरलार्थं लिखत- (4 अंक)
अस्ति देउलाख्यो ग्रामः। तत्र राजसिंह नाम राजपुत्रः वसति स्म। एकदा केनापि आवश्यककार्येण तस्य भार्या बुद्धिमती पुत्रद्वयोपेता पितुर्गृहं प्रति चलिता।
उत्तर – प्रसङ्ग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (द्वितीयो भागः) के ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ नामक पाठ से उद्धृत है। इसमें राजसिंह की पत्नी बुद्धिमती के अपने पिता के घर जाने का वर्णन किया गया है।
• सरलार्थ : देउल नाम का एक गाँव है। वहाँ राजसिंह नाम का एक राजकुमार रहता था। एक बार किसी आवश्यक कार्य के कारण उसकी पत्नी बुद्धिमती अपने दो पुत्रों के साथ अपने पिता के घर की ओर चली गई।

अथवा

वनस्य दृश्यं समीपे एव एका नदी वहति। एकः सिंहः सुखेन विश्राम्यति। तदैव एकः वानरः आगत्य तस्य पुच्छं धुनोति। क्रुद्धः सिंहः तं प्रहर्तुमिच्छति परं वानरस्तु कूर्दित्वा वृक्षमारूढः।
उत्तर – प्रसङ्ग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (द्वितीयो भागः) के ‘सौहार्दं प्रकृतेः शोभा’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें वन के दृश्य तथा पशु-पक्षियों के व्यवहार का वर्णन है।
• सरलार्थ : वन का दृश्य है और पास ही एक नदी बह रही है। एक शेर सुखपूर्वक विश्राम कर रहा है। तभी एक बन्दर आकर उसकी पूँछ हिलाने लगता है। क्रोधित शेर उसे मारना चाहता है, परन्तु बन्दर कूदकर पेड़ पर चढ़ जाता है।

4. श्लोकं पठित्वा हिन्दीभाषया सप्रसङ्गं सरलार्थं लिखत- (4 अंक)
वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मलं जलम्।
कुत्सित वस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम्।।
उत्तर – प्रसङ्ग : प्रस्तुत श्लोक हमारी संस्कृत की पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (द्वितीयो भागः) के प्रथम पाठ ‘शुचिपर्यावरणम्’ से उद्धृत है। इसमें आधुनिक काल में बढ़ते प्रदूषण तथा दूषित वातावरण पर चिंता व्यक्त की गई है।
• सरलार्थ : आज वायुमण्डल अत्यधिक दूषित हो गया है और जल भी शुद्ध नहीं रहा है। भोजन गंदी वस्तुओं की मिलावट से युक्त हो गया है तथा पूरी धरती गंदगी से भर गई है।

अथवा

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महारिपुः।
नास्ति उद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।।
उत्तर – प्रसङ्ग : प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शेमुषी’ (द्वितीयो भागः) के ‘सुभाषितानि’ नामक पाठ से लिया गया है। इसमें आलस्य के दुष्परिणाम तथा परिश्रम के महत्त्व को बताया गया है।
• सरलार्थ : मनुष्य के शरीर में स्थित आलस्य उसका सबसे बड़ा शत्रु है। परिश्रम के समान कोई दूसरा मित्र नहीं है, क्योंकि परिश्रम करने वाला व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता।

5. मात्र द्वयोः सूक्तयोः भावार्थ हिन्दीभाषया लिखत- (2 × 2 = 4 अंक)
(क) शुचि पर्यावरणम्।
उत्तर – स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ और सुखी जीवन का आधार है। प्रदूषण को कम करके हमें अपनी प्रकृति और धरती को शुद्ध बनाए रखना चाहिए ताकि हम लंबी आयु और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त कर सकें।

(ख) बुद्धिर्बलवती सदा।
उत्तर – बुद्धि सदैव बल से श्रेष्ठ और शक्तिशाली होती है। संकट के समय शारीरिक शक्ति की अपेक्षा विवेक और बुद्धिमत्ता से काम लेना अधिक श्रेयस्कर होता है। जिस प्रकार बुद्धिमती ने अपनी बुद्धि के कौशल से व्याघ्र (बाघ) को भी भयभीत कर भगा दिया, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति बड़े से बड़े संकट को मात दे सकता है।

(ग) जननी तुल्यवत्सला।
उत्तर – माता का प्रेम अपनी सभी संतानों के प्रति एक समान होता है। यद्यपि माता के मन में दुर्बल या दीन संतान के प्रति स्वाभाविक रूप से अधिक करुणा या स्नेह हो सकता है, परंतु मूलतः वह किसी भी संतान में भेदभाव नहीं करती। जिस प्रकार कामधेनु ‘सुरभि’ अपने कष्ट में पड़े पुत्र (बैल) के लिए रोती है, वैसे ही हर माँ अपने बच्चों के दुःख में दुखी होती है।

अथवा

सान्वयं श्लोकस्य रिक्तस्थानानि मञ्जूषायाः उचितपदैः पूरयत- (4 अंक)
श्लोकः
सेवितव्यो महावृक्षः फलच्छायासमन्वितः।
यदि दैवात् फलं नास्ति छाया केन निवार्यते।।
अन्वयः
फलच्छायासमन्वितः ………..(1)………… सेवितव्यः ………..(2)………… यदि ………..(3)………… नास्ति ………..(4)………… केन निवार्यते।।
[मञ्जूषा– फलं, महावृक्षः, छाया, दैवात्]
उत्तर – (1) महावृक्षः, (2) दैवात्, (3) फलं, (4) छाया

6. प्रदत्तं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतपूर्णवाक्येन लिखत- (3 × 1 = 3 अंक)
तदैव एकः वानरः आगत्य सिंहस्य पुच्छं थुनोति। क्रुद्धः सिंहः तं प्रहर्तुमिच्छति परं वानरस्तु कूर्दित्वा वृक्षमारूढः।
(क) सिंहस्य पुच्छं कः धुनोति ?
उत्तर – सिंहस्य पुच्छं वानरः धुनोति।

(ख) वानरः कुत्र आरूढः ?
उत्तर – वानरः वृक्षे आरूढः।

(ग) ‘तदैव’ पदे सन्धिच्छेदं कुरुत।
उत्तर – तदा + एव

7. श्लोकं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतवाक्येन लिखत- (2 × 1 = 2 अंक)
एकेन राजहंसेन या शोभा सरसो भवेत्।
न सा बकसहस्रेण परितस्तीरवासिना।।
प्रश्नाः
(क) केन सरसः शोभा भवेत् ?
उत्तर – एकेन राजहंसेन सरसः शोभा भवेत्।

(ख) ‘राजहंसेन’ पदे का विभक्तिः ?
उत्तर – तृतीया विभक्तिः

8. रेखांकितं पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत कोष्ठकपदसहायतया- (3 × 1 = 3 अंक)
(क)  पुत्रं द्रुष्टुं सः प्रस्थितः। (कं / काम्)
उत्तर – कं

(ख) चौरस्य पादध्वनिना अतिथिः प्रबुद्धः। (कस्याः / कस्य)
उत्तर – कस्य

(ग) न्यायाधीशः बंकिम चन्द्रः आसीत्। (कः / कम्)
उत्तर – कः

9. प्रश्नपत्रे लिखितश्लोकान् त्यक्त्वा ‘शेमुषी-2’ पुस्तकाद् एकं श्लोकं संस्कृतेन लिखत। (4 अंक)
उत्तर – गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणो
बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः।
पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः,
करी च सिंहस्य बलं न मूषकः।।

खण्डः ‘घ’ (अनुप्रयुक्त-व्याकरणम्)

10. (क) स्वरसन्धेः अथवा व्यंजनेसन्धेः परिभाषां हिन्दीभाषया उदाहरणञ्च संस्कृतेन लिखत। (2 अंक)
उत्तर – स्वर संधि : दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को स्वर-संधि कहते हैं। उदाहरण: हिम + आलय = हिमालय
• व्यंजन संधि – व्यंजन का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। उदाहरण: सत् + जनः = सज्जनः

(ख) द्वन्द्व अथवा द्विगुसमासस्य परिभाषां हिन्दीभाषया उदाहरणञ्च संस्कृतेन लिखत। (2 अंक)
उत्तर – द्वन्द्व समास : जिस समास में प्रथम और द्वितीय दोनों पद प्रधान होते हैं उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। उदाहरण: माता-पिता (माता च पिता)
• द्विगु समास : वह समास है जिसमें पहला पद संख्या-वाचक होता है और समस्त पद किसी समूह या परिमाण का बोध कराता है। उदाहरण: त्रिलोकम् (तीनों लोकों का समाहार)

(ग) कर्ता अथवा करणकारकस्य परिभाषां हिन्दीभाषया उदाहरणञ्च संस्कृतेन लिखत। (2 अंक)
उत्तर – कर्ता कारक : कर्ता के जिस रूप से क्रिया (कार्य) को करने वाले का बोध होता है, वह कर्ता कारक कहलाता है। इसका विभक्ति-चिह्न ‘ने’ है। उदाहरण: रामः रावणं हतवान्।
• करण कारक : वह कारक है जो क्रिया करने के साधन या माध्यम को दर्शाता है, जिसके द्वारा कोई कार्य संपन्न होता है। इसके मुख्य विभक्ति-चिह्न ‘से’ और ‘के द्वारा’ होते हैं। उदाहरण: सः लेखन्या लिखति।

11. यथानिर्दिष्ट शब्दरूपाणि लिखत (चतुर्णाम्)- (4 × 1 = 4 अंक)
(क) ‘लता’ शब्दस्य प्रथमा-बहुवचने ।
उत्तर – लताः

(ख) ‘राम’ शब्दस्य द्वितीया-द्विवचने।
उत्तर – रामौ

(ग) ‘किम्’ (पु०) शब्दस्य तृतीया-एकवचने।
उत्तर – केन

(घ) ‘कवि’ शब्दस्य चतुर्थी-एकवचने।
उत्तर – कवये

(ङ) ‘अस्मद्’ शब्दस्य प्रथमा-बहुवचने।
उत्तर – वयम्

12. यथानिर्दिष्ट धातुरूपाणि लिखत (चतुर्णाम्)- (4 × 1 = 4 अंक)
(क) ‘पा’ (पिबु) धातोः लट्लकारस्य प्र० पु० एकवचने।
उत्तर – पिबति

(ख) ‘दृश्’ (पश्य्) धातोः लृट्लकारस्य म० पु० द्विवचने।
उत्तर – द्रक्ष्यथः

(ग) ‘गम्’ (गच्छ्) धातोः लङ्लकारस्य उ० पु० बहुवचने।
उत्तर – अगच्छाम

(घ) ‘कृ’ धातोः लट्लकारस्य प्र० पु० बहुवचने।
उत्तर – कुर्वन्ति

(ङ) ‘अस्’ यातोः लङ्लकारस्य प्र० पु० एकवचने।
उत्तर – आसीत्

13. उपपदविभक्ति वाक्येषु उचित विभक्ति पदेन रिक्तस्थानानि पूरयत कोष्ठकपदैः (त्रयाणामेव)- (3 × 1 = 3 अंक)
(क) सूरदासः …………. अन्धः। (नेत्रेण / नेत्राभ्याम्)
उत्तर – नेत्राभ्याम्

(ख) गुरुः …………. कुप्यति। (शिष्यं / शिष्याय)
उत्तर – शिष्याय

(ग) सीता ………….. सह वनं गच्छति। (रामाय / रामेण)
उत्तर – रामेण

(घ) धनं ………….. न सुखम्। (विना / ऋते)
उत्तर – विना

14. अव्ययपदानां सहायतया त्रयाणां रिक्तस्थानानि पूरयत- (3 × 1 = 3 अंक)
(क) प्रकृक्तिः …………… शरणम्। (एव / च)
उत्तर – एव

(ख) दुर्वहम् …………… जीवितं जातम्। (कुत्र / अत्र)
उत्तर – अत्र

(ग) भ्रमति …………… चक्रम्। (कदा / सदा)
उत्तर – सदा

(घ) …………… राजसिंहः वसति स्म। (तत्र / सर्वत्र)
उत्तर – तत्र

15. पदेभ्यः उपसर्गान् पृथक् कृत्वा लिखत (केवलं द्वयम्)- (2 × 1 = 2 अंक)
(क) पर्यावरणम्
उत्तर – परि + आवरणम्

(ख) दुर्वहम्
उत्तर – दुर् + वहम्

(ग) संधावति
उत्तर – सम् + धावति

खण्डः ‘ङ’ (पाठाभ्यासाधारिताः बहुविकल्पीयाः प्रश्नाः)

16. निर्दिष्ट प्रश्नेषु प्रदत्तवैकल्पिक चतुर्थ्यः उत्तरेभ्यः शुद्धम् उत्तरं चित्वा लिखत- (16 × 1 = 16 अंक)
(क) ‘प्रकृतिः + एव’ अत्र किं सन्धिपदम् ?
(i) प्रकृतिरेव
(ii) प्रकतिरेव
(iii) प्रकृतीरेव
(iv) कृतिरेव
उत्तर – (i) प्रकृतिरेव

(ख) ‘बहिरन्तः’ अत्र किं सन्धिविच्छेदः ?
(i) बहिः + रन्त
(ii) बहिः + अन्तः
(iii) बहीः + आन्तः
(iv) वहिः + आन्तर
उत्तर – (ii) बहिः + अन्तः

(ग) ‘मलेन सहितम्’ अत्र किं समस्तपदम् ?
(i) समलम्
(ii) सामलम्
(iii) सममलम्
(iv) सान्तमलम्
उत्तर – (i) समलम्

(घ) ‘पीताम्बरम्’ पदे कः विग्रहः ?
(i) पीता अम्बरम्
(ii) पीतम् अम्बरम्
(iii) पीत अम्बर
(iv) पितमम्बरम्
उत्तर – (ii) पीतम् अम्बरम्

(ङ) ‘निरर्थकम्’ शब्दस्य किं विलोमपदम् ?
(i) साथम्
(ii) सार्थकम्
(iii) सहर्थकम्
(iv) समार्थकम्
उत्तर – (ii) सार्थकम्

(च) ‘कृतघ्नता’ पदस्य किं विलोमपदम् ?
(i) कृतक्षता
(ii) कृतज्ञता
(iii) कृतज्ञ
(iv) कार्तज्ञता
उत्तर – (ii) कृतज्ञता

(छ) ‘शरीरम्’ पदस्य पर्यायपदं किम् ?
(i) तनुः
(ii) मनः
(iii) शरीरी
(iv) तनूः
उत्तर – (i) तनुः

(ज) ‘सूर्यः’ पदस्य पर्यायपदं किम् ?
(i) सवितुः
(ii) सवीत्र
(iii) सविता
(iv) सावित्री
उत्तर – (iii) सविता

(झ) ‘गृहीत्वा’ अत्र कः प्रत्ययः ?
(i) त्वा
(ii) कतवा
(iii) कृत्वा
(iv) क्त्वा
उत्तर – (iv) क्त्वा

(ञ) ‘बुद्धि + मतुप् + ङीप्’ संयोगे किं रूपम् ?
(i) बुदिमती
(ii) बुद्धीमति
(iii) बुद्धिमान्
(iv) बुद्धिमती
उत्तर – (iv) बुद्धिमती

(ट) ’20’ गणना स्थाने संख्यावाचीपदं किम् ?
(i) विंशतिः
(ii) बिंशति
(iii) वींशतीः
(iv) विंशशतिः
उत्तर – (i) विंशतिः

(ठ) ‘पंचाशत्’ पदस्य स्थाने का संख्या ?
(i) 500
(ii) 1500
(iii) 150
(iv) 50
उत्तर – (iv) 50

(ड) ‘अतिदीर्घतमः प्रवासः’ अत्र विशेष्यपदं किम् ?
(i) दीर्घतमः
(ii) अतिदीर्घतमः
(iii) पवासः
(iv) प्रवासः
उत्तर – (iv) प्रवासः

(ढ) ‘श्लाघा कथा’ अत्र विशेषणपदं किम् ?
(i) ष्लाघा
(ii) कथाः
(iii) कथा
(iv) श्लाघा
उत्तर – (iv) श्लाघा

(ण) ‘शेमुषी’ पदस्य किम् अर्थम् ?
(i) बुद्धि
(ii) ज्ञान
(iii) विज्ञान
(iv) नींद
उत्तर – (i) बुद्धि

(त) घटिकां दृष्ट्वा संस्कृतेन रिक्तस्थानं मञ्जूषापदेन पूरयत-
(I) रमा प्रातः …………… पठति।

(i) चार बजे
(ii) चतुरवादने
(iii) चतुष्टवादने
(iv) चतुर्वादने
उत्तर – (iv) चतुर्वादने

(II) देवः प्रातः ………….. भ्रमति।

(i) पाँच बजे
(ii) पंचमवादने
(iii) पनचवादने
(iv) पञ्चवादने
उत्तर – (iv) पञ्चवादने