HBSE Class 10 Hindi Pre-Board Question Paper 2026 Answer Key
खण्ड – क
1. व्याकरण पर आधारित निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (1 × 7 = 7 अंक)
(i) ‘महात्मा’ समास का भेद बताइए :
(क) बहुव्रीहि
(ख) द्विगु
(ग) अव्ययीभाव
(घ) कर्मधारय
उत्तर – (घ) कर्मधारय
(ii) ‘अत्यधिक’ शब्द में कौन-सी संधि है?
(क) दीर्घ
(ख) गुण
(ग) यण्
(घ) वृद्धि
उत्तर – (ग) यण्
(iii) ‘भोर’ शब्द का पर्यायवाची शब्द कौन-सा है?
(क) उषा
(ख) गगन
(ग) अंतरिक्ष
(घ) भौंरा
उत्तर – (क) उषा
(iv) ‘वाचाल’ शब्द का विलोम कौन-सा है?
(क) वक्ता
(ख) श्रोता
(ग) मूक
(घ) ज्ञानी
उत्तर – (ग) मूक
(v) ‘अधिकार’ शब्द में उपसर्ग है :
(क) अ
(ख) आ
(ग) अधि
(घ) अधी
उत्तर – (ग) अधि
(vi) ‘बैठा’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
(क) ठा
(ख) ठ
(ग) अ
(घ) आ
उत्तर – (घ) आ
(vii) ‘अंत पाना’ मुहावरे का अर्थ होगा :
(क) मर जाना
(ख) रहस्य जानना
(ग) अंत तक जाना
(घ) निष्कर्ष जानना
उत्तर – (ख) रहस्य जानना
2. निम्नलिखित प्रश्नों के यथानिर्दिष्ट उत्तर लिखिए : (2 × 4 = 8 अंक)
(क) चौपाई छंद की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर – जिस रचना में अक्षरों, मात्राओ, यति, गति, तुक आदि नियमों का पालन हो, उसे चौपाई छंद कहते हैं। चौपाई के प्रत्येक चरण में 16 मात्राएं होती हैं। उदाहरण: रघु कुल रीत सदा चलि आई प्राण जायं पर वचन न जाई।
(ख) अविकारी शब्द की परिभाषा सोदाहरण लिखिए।
उत्तर – अविकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन, पुरुष या काल के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता। उदाहरण: आज, कल, यहाँ, वहाँ, धीरे, बहुत, क्योंकि
(ग) संधि की परिभाषा और उसके भेदों के नाम लिखिए।
उत्तर – दो समीपवर्ती वर्णों (ध्वनियों) के आपस में मिलने से जो विकार या परिवर्तन उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। संधि के मुख्य तीन भेद होते हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि।
(घ) शब्द किसे कहते हैं? उत्पत्ति के आधार पर शब्द के कितने भेद हैं?
उत्तर – शब्द वर्णों (अक्षरों) के उस सार्थक समूह को कहते हैं, जो किसी निश्चित अर्थ को प्रकट करता है। उत्पत्ति के आधार पर शब्द के चार भेद होते हैं: तत्सम, तद्भव, देशज तथा विदेशज (विदेशी)।
3. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए : (5 अंक)
(क) परिश्रम का महत्त्व
(ख) मेरे सपनों का भारत
(ग) समय का सदुपयोग
(घ) स्वच्छता का महत्त्व
(ङ) अनुशासन और सफलता
उत्तर – विवेकानुसार स्वयं करें।
4. व्यायाम का महत्त्व बताते हुए छोटे भाई को पत्र लिखिए। (5 अंक)
उत्तर –
प्रिय छोटे भाई,
सप्रेम नमस्कार।
आशा करता हूँ कि तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। आज मैं तुम्हें व्यायाम के महत्त्व के बारे में लिख रहा हूँ। व्यायाम हमारे शरीर को स्वस्थ, निरोग और तंदुरुस्त बनाता है। इससे हमारी रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है और मन प्रसन्न रहता है। हमें प्रतिदिन प्रातःकाल कम से कम आधा घंटा व्यायाम अवश्य करना चाहिए। व्यायाम से शरीर में स्फूर्ति आती है और आलस्य दूर होता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम करता है, वह सदैव सक्रिय और स्वस्थ रहता है।
अतः तुम भी नियमित रूप से व्यायाम करने की आदत डालो, ताकि तुम हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रहो।
तुम्हारा शुभचिंतक
रमेश
दिनांक : 27 जनवरी 20XX
स्थान : रोहतक
अथवा
अच्छे पुस्तकालय की स्थापना करने के लिए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए।
उत्तर –
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय,
रोहतक
विषय : विद्यालय में अच्छे पुस्तकालय की स्थापना हेतु प्रार्थना-पत्र
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का एक विद्यार्थी हूँ। हमारे विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, परंतु यहाँ एक अच्छे और सुव्यवस्थित पुस्तकालय का अभाव है। पुस्तकालय शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र होता है, जहाँ से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त कर अपने बौद्धिक विकास को सुदृढ़ करते हैं।
अच्छे पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की पाठ्य-पुस्तकों के साथ-साथ संदर्भ पुस्तकें, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ उपलब्ध हों तो विद्यार्थियों को अध्ययन में बहुत सहायता मिलेगी। इससे उनमें पढ़ने की रुचि बढ़ेगी और उनका सर्वांगीण विकास होगा।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में एक अच्छे पुस्तकालय की स्थापना करने की कृपा करें। इसके लिए हम सभी विद्यार्थी आपके आभारी रहेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
आपका आज्ञाकारी छात्र
रमेश
कक्षा : दसवीं
दिनांक : 27 जनवरी 20XX
खण्ड – ख
5. क्षितिज भाग-2 (काव्य खण्ड) के आधार पर निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (1 × 6 = 6 अंक)
(i) ‘उत ते धार बही’ में किसकी धार का उल्लेख है?
(क) दूध
(ख) दही
(ग) प्रेम
(घ) योग
उत्तर – (घ) योग
(ii) ‘रे नृपबालक कालबस’ किसे कहा गया है?
(क) राम को
(ख) लक्ष्मण को
(ग) विष्णु को
(घ) हनुमान को
उत्तर – (ख) लक्ष्मण को
(iii) ‘गागर रीति’ मे कवि किसके खालीपन की बात कह रहा है?
(क) तन
(ख) मन
(ग) घड़ा
(घ) घर
उत्तर – (ख) मन
(iv) ‘उत्साह’ किस प्रकार का गीत है?
(क) प्रेम
(ख) विरह
(ग) विवाह
(घ) आह्वान
उत्तर – (घ) आह्वान
(v) ‘परस पाकर’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) यमक
उत्तर – (क) अनुप्रास
(vi) संगतकार मुख्य गायक को क्या याद दिलाता है?
(क) जवानी
(ख) बुढ़ापा
(ग) बचपन
(घ) गीत
उत्तर – (ग) बचपन
6. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (1 × 5 = 5 अंक)
“हरि हैं राजनीति पढ़ि आए।
समुझी बात कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।
इक अति चतुर हुते पहिलै ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए।
बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग-संदेश पठाए।
ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए।
अब अपनै मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते चुराए।”
प्रश्न :
(क) इस काव्यांश का भाव पक्ष स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – इस काव्यांश में गोपियाँ श्रीकृष्ण पर व्यंग्य करती हैं। वे कहती हैं कि श्रीकृष्ण अब राजनीति पढ़कर चतुर हो गए हैं और प्रेम की सीधी बात न करके घुमाकर उत्तर देते हैं। योग और ज्ञान की बातें करके वे गोपियों के प्रेम से बचना चाहते हैं।
(ख) गोपियों ने क्यों माना कि श्रीकृष्ण ने राजनीति की शिक्षा प्राप्त कर ली थी?
उत्तर – क्योंकि श्रीकृष्ण सरल प्रेम की बात न करके चतुराई से योग और उपदेशों की बातें करने लगे थे, इसलिए गोपियों ने माना कि उन्होंने राजनीति की शिक्षा प्राप्त कर ली है।
(ग) गोपियों ने ‘बढ़ी बुद्धि जानी’ से क्या कहना चाहा है?
उत्तर – गोपियों का आशय है कि श्रीकृष्ण पहले से ही चतुर थे, पर अब उनकी बुद्धि और अधिक बढ़ गई है, जिससे वे प्रेम की बातों को टाल रहे हैं।
(घ) पुराने जमाने में सज्जन क्या किया करते थे?
उत्तर – पुराने जमाने में सज्जन लोग दूसरों के हित के लिए आगे बढ़कर सहायता किया करते थे।
(ङ) गोपियाँ क्या पाना चाहती थी?
उत्तर – गोपियाँ श्रीकृष्ण का प्रेम और उनका पहले जैसा अपनापन फिर से पाना चाहती थीं।
7. निम्नलिखित काव्यांश का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए : (3 अंक)
तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
उत्तर – यह काव्यांश मंगलेश डबराल की कविता ‘संगतकार’ से लिया गया है। इन पंक्तियों में मुख्य गायक की उस मानवीय कमजोरी का मार्मिक चित्रण है, जब वह ऊँचे स्वर (तारसप्तक) में गाते-गाते थक जाता है और उसकी प्रेरणा तथा उत्साह क्षीण होने लगते हैं। यह एक कलाकार के संघर्ष के चरम क्षण को व्यक्त करता है, जहाँ उसे असफलता का भय सताने लगता है। काव्यांश में प्रेरणा और उत्साह को सजीव रूप देकर मानवीकरण अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है। भाषा सरल, भावात्मक और प्रतीकात्मक है। तारसप्तक शब्द संगीतात्मक बिंब रचता है, जिससे काव्यांश की संवेदनशीलता और प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
8. (क) ‘फसल’ कविता द्वारा कवि हमें क्या संदेश देना चाहता है? (3 अंक)
उत्तर – नागार्जुन द्वारा रचित ‘फसल’ कविता के माध्यम से कवि मुख्य रूप से प्रकृति और मनुष्य (किसान) के अटूट संबंध तथा श्रम के महत्व का संदेश देता है। कवि बताता है कि फसल किसी एक व्यक्ति की देन नहीं होती, बल्कि यह लाखों-करोड़ों हाथों के स्पर्श और कठिन परिश्रम का परिणाम है। इस कविता में मिट्टी, पानी, हवा, सूर्य और किसान के श्रम के सामूहिक योगदान को रेखांकित किया गया है। साथ ही यह हमें प्रकृति के संसाधनों के प्रति कृतज्ञता और किसानों की अथक मेहनत के प्रति सम्मान रखने की प्रेरणा देती है।
(ख) ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर श्रीराम की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (3 अंक)
उत्तर – ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर श्रीराम की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
• अत्यंत विनम्र और मृदुभाषी : परशुराम के अत्यधिक क्रोधित होने पर भी श्रीराम शांत और आदरपूर्ण भाषा में संवाद करते हैं।
• धैर्यवान और शांत स्वभाव : उग्र परिस्थिति में भी श्रीराम संयम नहीं खोते और परशुराम के क्रोध को धैर्यपूर्वक सहन करते हैं।
• मर्यादा पुरुषोत्तम और सम्मानजनक आचरण : आक्रामक व्यवहार के बावजूद श्रीराम परशुराम का सम्मान करते हैं और बड़ों के प्रति आदर्श आचरण प्रस्तुत करते हैं।
खण्ड – ग
9. क्षितिज भाग-2 (गद्य खण्ड) के आधार पर निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उचित विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (1 × 6 = 6 अंक)
(i) नेता जी की प्रतिमा पर कैसा चश्मा था?
(क) सामान्य काले फ्रेम का
(ख) सोने का
(ग) चाँदी का
(घ) पत्थर का
उत्तर – (क) सामान्य काले फ्रेम का
(ii) ‘बालगोबिन भगत’ किस विधा का पाठ है?
(क) कहानी
(ख) नाटक
(ग) रेखाचित्र
(घ) निबंध
उत्तर – (ग) रेखाचित्र
(iii) नवाब साहब रेलगाड़ी में किस श्रेणी में सफर कर रहे थे?
(क) प्रथम
(ख) द्वितीय
(ग) तृतीय
(घ) वातानुकूलित
उत्तर – (ख) द्वितीय
(iv) मन्नू भण्डारी का जन्म कहाँ हुआ?
(क) मानपुरा
(ख) भानपुरा
(ग) शानपुरा
(घ) तानपुरा
उत्तर – (ख) भानपुरा
(v) शहनाई बजाने के प्रयोग में आने वाली रीड किससे बनती है?
(क) बाँस
(ख) नरकट
(ग) स्टील
(घ) तूंबी
उत्तर – (ख) नरकट
(vi) सभ्यता किसका परिणाम है?
(क) संस्कृति का
(ख) शिक्षा का
(ग) ज्ञान का
(घ) पैसे का
उत्तर – (क) संस्कृति का
10. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 1 × 5 = 5 अंक)
“संस्कृति के नाम से जिस कूड़े-करकट के ढेर का बोध होता है, वह न संस्कृति है न रक्षणीय वस्तु। क्षण-क्षण परिवर्तन होने वाले संसार में किसी भी चीज को पकड़ कर बैठा नहीं जा सकता। मानव ने जब-जब प्रज्ञा और मैत्री भाव से किसी नए तथ्य का दर्शन किया है तो उसने कोई वस्तु नहीं देखी है, जिसकी रक्षा के लिए दलबंदियों की ज़रूरत है।”
(क) संसार को कैसा कहा गया है?
उत्तर – संसार को क्षण-क्षण परिवर्तन होने वाला कहा गया है।
(ख) प्रज्ञा क्या है?
उत्तर – प्रज्ञा का अर्थ विवेकपूर्ण बुद्धि या ज्ञान है।
(ग) नए तथ्य का दर्शन किन दो विशेषताओं से होता है?
उत्तर – नए तथ्य का दर्शन प्रज्ञा और मैत्री भाव से होता है।
(घ) कूड़े-करकट का ढेर किसे कहा गया है?
उत्तर – संस्कृति के नाम पर फैली अनावश्यक और जड़ मान्यताओं को कूड़े-करकट का ढेर कहा गया है।
(ङ) मानव के दो विशेष गुण कौन-से हैं?
उत्तर – मानव में विवेकशीलता और सौहार्दपूर्ण दृष्टि जैसे विशेष गुण पाए जाते हैं।
11. मन्नू भण्डारी अथवा रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं, साहित्यिक विशेषताओं व भाषा शैली पर प्रकाश डालिए। (5 अंक)
उत्तर –
मन्नू भंडारी
• जन्म – मन्नू भंडारी का जन्म सन् 1931 में गाँव भानपुरा, जिला मंदसौर (मध्य प्रदेश) में हुआ।
• शिक्षा – उनकी इंटर तक की शिक्षा-दीक्षा हुई राजस्थान के अजमेर शहर में। उन्होंने हिंदी में एम.ए. किया। दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलिज में अध्यापन कार्य से अवकाश प्राप्ति के बाद दिल्ली में ही रहकर स्वतंत्र लेखन कर रही थी।
• रचनाएं – मन्नू भंडारी की प्रमुख रचनाएँ हैं- एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, यही सच है, त्रिशंकु (कहानी-संग्रह); आपका बंटी, महाभोज (उपन्यास)। इसके अलावा उन्होंने फ़िल्म एवं टेलीविज़न धारावाहिकों के लिए पटकथाएँ भी लिखी हैं। हाल ही में ‘एक कहानी यह भी’ नाम से आत्म कथ्य का प्रकाशन किया।
• साहित्यिक विशेषताएं – उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए हिंदी अकादमी के शिखर सम्मान सहित उन्हें अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिनमें भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कार शामिल हैं।
• भाषा शैली – मन्नू भंडारी की कहानियाँ हों या उपन्यास, उनमें भाषा और शिल्प की सादगी तथा प्रामाणिक अनुभूति मिलती है। उनकी रचनाओं में स्त्री-मन से जुड़ी अनुभूतियों की अभिव्यक्ति भी देखी जा सकती है।
• देहांत – मन्नू भंडारी की निधन 15 नवंबर 2021 को 90 वर्ष की आयु में गुड़गांव, हरियाणा में हुई थी।
अथवा
रामवृक्ष बेनीपुरी
• जन्म – रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म बिहार के मुजफ़्फ़रपुर जिले के बेनीपुर गाँव में सन् 1899 में हुआ। माता-पिता का निधन बचपन में ही हो जाने के कारण जीवन के आरंभिक वर्ष अभावों कठिनाइयों और संघर्षों में बीते।
• शिक्षा – दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे सन् 1920 में राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए। कई बार जेल भी गए। 15 वर्ष की अवस्था में बेनीपुरी जी की रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में छपने लगीं। वे बेहद प्रतिभाशाली पत्रकार थे।
• रचनाएं – उन्होंने अनेक दैनिक, साप्ताहिक एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया, जिनमें तरुण भारत, किसान मित्र, बालक, युवक, योगी, जनता, जनवाणी और नयी धारा उल्लेखनीय हैं। उनका पूरा साहित्य बेनीपुरी रचनावली के आठ खंडों में प्रकाशित है। उनकी रचना – यात्रा के महत्त्वपूर्ण पड़ाव हैं- पतितों के देश में (उपन्यास); चिता के फूल (कहानी); अंबपाली (नाटक); माटी की मूरतें (रेखाचित्र); पैरों में पंख बाँधकर (यात्रा-वृत्तांत); ज़ंजीरें और दीवारें (संस्मरण) आदि।
• साहित्यिक विशेषताएं – उनकी रचनाओं में स्वाधीनता की चेतना, मनुष्यता की चिंता और इतिहास की युगानुरूप व्याख्या है। विशिष्ट शैलीकार होने के कारण उन्हें ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है।
• भाषा शैली – बेनीपुरी जी की भाषा सरल एवं व्यावहारिक है। उनके द्वारा प्रयुक्त खड़ी बोली में सरलता, सुबोधता, सजीवता विद्यमान है। उनकी भाषा में भावानुकूल शब्द चयन किया गया है। उनकी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों के साथ-साथ तद्भव, देशज तथा अंग्रेजी एवं उर्दू के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है। उनकी भाषा में लोकोक्तियों एवं मुहावरों का भी प्रयोग किया गया है।
• देहांत – उनका निधन सन् 1968 में हुआ।
12 (क) नेता जी का चश्मा हर बार कैसे बदल जाता था? (2 अंक)
उत्तर – ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी में मूर्ति पर चश्मा कैप्टन चश्मेवाला बदलता रहता था। वह नेताजी के प्रति श्रद्धा के कारण अपनी दुकान में उपलब्ध फ्रेमों में से एक मूर्ति पर लगा देता था, लेकिन जब कोई ग्राहक वैसा ही फ्रेम माँगता, तो वह मूर्ति से उतारकर उसे दे देता था। इसी कारण मूर्ति पर चश्मा बार-बार बदल जाता था।
(ख) लेखक को खीरे खाने से इंकार करने पर अफसोस क्यों हो रहा था? (2 अंक)
उत्तर – लेखक को खीरे खाने से इंकार करने पर इसलिए अफसोस हुआ, क्योंकि नमक-मिर्च लगी ताज़ी खीरे की फाँकें देखकर उनका मन ललचा गया था। पहले ही मना कर देने के कारण आत्म-सम्मान के चलते वे उसे खा नहीं सके, इसी बात का उन्हें पछतावा हुआ।
खण्ड – घ
13. कृतिका भाग-2 के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए :
(क) ‘माता का आँचल’ पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए। (3 अंक)
उत्तर – ‘माता का आँचल’ पाठ का मूल भाव माँ के निस्वार्थ प्रेम, असीम ममता और निश्चल स्नेह को उजागर करना है। पाठ यह दर्शाता है कि बच्चे को जो सुरक्षा, शांति और निडरता माँ की गोद (आँचल) में मिलती है, वह कहीं और संभव नहीं। साँप से डरकर भोलानाथ का पिता के पास न जाकर माँ की शरण में जाना इस बात का प्रमाण है कि संकट के समय बच्चा माँ को ही सबसे सुरक्षित समझता है। पाठ में माँ के त्याग, देखभाल और बालपन की मासूम भावनाओं का भावपूर्ण चित्रण किया गया है।
(ख) ‘मैं क्यों लिखता हूँ’ पाठ के आधार पर हिरोशिमा की घटना को भयानकतम दुरुपयोग क्यों कहा जाता है? (2 अंक)
उत्तर – ‘मैं क्यों लिखता हूँ’ पाठ के अनुसार हिरोशिमा की घटना को भयानकतम दुरुपयोग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें विज्ञान और मानव बुद्धि का उपयोग मानवता की रक्षा के बजाय उसके विनाश के लिए किया गया। परमाणु बम के विस्फोट से एक ही क्षण में असंख्य निर्दोष लोग मारे गए और भयानक पीड़ा फैली। जले हुए पत्थर पर भाप बनकर उड़ गए व्यक्ति की छाया ने लेखक को विज्ञान के इस अमानवीय और विध्वंसक रूप का अनुभव कराया।
(ग) लेखिका को गंतोक से कंचनजंगा क्यों नहीं दिखाई दे रही थी? (2 अंक)
उत्तर – लेखिका को गंतोक से कंचनजंगा इसलिए दिखाई नहीं दे रही थी, क्योंकि सुबह मौसम साफ़ नहीं था और आसमान में बादल व हल्की धुंध छाई हुई थी। बादलों की चादर के कारण कंचनजंगा की चोटी ढकी हुई थी, जिससे लेखिका के दर्शन की इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
खण्ड – ङ
14. ‘आदर्श जीवन मूल्य’ के आधार पर निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (2 × 4 = 8 अंक)
(क) ईश्वर ही अपरिवर्तनीय सत्ता है, इसे उदाहरण सहित सिद्ध करें।
उत्तर – ईश्वर (परमात्मा) ही एकमात्र अपरिवर्तनीय (अचल) सत्ता है क्योंकि संसार की हर वस्तु-व्यक्ति जन्म, विकास, ह्रास और विनाश के चक्र से गुजरती है, जबकि ईश्वर सदा एक समान, अनादि और अनंत रहते हैं। उदाहरण के लिए, ऋतुएं बदलती हैं, मनुष्य का शरीर बचपन से बुढ़ापे तक बदलता है, लेकिन सूर्य का उदय, गुरुत्वाकर्षण का नियम और आत्मा के प्रति ईश्वर की सत्यता शाश्वत रहती है।
(ख) विचारों की जीवन में क्या भूमिका है?
उत्तर – विचार हमारे जीवन की आधारशिला हैं, जो हमारे व्यक्तित्व, दृष्टिकोण, और आचरण को निर्धारित करते हैं। ये सकारात्मकता, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाकर सफलता की राह दिखाते हैं। अच्छे विचार हमें समस्याओं का समाधान खोजने में मदद करते हैं, जबकि नकारात्मक विचार हमें पीछे धकेलते हैं।
(ग) किसी भी रूप में कार्यरत होते हुए क्या कर्म को पूजा बनाया जा सकता है? यदि हाँ तो कैसे?
उत्तर – हाँ, किसी भी रूप में कार्यरत होते हुए कर्म को पूजा (कर्म ही पूजा है) बनाया जा सकता है। जब कर्म को पूर्ण समर्पण, ईमानदारी, निस्वार्थ भाव और सेवा भावना के साथ किया जाता है, तो वह पूजा के समान हो जाता है। यह भगवान या मानवता की सेवा के रूप में कार्य करने की एक मानसिक स्थिति है।
(घ) अर्जुन किन गुणों के बल पर श्रेष्ठ धनुर्धारी बने?
उत्तर – अर्जुन तीव्र एकाग्रता, कठोर अभ्यास, लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण, धैर्य और गुरु के प्रति आदर के बल पर श्रेष्ठ धनुर्धारी बने। गुरु द्रोणाचार्य के निर्देशन में निरंतर अभ्यास और मानसिक दृढ़ता के कारण उन्होंने अद्भुत धनुर्विद्या प्राप्त की और सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी कहलाए।
(ङ) विनोबा भावे के गीता के संबंध में क्या विचार हैं?
उत्तर – आचार्य विनोबा भावे के अनुसार भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और व्यवहारिक जीवन-दर्शन है। वे मानते हैं कि गीता कर्मयोग का संदेश देती है और मनुष्य को निष्काम भाव से कर्म करने, अनासक्ति, समभाव और आत्मसंयम अपनाने की प्रेरणा देती है। उनके विचार में गीता का यह संदेश हर व्यक्ति, हर युग और हर परिस्थिति के लिए समान रूप से उपयोगी है।