HBSE Class 10 Home Science Question Paper 2025 Answer Key

Haryana Board (HBSE) Class 10 Home Science Question Paper 2025 with a fully solved answer key. Students can use this HBSE Class 10 Home Science Solved Paper to match their responses and understand the question pattern. This BSEH Home Science Answer Key 2025 is based on the latest syllabus and exam format to support accurate preparation and revision for the board exams.

HBSE Class 10 Home Science Question Paper 2025 Answer Key

1. इंडोर खेल है :
(A) हॉकी
(B) क्रिकेट
(C) शतरंज
(D) बैडमिंटन
उत्तर – (C) शतरंज

2. शिशुओं के दाँतों की संख्या कितनी होती है?
(A) 20
(B) 15
(C) 22
(D) 16
उत्तर – (A) 20

3. प्रबंधन का महत्त्व बढ़ने का कारण है :
(A) महंगाई
(B) बढ़ती हुई जनसंख्या
(C) इच्छाएँ
(D) ये सभी
उत्तर – (D) ये सभी

4. आराम करके हम ………….. का पुनः संचार कर सकते हैं।
(A) समय
(B) शक्ति
(C) धन
(D) ये सभी
उत्तर – (B) शक्ति

5. निम्नलिखित में से अविकारीय पदार्थ नहीं है :
(A) बाजरा
(B) साबूदाना
(C) दही
(D) चना
उत्तर – (C) दही

6. माँ के दूध में कौन-सा पौष्टिक तत्त्व नहीं होता है?
(A) कैल्शियम
(B) लोहा
(C) विटामिन ‘ए’
(D) पोटैशियम
उत्तर – (B) लोहा

7. प्रसव के बाद माँ के स्तनों से जो पीला पदार्थ स्रावित होता है, उसे ………….. कहते हैं।
उत्तर – कोलोस्ट्रम

8. विश्व उपभोक्ता दिवस ………….. को मनाया जाता है।
उत्तर – 15 मार्च

9. गेहूँ तथा दालों पर …………… मार्क लगाया जाता है।
उत्तर – एगमार्क

10. विकास की उस तीव्र अवस्था का नाम बताइए जब बालक वयस्कता की ओर बढ़ता है।
उत्तर – किशोरावस्था

11. किसी एक मानवीय साधन का नाम बताइए।
उत्तर – श्रम / समय /ज्ञान

12. वह प्रक्रिया जिससे खाद्य पदार्थ के गुण-पोषकता तथा प्रकृति में परिवर्तन आ जाता है।
उत्तर – खाद्य पकाना

13. अभिकथन (A) : कुछ खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं।
कारण (R) : खाद्य पदार्थों के खराब होने का कारण नमी और जीवाणु हैं।
विकल्प :
(A) केवल अभिकथन (A) सही है।
(B) केवल कारण (R) सही है।
(C) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(D) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
उत्तर – (C) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।

14. अभिकथन (A) : किशोरावस्था में प्रोटीन की आवश्यकता बढ़ जाती है।
कारण (R) : किशोरावस्था में विकास दर सबसे अधिक होती है।
विकल्प :
(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।
(B) केवल अभिकथन (A) सही है।
(C) केवल कारण (R) सही है।
(D) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
उत्तर – (A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं।

15. अभिकथन (A) : ईको मार्क मानकीकरण चिह्न पर्यावरण मैत्री उत्पादों को प्रदान किया जाता है।
कारण (R) : ईको मार्क का प्रतीकात्मक चिह्न तितली है।
विकल्प :
(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, किन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(C) अभिकथन (A) सही है, किन्तु कारण (R) गलत है।
(D) अभिकथन (A) गलत है, किन्तु कारण (R) सही है।
उत्तर – (C) अभिकथन (A) सही है, किन्तु कारण (R) गलत है।

16. रचनात्मक खेल को परिभाषित करें।
उत्तर – रचनात्मक खेल वे खेल होते हैं जिनमें बालक अपनी कल्पना, सोच और सृजनशीलता का प्रयोग करता है। इन खेलों से बालक की मानसिक क्षमता, आत्मविश्वास और रचनात्मक विकास होता है, जैसे चित्र बनाना, रंग भरना या मिट्टी से वस्तुएँ बनाना।

अथवा

खेल तथा कार्य में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर – खेल आनंद और मनोरंजन के लिए किए जाते हैं तथा इनमें थकान कम महसूस होती है, जबकि कार्य किसी उद्देश्य या आवश्यकता की पूर्ति के लिए किए जाते हैं और इनमें उत्तरदायित्व जुड़ा होता है।

17. P. F. A. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर – Prevention of Food Adulteration Act

18. समय प्रबंधन पर नोट लिखिए।
उत्तर – समय प्रबंधन का अर्थ है उपलब्ध समय का सही और योजनाबद्ध ढंग से उपयोग करना। उचित समय प्रबंधन से कार्य समय पर पूरे होते हैं, अनावश्यक तनाव कम होता है तथा व्यक्ति की कार्यक्षमता और सफलता में वृद्धि होती है।

19. बजट बनाने से परिवार को क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
उत्तर – बजट बनाने से परिवार की आय और व्यय पर उचित नियंत्रण बना रहता है। इससे अनावश्यक खर्च कम होते हैं, आवश्यकताओं की पूर्ति सही ढंग से होती है और भविष्य के लिए बचत व आर्थिक सुरक्षा संभव हो पाती है।

अथवा

चार पदार्थ जिससे स्टार्च बनाया जाता है, लिखिए।
उत्तर – स्टार्च आलू, गेहूँ, चावल और मक्का से बनाया जाता है। ये सभी कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं तथा शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले प्रमुख खाद्य पदार्थ हैं।

20. ड्रॉप्सी बीमारी का कारण तथा लक्षण बताइए।
उत्तर – ड्रॉप्सी बीमारी दूषित या मिलावटी सरसों के तेल के सेवन से होती है। इस रोग में शरीर में सूजन आ जाती है, विशेषकर पैरों और चेहरे पर। इसके अन्य लक्षणों में पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी तथा कभी-कभी साँस लेने में कठिनाई होना शामिल है।

21. लाल दवाई क्या है?
उत्तर – लाल दवाई एक एंटीसेप्टिक द्रव होती है, जिसका प्रयोग घाव या चोट पर किया जाता है। यह घाव में होने वाले संक्रमण को रोकती है और हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती है। इसके उपयोग से घाव जल्दी भरने में सहायता मिलती है और सूजन कम होती है।

अथवा

जैवले पानी पर नोट लिखिए।
उत्तर – जैवले पानी वह पानी होता है जिसमें उचित मात्रा में क्लोरीन या ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया से पानी स्वच्छ, सुरक्षित और पीने योग्य बनता है। जैवले पानी का उपयोग जलजनित रोगों से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए किया जाता है।

22. खनिज धब्बों के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर – खनिज धब्बों के उदाहरण हैं: स्याही का धब्बा, जंग का धब्बा, चूने का धब्बा तथा पसीने का धब्बा। ये धब्बे खनिज पदार्थों के संपर्क में आने से बनते हैं और यदि समय पर न हटाए जाएँ तो कपड़ों पर स्थायी निशान छोड़ सकते हैं।

23. संतुलित आहार तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?
उत्तर – संतुलित आहार तैयार करते समय व्यक्ति की आयु, लिंग और कार्य-प्रकृति का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आहार में सभी पोषक तत्व जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज उचित और संतुलित मात्रा में शामिल होने चाहिए ताकि शरीर की आवश्यकताएँ पूरी हों। इसके साथ-साथ परिवार की आय, भोजन की उपलब्धता, ऋतु तथा भोजन की आदतों को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है, जिससे आहार पौष्टिक, किफायती और स्वास्थ्यवर्धक बन सके।

अथवा

माता का शिशु को दूध पिलाना, शिशु तथा माता दोनों के लिए लाभकारी है, कैसे?
उत्तर – माता का शिशु को दूध पिलाना शिशु तथा माता दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। माँ का दूध शिशु को पूर्ण और संतुलित पोषण प्रदान करता है तथा उसे अनेक रोगों से सुरक्षा देता है, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास उचित रूप से होता है। माँ के लिए यह लाभकारी है क्योंकि इससे गर्भाशय शीघ्र सामान्य अवस्था में आ जाता है, प्रसव के बाद रक्तस्राव कम होता है और माँ का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

24. उपभोक्ता को कौन-कौन-से अधिकार प्राप्त हैं? सूचिबद्ध करें।
उत्तर – उपभोक्ताओं को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं :
(i) सुरक्षा का अधिकार
(ii) सूचित होने का अधिकार
(iii) चुनने का अधिकार
(iv) सुनवाई का अधिकार
(v) शिकायत निवारण का अधिकार
(vi) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
ये अधिकार उपभोक्ता को शोषण से बचाने और न्याय दिलाने में सहायक होते हैं।

25. एक अच्छे लेबल में क्या-क्या जानकारी होनी चाहिए?
उत्तर – एक अच्छे लेबल में उत्पाद से संबंधित सभी आवश्यक और सही जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए। इसमें उत्पाद का नाम, निर्माता का नाम व पूरा पता, वजन या मात्रा तथा मूल्य अवश्य लिखा होना चाहिए। इसके अतिरिक्त निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, उपयोग एवं भंडारण के निर्देश तथा मानकीकरण चिह्न (जैसे ISI, AGMARK) का उल्लेख भी होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता को वस्तु की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपयोग के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।

26. धब्बे छुड़ाने की प्रमुख विधियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर – धब्बे छुड़ाने की प्रमुख विधियाँ धुलाई विधि, रासायनिक विधि, शोषण विधि तथा ब्रश विधि हैं। धुलाई विधि में पानी और साबुन का प्रयोग किया जाता है, जबकि रासायनिक विधि में उपयुक्त रसायनों का उपयोग किया जाता है। धब्बे की प्रकृति और कपड़े के प्रकार के अनुसार सही विधि अपनाने से कपड़ा खराब नहीं होता और धब्बा आसानी से निकल जाता है।

27. किशोरावस्था में होने वाली प्रमुख समस्याएँ कौन-सी हैं? संक्षेप में वर्णन करें ।
उत्तर – किशोरावस्था में अनेक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक समस्याएँ देखने को मिलती हैं। इस अवस्था में शरीर में तेजी से शारीरिक परिवर्तन होते हैं, जिससे किशोरों में मानसिक तनाव और भावनात्मक असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। इसके साथ-साथ पोषण की कमी, आत्मविश्वास की कमी और व्यवहार में परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं, इसलिए इस अवस्था में उचित मार्गदर्शन, संतुलित आहार और सहयोग की आवश्यकता होती है।

अथवा

ऊर्जा प्रबंधन को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम बताइए।
उत्तर – ऊर्जा प्रबंधन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य की स्थिति तथा कार्य की प्रकृति शामिल होती है। इसके अतिरिक्त कार्य-पर्यावरण, कार्य करने की सही विधि, संतुलित पोषण, पर्याप्त विश्राम और प्रभावी समय-प्रबंधन भी ऊर्जा के उचित उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सभी कारकों का सही समन्वय होने पर व्यक्ति कम थकान के साथ अधिक कार्य कर सकता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होती है।

28. कार्य सरलीकरण के सिद्धान्तों के बारे में संक्षेप में बताइए।
उत्तर – कार्य सरलीकरण के सिद्धान्तों का मुख्य उद्देश्य कम समय, कम श्रम और कम ऊर्जा में कार्य को सरल तथा प्रभावी ढंग से पूरा करना है। इसके अंतर्गत सही उपकरणों और मशीनों का उचित चयन, कार्य-स्थान का सुव्यवस्थित आयोजन तथा कार्य की सही क्रमबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अनावश्यक गतिविधियों और दोहराव को हटाकर कार्य को आसान बनाया जाता है, जिससे थकान कम होती है और कार्यक्षमता व उत्पादकता में निरंतर वृद्धि होती है।

29. पारिवारिक आय को बढ़ाने के साधन बताइये।
उत्तर – पारिवारिक आय बढ़ाने के लिए नौकरी या व्यवसाय से अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। घर से छोटे कार्य जैसे ट्यूशन पढ़ाना, सिलाई करना, ऑनलाइन बिक्री करना या अपने कौशल (लेखन, डिजाइनिंग आदि) का उपयोग करके भी आय बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ-साथ खर्चों का सही प्रबंधन, बचत योजनाओं (जैसे PPF, FD) में निवेश और उचित बजट बनाना भी आय बढ़ाने जितना ही महत्वपूर्ण है, जिससे परिवार की वित्तीय स्थिरता बनी रहती है और भविष्य सुरक्षित होता है।

अथवा

पारिवारिक आय कितने प्रकार की होती है, वर्णन करें।
उत्तर – पारिवारिक आय के प्रकार :
(i) मौद्रिक आय – परिवार को धन या नकद के रूप में मिलने वाली आय, जैसे वेतन, मजदूरी, किराया और ब्याज। यह आय दैनिक खर्चों और आवश्यकताओं की पूर्ति का मुख्य साधन होती है।
(ii) वास्तविक आय – वस्तुओं और सेवाओं के रूप में प्राप्त आय, जैसे घर का बना भोजन, स्वयं का मकान तथा घरेलू कार्यों से होने वाली बचत। यह आय नकद न होकर भी परिवार के खर्च कम करने में सहायक होती है।
(iii) मानसिक आय – मौद्रिक और वास्तविक आय के उपयोग से मिलने वाली संतुष्टि, सुख और मानसिक शांति। यह आय परिवार के मानसिक संतुलन और खुशहाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

30. आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले कारकों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
उत्तर – आहार आयोजन का अर्थ है भोजन को सही समय, मात्रा और पोषण की आवश्यकता के अनुसार योजनाबद्ध ढंग से तैयार करना और ग्रहण करना। इससे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिलते हैं, जिससे व्यक्ति स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है तथा समय, श्रम और धन की बचत होती है।
• आहार आयोजन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक :
(i) व्यक्तिगत शारीरिक आवश्यकताएँ – व्यक्ति की आयु, लिंग, स्वास्थ्य स्थिति और शारीरिक गतिविधि के अनुसार पोषक तत्वों की आवश्यकता अलग-अलग होती है। जैसे बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग प्रकार और मात्रा का आहार आवश्यक होता है ताकि शरीर का सही विकास और स्वास्थ्य बना रहे।
(ii)आर्थिक कारक (आय व बजट) – परिवार की आय और बजट आहार की मात्रा, गुणवत्ता और विविधता को प्रभावित करते हैं। सीमित आय होने पर सस्ते, पौष्टिक और स्थानीय खाद्य पदार्थों का चयन किया जाता है, जबकि अधिक आय में विविध और महंगे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
(iii) सांस्कृतिक एवं सामाजिक कारक – धार्मिक मान्यताएँ, परंपराएँ और सामाजिक रीति-रिवाज भोजन के प्रकार, उसकी तैयारी की विधि और खाने के समय को प्रभावित करते हैं, जिससे आहार आयोजन का स्वरूप तय होता है।
(iv) जलवायु, मौसम व खाद्य उपलब्धता – मौसम के अनुसार भोजन का चयन किया जाता है। ठंड में ऊर्जादायक और गर्म भोजन तथा गर्मी में हल्का, तरल और पानी की मात्रा बढ़ाने वाला भोजन उपयुक्त माना जाता है। स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध और अधिक पौष्टिक होते हैं।
(v) व्यक्तिगत पसंद, ज्ञान व पानी का महत्त्व – व्यक्ति की पसंद-नापसंद, पोषण संबंधी ज्ञान और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन आहार आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सही जानकारी और पर्याप्त जल सेवन से आहार अधिक संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक बनता है।

अथवा

उपभोक्ता की समस्याओं पर प्रकाश डालें।
उत्तर – उपभोक्ताओं की प्रमुख समस्याएँ :
(i) घटिया गुणवत्ता और मिलावट – बाज़ार में कई बार नकली, मिलावटी और घटिया गुणवत्ता की वस्तुएँ बेची जाती हैं। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, विशेषकर खाद्य पदार्थों के मामले में, और उनका पैसा भी व्यर्थ चला जाता है।
(ii) अधिक मूल्य वसूली और तोल-माप में हेरफेर – कई दुकानदार निर्धारित मूल्य (MRP) से अधिक दाम वसूलते हैं या कम तौल कर सामान देते हैं। इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान होता है और वे शोषण का शिकार बनते हैं।
(iii) भ्रामक विज्ञापन और गलत जानकारी – आकर्षक लेकिन झूठे विज्ञापनों के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है। विज्ञापन में दिखाए गए गुण वास्तविक उत्पाद में नहीं होते, जिससे उपभोक्ता गलत निर्णय ले लेते हैं।
(iv) दोषपूर्ण उत्पाद और खराब सेवा – कई बार खरीदी गई वस्तुएँ जल्दी खराब हो जाती हैं या सही ढंग से काम नहीं करतीं। इसके बावजूद बिक्री के बाद उचित सेवा, मरम्मत या वारंटी-गारंटी का लाभ उपभोक्ता को नहीं मिल पाता।
(v) जागरूकता की कमी और शिकायत निवारण में कठिनाई – अधिकांश उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। शिकायत करने पर प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है, जिससे न्याय मिलने में देरी होती है।
(vi) जमाखोरी, कालाबाजारी और ऑनलाइन धोखाधड़ी – आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी से कृत्रिम अभाव पैदा किया जाता है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके अलावा ऑनलाइन खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी, नकली वेबसाइट और डेटा चोरी जैसी समस्याएँ भी उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौती बन गई हैं।

31. उपभोक्ता सहायता के प्रमुख साधनों पर टिप्पणी करें।
उत्तर – उपभोक्ता सहायता के प्रमुख साधन और उनकी भूमिकाएँ :
(i) राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) एवं INGRAM पोर्टल – राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन और INGRAM पोर्टल उपभोक्ताओं के लिए एक केंद्रीय ऑनलाइन मंच है, जहाँ वे फोन या इंटरनेट के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह उपभोक्ताओं, कंपनियों, नियामक संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों को एक साथ जोड़कर शिकायतों का त्वरित और सरल समाधान प्रदान करता है। यह वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली (ADR) के रूप में भी कार्य करता है।
(ii) उपभोक्ता फोरम / उपभोक्ता आयोग – उपभोक्ता फोरम जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित न्यायिक निकाय हैं। इनके माध्यम से उपभोक्ता घटिया वस्तु, दोषपूर्ण सेवा, अधिक मूल्य वसूली या धोखाधड़ी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कर सकता है। ये फोरम उपभोक्ताओं को कम खर्च में त्वरित न्याय और उचित मुआवजा प्रदान करते हैं।
(iii) मानकीकरण संस्थाएँ एवं गुणवत्ता चिह्न – भारतीय मानक ब्यूरो BIS, ISI, AGMARK, FSSAI और हॉलमार्क जैसी संस्थाएँ वस्तुओं की गुणवत्ता, शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। इन मानकीकरण चिह्नों से उपभोक्ता अच्छी, सुरक्षित और भरोसेमंद वस्तुओं की पहचान कर सकता है और मिलावट व नकली उत्पादों से बच सकता है।
(iv) उपभोक्ता संगठन – उपभोक्ता संगठन उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं। ये संगठन उपभोक्ताओं को कानूनी सलाह व सहायता प्रदान करते हैं तथा अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के विरुद्ध संगठित रूप से आवाज उठाकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हैं।
(v) उपभोक्ता अधिकार एवं उपभोक्ता शिक्षा – उपभोक्ताओं को सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चयन का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, निवारण का अधिकार और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। उपभोक्ता शिक्षा से उपभोक्ता जागरूक बनता है और वह मिलावट, कम तौल, अधिक मूल्य वसूली तथा धोखाधड़ी से स्वयं को बचा सकता है।
(vi) अन्य सहायक साधन (मीडिया, हेल्पलाइन व मोबाइल ऐप्स) – अखबार, रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, सरकारी विज्ञापन, हेल्पलाइन नंबर और BIS Care जैसे मोबाइल ऐप्स उपभोक्ताओं में जागरूकता फैलाने का कार्य करते हैं। राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस जैसे अभियानों से उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों की जानकारी मिलती है।

अथवा

धब्बों के प्रकार तथा उनको उतारने के सामान्य / आवश्यक नियमों के बारे में विस्तारपूर्वक व्याख्या करें।
उत्तर – कपड़ों पर लगने वाले धब्बे कपड़ों की सुंदरता और उपयोगिता दोनों को खराब कर देते हैं। यदि धब्बों को सही समय पर और सही तरीके से न हटाया जाए तो वे कपड़े पर पक्के हो जाते हैं और कपड़ा खराब हो सकता है। इसलिए धब्बों के प्रकार को पहचानना और उन्हें उतारने के सामान्य नियमों का ज्ञान होना आवश्यक है।
• धब्बों के प्रकार :
(i) चिकनाई वाले धब्बे – तेल, घी, मक्खन, क्रीम, करी आदि से लगने वाले धब्बे चिकनाई वाले धब्बे कहलाते हैं। ये धब्बे कपड़े पर फैल जाते हैं और धूल को जल्दी पकड़ लेते हैं। ऐसे धब्बे साबुन या डिटर्जेंट की सहायता से आसानी से निकाले जा सकते हैं।
(ii) प्रोटीन वाले धब्बे – दूध, खून, अंडा और मांस से लगने वाले धब्बे प्रोटीन वाले धब्बे होते हैं। ये धब्बे गर्म पानी से और पक्के हो जाते हैं, इसलिए इन्हें हमेशा ठंडे पानी से साफ़ किया जाता है।
(iii) टैनिन वाले धब्बे – चाय, कॉफी, फल, सब्ज़ी और स्याही से लगने वाले धब्बे टैनिन धब्बे कहलाते हैं। ये धब्बे पानी या हल्के साबुन से निकाले जाते हैं।
(iv) खनिज धब्बे – स्याही, जंग, चूना और दवाइयों से बने धब्बे खनिज धब्बे कहलाते हैं। ऐसे धब्बों को हटाते समय अधिक सावधानी रखनी पड़ती है।
• धब्बे उतारने के सामान्य / आवश्यक नियम :
(i) धब्बा लगते ही उसे तुरंत साफ़ करना चाहिए, क्योंकि पुराना धब्बा हटाना कठिन होता है।
(ii) धब्बे के प्रकार और कपड़े की प्रकृति को पहचानकर ही उसे हटाने की विधि अपनानी चाहिए।
(iii) धब्बे को ज़ोर से रगड़ना नहीं चाहिए, बल्कि हल्के हाथ से थपथपाकर साफ़ करना चाहिए।
(iv) पहले हल्के साधनों जैसे पानी या साबुन का प्रयोग करना चाहिए, आवश्यकता होने पर ही अन्य पदार्थों का प्रयोग करें।
किसी भी रसायन का प्रयोग करने से पहले कपड़े के छिपे हुए भाग पर परीक्षण कर लेना चाहिए।
(v) धब्बा हटने के बाद कपड़े को साफ़ पानी से अच्छी तरह धो देना चाहिए, ताकि रसायन का असर समाप्त हो जाए।