Haryana Board (HBSE) Class 10 Music Question Paper 2025 with a fully solved answer key. Students can use this HBSE Class 10 Music Solved Paper to match their responses and understand the question pattern. This BSEH Music Answer Key 2025 is based on the latest syllabus and exam format to support accurate preparation and revision for the board exams.
HBSE Class 10 Music Question Paper 2025 Answer Key
SECTION – A (1 Mark)
1. तानपूरे में जोड़ी के तारों को किस स्वर में मिलाया जाता है?
(A) पंचम
(B) मध्यम
(C) ऋषभ
(D) षडज
उत्तर – (D) षडज
2. छायालग रागों में कितने रागों का मिश्रण होता है?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
उत्तर – (A) दो
3. जिस गीत में राग के लक्षणों का वर्णन होता है, उसे ………….. कहते हैं।
उत्तर – लक्षण गीत
4. अभिकथन (A) : राग वृन्दावनी सारंग की जाति औडव-औडय है।
कारण (R) : राग वृन्दावनी सारंग में ग-ध स्वर वर्जित हैं।
(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) अभिकथन (A) सत्य है, परन्तु कारण (R) असत्य है।
(D) अभिकथन (A) असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
उत्तर – (A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
5. ‘नाट्यशास्त्र’ ग्रंथ के कितने अध्याय संगीत से सीधा संबंध रखते हैं?
उत्तर – 6 अध्याय (अध्याय 28 से 33 तक)
SECTION – B (2 Marks)
6. तानपूरे का चित्र बनाइये अथवा तानपूरे के किन्हीं चार अंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर –

अथवा
तानपूरा एक तंत्री वाद्य है जिसका प्रयोग संगति के लिए किया जाता है। इसके प्रमुख अंग इस प्रकार हैं :
• तुम्बा : यह तानपूरे का नीचे का गोल और खोखला भाग होता है, जो ध्वनि में गूंज और अनुनाद उत्पन्न करता है।
• डाँड : यह तुम्बे के ऊपर लगी लंबी लकड़ी की गर्दन होती है, जिससे होकर तार गुजरते हैं।
• खूँटी : ये डाँड के ऊपरी भाग में लगी होती हैं, जिनकी सहायता से तारों को मिलाया (ट्यून) किया जाता है।
• घोड़ी : यह तुम्बे के ऊपरी भाग पर स्थित होती है, जिस पर तार टिके रहते हैं और उनकी कंपन तुम्बे तक पहुँचती है।
7. उत्तर भारत में कौन-सी स्वरलिपि पद्धति प्रचलित है? इस पद्धति में शुद्ध विकृत स्वरों के लिए किन-किन चिह्नों का निर्धारण किया गया है?
उत्तर – उत्तर भारत में विष्णु नारायण भातखंडे स्वरलिपि पद्धति प्रचलित है। इस पद्धति में शुद्ध स्वरों को सामान्य अक्षरों (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) से लिखा जाता है। कोमल स्वरों के लिए संबंधित स्वर के नीचे आड़ी रेखा ( _ ) लगाई जाती है, जबकि तीव्र स्वर के लिए स्वर के ऊपर खड़ी रेखा ( | ) का प्रयोग किया जाता है।
अथवा
उत्तर भारतीय स्वरलिपि पद्धति की लोकप्रियता के कोई चार कारण लिखें।
उत्तर – उत्तर भारतीय स्वरलिपि पद्धति की लोकप्रियता के कारण :
(i) उत्तर भारतीय स्वरलिपि पद्धति सरल और स्पष्ट है।
(ii) इसे सीखना और लिखना आसान है।
(iii) इससे रागों के स्वरूप को सही रूप में समझा जा सकता है।
(iv) यह पूरे उत्तर भारत में व्यापक रूप से प्रचलित है।
SECTION – C (3 Marks)
8. एकताल अथवा चारताल का संक्षिप्त परिचय देते हुए, इसे एकगुन तथा दुगुन लयकारियों में लिखिए।
उत्तर – एकताल (या चारताल) भारतीय शास्त्रीय संगीत का 12 मात्राओं का एक प्रमुख ताल है। इसमें 6 विभाग होते हैं तथा प्रत्येक विभाग में 2-2 मात्राएँ होती हैं। इसमें तालियाँ (1, 5, 9, 11) पर और खाली (3 व 7) पर होती हैं। इसका प्रयोग मुख्य रूप से ध्रुपद गायन एवं पखावज वादन में होता है।
एकताल की लयकारियाँ
• एकगुन : (मात्राएँ 12)
| धा धिन | धिन धा | धा ग तिरकिट | तू ना | क ता | धा ग तिरकिट | धिन ना |
• दुगुन : (प्रत्येक मात्रा में दो बोल आते हैं)
| धा-धा धिन-धिन | धिन-धिन धा-धा | धा-गा तिर-किट | तू-ना | क-ता | धा-गा तिर-किट | धिन-ना |
9. पंडित जसराज अथवा किशोरी अमोनकर की भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति क्या देन है। स्पष्ट करें।
उत्तर – पंडित जसराज ने मेवाती घराने को लोकप्रिय बनाने और उसे समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने ‘जसरंगी जुगलबंदी’ की शुरुआत की, जो मूर्छना की प्राचीन शैली पर आधारित पुरुष और महिला गायकों की अनूठी जुगलबंदी है। उन्हें भैरव राग परिवार, दरबारी कान्हड़ा और मियाँ की मल्हार जैसे रागों में विशेष महारत प्राप्त थी। उन्होंने भारत के साथ-साथ अमेरिका और कनाडा में भी संगीत शिक्षा देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रचार किया।
अथवा
किशोरी अमोनकर की भारतीय शास्त्रीय संगीत में देन
किशोरी अमोनकर ने संगीत को केवल स्वर नहीं, बल्कि साधना और भाव के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जयपुर-अतरौली घराने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उसे नई पहचान दी। उनकी गायकी में रागों के भावनात्मक और सैद्धांतिक पक्ष की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती है। वे खयाल के साथ-साथ ठुमरी और भजन गायन में भी निपुण थीं।
SECTION – D (5 Marks)
10. राग भीमपलासी अथवा राग खमाज का पूर्ण परिचय लिखते हुए किसी एक राग के छोटे ख्याल के स्थाई की स्वरलिपि लिखिए।
उत्तर – राग भीमपलासी उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग है। यह काफी थाट से उत्पन्न होता है। इसकी जाति औडव-सम्पूर्ण है, अर्थात् आरोह में पाँच तथा अवरोह में सात स्वर प्रयोग होते हैं। इसमें गंधार (ग) और निषाद (नि) कोमल तथा शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। ऋषभ (रे) और धैवत (ध) आरोह में वर्जित हैं। इस राग का वादी स्वर मध्यम (म) और संवादी स्वर षडज (सा) है। राग भीमपलासी का गायन समय दिन का तृतीय प्रहर (दोपहर के बाद) माना जाता है। इसका भाव शांत, गंभीर एवं शृंगार रस से युक्त होता है।
आरोह : नि सा ग म प नि सां
अवरोह : सां नि ध प म ग रे सा
पकड़ : नि सा म, म ग, प म, ग म ग रे सा
छोटे ख्याल के स्थायी की स्वरलिपि (ताल-तीनताल)
| म प | नी – | सां – | – – |
| जा | जा | रे – | – |
| सां – | नी ध | प म | ग म |
| अ – | पने | मंदी | रे – |
अथवा
राग खमाज उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध और मधुर राग है। यह खमाज थाट से संबंधित है। इसकी जाति षाडव-सम्पूर्ण है, अर्थात् आरोह और अवरोह दोनों में सातों स्वर प्रयोग होते हैं। इस राग में निषाद (नि) कोमल तथा शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग किए जाते हैं। राग खमाज का वादी स्वर गंधार (ग) तथा संवादी स्वर निषाद (नि) माना जाता है। इसका गायन समय रात्रि का दूसरा प्रहर होता है। इस राग की प्रकृति शृंगार और कोमल भावों से युक्त होती है। ठुमरी, दादरा और भजन गायन में इस राग का विशेष प्रयोग होता है।
आरोह : सा ग म प ध नि सां (इसमें ‘रे’ नहीं लगेगा)
अवरोह : सां नि ध प म ग रे सा (यहाँ ‘नि’ कोमल है)
पकड़ : ग म प ध नि सां, नि ध प म ग रे सा